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राजस्थान: एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में नरेश मीणा को हाई कोर्ट से मिली जमानत

राजस्थान हाई कोर्ट ने एक बार फिर निर्दलीय नेता नरेश मीणा को नवंबर 2024 में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एक एसडीएम को कथित तौर पर थप्पड़ मारने के मामले में जमानत दे दी।

राजस्थान: एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में नरेश मीणा को हाई कोर्ट से मिली जमानत
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जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक बार फिर निर्दलीय नेता नरेश मीणा को नवंबर 2024 में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एक एसडीएम को कथित तौर पर थप्पड़ मारने के मामले में जमानत दे दी।

जस्टिस अनिल उपमन ने मीणा को सशर्त बेल दी और उन्हें बेल पर रहते हुए हर महीने के पहले हफ्ते में संबंधित पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि बेल पीरियड के दौरान वह किसी दूसरे क्रिमिनल केस में शामिल नहीं होंगे और रिहाई के बाद अपनी पब्लिक इमेज को चमकाने से मना किया।

हाई कोर्ट ने पहले भी इसी केस में मीणा को बेल दी थी। हालांकि, टोंक में एससी/एसटी मामलों की स्पेशल कोर्ट ने जुलाई में उनकी बेल कैंसिल कर दी थी, जब प्रॉसिक्यूशन की अर्जी को स्वीकार कर लिया गया था, जिसमें बेल की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

कोर्ट ने अरेस्ट वारंट भी जारी किया, जिसके बाद मीणा ने सरेंडर कर दिया और उन्हें ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया।

कैंसिल करने की कार्रवाई नगरफोर्ट पुलिस स्टेशन में दर्ज एक केस से जुड़ी थी। पुलिस ने आरोप लगाया कि झालावाड़ में स्कूल से जुड़ी एक घटना में सात बच्चों की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार होने के बाद मीणा ने बेल की शर्तों का उल्लंघन किया था।

इसके बाद प्रॉसिक्यूशन ने उनकी बेल कैंसिल करने की मांग की। हाई कोर्ट ने अपने नए ऑर्डर में कहा कि मीणा को शुरू में बेल मिलने के बाद उनके खिलाफ दर्ज तीन केस में से दो में उन्हें आरोपी नहीं पाया गया। तीसरे मामले में कोर्ट ने देखा कि मीणा को हाई कोर्ट से पहले ही बेल मिल चुकी थी और वह रेगुलर पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगा रहा था।

मीणा के वकील रजनीश गुप्ता और फतेह राम मीणा ने दलील दी कि उनके क्लाइंट के खिलाफ दर्ज ज्यादातर केस पॉलिटिक्स से मोटिवेटेड थे। उन्होंने झालावाड़ केस का जिक्र करते हुए कहा कि हाई कोर्ट ने बेल देते समय कहा था कि मामला पहली नजर में पॉलिटिकल लग रहा है।

यह मामला 13 नवंबर, 2024 की एक घटना से जुड़ा है, जब मीणा, जो उस समय देवली-उनियारा उपचुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार थे, ने टोंक जिले के समरावता गांव में एसडीएम अमित चौधरी को कथित तौर पर थप्पड़ मारा था।

इस घटना के बाद समरावता और दूसरे इलाकों में आगजनी और तोड़-फोड़ हुई। बाद में मीना को हिंसा से जुड़े मामलों में गिरफ्तार कर लिया गया।


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