राजस्थान में कांग्रेस को झटका, पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने छोड़ी पार्टी, बोले- 'गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं'
राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया और पार्टी नेतृत्व व मौजूदा कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि अगर सच को सच कहना और गलत का साथ नहीं देना पाप है तो वह यह पाप हर बार करेंगे, लेकिन गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाएंगे।

भरतपुर। राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया और पार्टी नेतृत्व व मौजूदा कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि अगर सच को सच कहना और गलत का साथ नहीं देना पाप है तो वह यह पाप हर बार करेंगे, लेकिन गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाएंगे।
कांग्रेस से निष्कासित किए जाने की संभावनाओं के बीच पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने शुक्रवार को फेसबुक पोस्ट में पार्टी अध्यक्ष को संबोधित करते हुए लिखा, "अध्यक्ष महोदय,मैंने जीवन में हमेशा मेरे इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज सुनकर ही फैसला लिया है। आज कुछ छुटभैये तथाकथित नेताओं ने जो अनर्गल बयान दिए हैं, उससे मेरे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। मेरा भी अंतरमन दुखी और व्यथित है।"
उन्होंने लिखा, "जिस पार्टी के लिए मैंने मेरा जीवन न्यौछावर कर दिया, आज उसी पार्टी ने अगर मेरी निष्ठा, ईमानदारी, कर्तव्य परायणता का यह सिला दिया तो मैं अंदर से बहुत हिल गया हूं। मैंने हमेशा मान, सम्मान और स्वाभिमान से जीवन जिया है। मैंने उसूल और आदर्शों से कभी कोई समझौता नहीं किया। मेरे कार्यकर्ताओं में मौजूदा चापलूसी की परंपरा के कारण आक्रोश है। अगर सच को सच कहना, गलत और झूठ का साथ नहीं देना पाप है तो मैं इसको हर बार करूंगा।"
विश्वेंद्र सिंह ने लिखा, "मैं न गलत करता हूं और न ही गलत सहन करता हूं। मेरा सार्वजनिक जीवन जनता जनार्दन की देन है। मैं इनके लिए ही जीता हूं और इनके लिए ही मरूंगा। मेरे खून का हर कतरा मेरे कार्यकर्ताओं, मेरे मतदाताओं, मेरे क्षेत्र वासियों और प्रदेश वासियों के लिए बहा है और बहेगा। मेरा सार्वजनिक जीवन खुली किताब है और बेदाग है। मैंने मेरे दामन पर कभी दाग न तो लगने दिया और ना ही लगने दूंगा। ऐसी परिस्थिति में दम घुटने से मरने के बजाय स्वाभिमान की मौत मरना बेहतर है।"
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, "मेरे पुरखों ने कभी ऐसी चीजों से कभी समझौता नहीं किया। उनका अनुसरण करते हुए मैं भी आपको अलविदा कहने में ही अपनी भलाई समझता हूं। मैं शायद अब आपकी गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाउंगा।"
विश्वेंद्र सिंह की यह पोस्ट ऐसे समय आई है, जब भरतपुर-डीग में निकाय चुनाव के परिणामों के बाद उन्होंने कांग्रेस के संगठन और प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। इस विवाद के बाद कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई थी और प्रदेश कांग्रेस स्तर पर मामले को लेकर रिपोर्ट मांगे जाने की बात सामने आई थी।


