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राजस्थान की हर पीढ़ी ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया : सीपी राधाकृष्णन

राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को आयोजित अमृत महोत्सव में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विधानसभा परिसर पहुंचने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया

राजस्थान की हर पीढ़ी ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया : सीपी राधाकृष्णन
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जयपुर। राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को आयोजित अमृत महोत्सव में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विधानसभा परिसर पहुंचने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उन्होंने 'विधायी गौरव यात्रा: पूर्व और वर्तमान सदस्यों का सम्मेलन' के समापन सत्र में भाग लिया।

राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित यह समारोह देश में अपनी तरह का पहला आयोजन माना जा रहा है, जिसमें वर्तमान और पूर्व विधायक, सांसद तथा संवैधानिक पदाधिकारी एक ही मंच पर मौजूद रहे।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल संवैधानिक संस्थाओं की भव्यता में नहीं, बल्कि बहस की गुणवत्ता, आचरण की गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता में निहित होती है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से इन आदर्शों को अक्षरशः और भावना के साथ अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने राजस्थान की वीरता, बलिदान और देशभक्ति की गौरवशाली परंपरा को नमन करते हुए कहा कि राज्य की हर पीढ़ी ने देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब संवाद गरिमा के साथ हो और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा जाए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि चुनाव वोटों से जीते जाते हैं, लेकिन जनता का स्थायी सम्मान और स्नेह केवल ईमानदार जनसेवा से ही अर्जित किया जा सकता है। उन्होंने पूर्व और वर्तमान विधायकों को एक मंच पर लाने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे संस्थागत अनुभव और ज्ञान नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों तक पहुंचता है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को इस पहल के लिए बधाई दी।

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन जनता और संविधान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता सभी की साझा जिम्मेदारी है। हम किसी मुद्दे पर सहमत या असहमत हो सकते हैं, लेकिन जनता और संविधान के प्रति हमारी प्रतिबद्धता पर कोई मतभेद नहीं होना चाहिए।

उन्होंने राज्यसभा में दिए गए अपने संदेश को याद करते हुए कहा कि बहस, चर्चा या कभी-कभी व्यवधान भी अंततः किसी निर्णय तक पहुंचना चाहिए।

लोकसभा सदस्य के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि वस्त्र संबंधी संसदीय उपसमिति की सिफारिशों के आधार पर बाद में टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम लागू की गई थी। उन्होंने कहा कि समितियों और सदनों में दिए गए रचनात्मक सुझाव बड़े नीतिगत बदलावों का आधार बन सकते हैं।

तिरुक्कुरल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जो नेता जनता के लिए सहज उपलब्ध रहते हैं और विनम्र व्यवहार करते हैं, वे लोगों का स्थायी विश्वास जीतते हैं। नागरिकों की बात सहानुभूति के साथ सुनना और उनका सम्मान करना अच्छी नीतियां बनाने जितना ही महत्वपूर्ण है। संसद जहां पूरे राष्ट्र की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं राज्य विधानसभाएं गांव, कस्बों और परिवारों की उम्मीदों और चिंताओं को आवाज देती हैं। प्रत्येक विधायक पर लोकतंत्र के प्रति जनता के विश्वास को बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होती है।

सीपी राधाकृष्णन ने राजस्थान के साथ अपने लंबे राजनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत के योगदान को याद किया। उन्होंने पूर्व सांसद राजेश पायलट के साथ अपने संबंधों का भी स्मरण किया।

उपराष्ट्रपति ने जनप्रतिनिधियों से विधायी संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने, रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने और आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं छोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ईमानदारी, विनम्रता और समर्पण आवश्यक हैं तथा विकसित राजस्थान, विकसित भारत का अभिन्न हिस्सा है।

इस अवसर पर राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्य, विधि एवं न्याय मंत्री जोगाराम पटेल, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित वर्तमान और पूर्व विधायक मौजूद रहे। उपराष्ट्रपति ने राजस्थान विधानसभा के पूर्व अध्यक्षों, पूर्व उपाध्यक्षों और वर्तमान एवं पूर्व विधायकों को भी सम्मानित किया।


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