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राजस्थान पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में 3 नवंबर को मतदान, 10.68 लाख मतदाता करेंगे फैसला

राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के तीसरे चरण के लिए मंगलवार को 27 जिलों में मतदान होगा। इस चरण में 1.06 करोड़ से अधिक मतदाता 9,094 उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत तय करेंगे। मतदान 27 जिला परिषदों के 377 वार्डों और 116 पंचायत समितियों के 2,119 वार्डों के लिए होगा।

राजस्थान पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में 3 नवंबर को मतदान, 10.68 लाख मतदाता करेंगे फैसला
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जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के तीसरे चरण के लिए मंगलवार को 27 जिलों में मतदान होगा। इस चरण में 1.06 करोड़ से अधिक मतदाता 9,094 उम्मीदवारों की चुनावी किस्मत तय करेंगे। मतदान 27 जिला परिषदों के 377 वार्डों और 116 पंचायत समितियों के 2,119 वार्डों के लिए होगा।

कुल 1,305 उम्मीदवार 377 जिला परिषद सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे हैं जबकि 7,789 उम्मीदवार 2,119 पंचायत समिति सीटों के लिए मैदान में हैं।

चुनाव अधिकारियों के अनुसार, इस चरण में 1,06,81,567 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं। चुनाव कराने के लिए कुल 11,869 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में तीसरे चरण में पंचायत समिति सीटों पर सबसे अधिक उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। जिला परिषद वार्डों के लिए भी यहां उम्मीदवारों की अच्छी खासी संख्या है।

भरतपुर में 19 जिला परिषद वार्डों के लिए 91 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। दौसा और हनुमानगढ़ में जिला परिषद वार्डों की संख्या सबसे अधिक है, जहां दोनों जगह 24-24 वार्ड हैं। पंचायत समितियों में दौसा में सबसे अधिक 142 वार्ड हैं, जहां 474 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

भरतपुर में पंचायत समिति के 98 वार्डों के लिए चुनाव होंगे जिनमें 696 उम्मीदवार मैदान में हैं। यह इस चरण में किसी भी जिले में पंचायत समिति सीटों के लिए उम्मीदवारों की सबसे अधिक संख्या है। राज्यभर में हजारों उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने के साथ तीसरे चरण में जमीनी स्तर पर कड़ी चुनावी टक्कर देखने की उम्मीद है।

इसके अलावा, पंचायत चुनावों के इस तीसरे चरण में भाजपा और कांग्रेस दोनों को ग्रामीण राजस्थान में अपनी राजनीतिक ताकत की एक महत्वपूर्ण परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है। 17 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव दोनों पार्टियों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गए हैं।

इन जिलों में फैले 65 विधानसभा क्षेत्रों में से भाजपा के पास 30 सीटें हैं जबकि कांग्रेस के पास 27 सीटें हैं, जो राज्य स्तर पर एक कड़े मुकाबले का संकेत देती हैं। इस पृष्ठभूमि में, उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय जातिगत समीकरण, पार्टी नेताओं के बीच समन्वय और आंतरिक तोड़फोड़ को रोकने के प्रयास पंचायत चुनावों के परिणाम को निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

कांग्रेस के लिए चुनौती अंता विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत से मिली गति को बनाए रखना और अपने पारंपरिक वोट बैंक की रक्षा करना है। पार्टी को आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, जहां क्षेत्रीय पार्टी अपना प्रभाव बढ़ा रही है।

इसलिए चुनावी परिणाम ग्रामीण राजस्थान के राजनीतिक माहौल और भविष्य के चुनावी मुकाबलों से पहले दोनों राष्ट्रीय पार्टियों की संगठनात्मक शक्ति का एक महत्वपूर्ण संकेतक साबित होगा।


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