Top
Begin typing your search above and press return to search.

पंचायत चुनावों में देरी प्रशासनिक विफलता, राजस्थान सरकार के लिए शर्मनाक : गहलोत

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में देरी को लेकर भजनलाल शर्मा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की उस कड़ी मौखिक टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि "अगर आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो हमें बताएं, जज चुनाव करवा देंगे।"

पंचायत चुनावों में देरी प्रशासनिक विफलता, राजस्थान सरकार के लिए शर्मनाक : गहलोत
X

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने शुक्रवार को पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में देरी को लेकर भजनलाल शर्मा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट की उस कड़ी मौखिक टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि "अगर आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो हमें बताएं, जज चुनाव करवा देंगे।"

गहलोत ने कहा कि अदालत की यह टिप्पणी राज्य की बड़ी प्रशासनिक विफलता को दर्शाती है। उन्होंने राज्य की भाजपा सरकार के लिए इस स्थिति को शर्मनाक बताया।

गुरुवार को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में हो रही लंबी देरी पर नाराजगी जताई थी और मौखिक रूप से कहा था कि अगर राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराने में सक्षम नहीं है, तो हमें बताएं, जज चुनाव करवा देंगे। अदालत की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि देरी राज्य सरकार की बड़ी प्रशासनिक विफलता को दिखाती है।

कांग्रेस नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राज्य सरकार के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक क्या हो सकता है कि पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में जानबूझकर देरी के कारण माननीय हाईकोर्ट को कहना पड़ा कि 'अगर आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो हमें बताएं, जज चुनाव करवा देंगे।' यह राजस्थान सरकार की बड़ी प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।"

गहलोत ने हाईकोर्ट में दिए गए उन तर्कों का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि राज्य निर्वाचन आयोग ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के आरक्षण से जुड़ी जानकारी मांगने के लिए पंचायती राज विभाग को छह पत्र लिखे थे, लेकिन उसे जरूरी जानकारी नहीं मिली।

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पता चलता है कि पंचायती राज विभाग सरकार के दबाव में काम कर रहा है और राजस्थान सरकार समय पर चुनाव कराने की इच्छुक नहीं है।

गहलोत ने कहा, "सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है।" पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान सरकार पर बार-बार अदालत के निर्देशों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया और संवैधानिक सिद्धांतों और न्यायपालिका का अपमान बताया।

उन्होंने कहा, "जो सरकार न्यायपालिका का सम्मान करने में विफल रहती है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बाधा डालती है, उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है। ऐसी स्थिति लोकतंत्र के लिए बेहद नुकसानदायक है।"

गुरुवार की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को पंचायत और शहरी निकाय चुनाव कराने के लिए रोडमैप पेश करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने सरकार को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने और 20 जुलाई तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने के लिए भी कहा। इसके अलावा संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर चुनाव कार्यक्रम से जुड़ी पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया गया।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it