Top
Begin typing your search above and press return to search.

जयपुर में सीजेपी के स्कूल दौरे को लेकर विवाद: कांग्रेस ने सरकार को घेरा, भाजपा ने किया बचाव

जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सीजेपी कार्यकर्ताओं के एक स्कूल दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों ने कथित तौर पर स्कूल परिसर में कार्यकर्ताओं के प्रवेश का विरोध किया और उन्हें वापस जाने के लिए कहा

जयपुर में सीजेपी के स्कूल दौरे को लेकर विवाद: कांग्रेस ने सरकार को घेरा, भाजपा ने किया बचाव
X

जयपुर। जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सीजेपी कार्यकर्ताओं के एक स्कूल दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों ने कथित तौर पर स्कूल परिसर में कार्यकर्ताओं के प्रवेश का विरोध किया और उन्हें वापस जाने के लिए कहा। बाद में दोनों पक्षों के बीच कथित झड़प और मारपीट को लेकर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। मामले पर राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने सरकार पर निशाना साधते हुए घटना की निंदा की, जबकि मंत्री जोगाराम पटेल ने स्कूल में बिना अनुमति प्रवेश को नियमों के खिलाफ बताया।

गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि जो लोग सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा उठा रहे हैं या सवाल पूछ रहे हैं, उनके खिलाफ इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है। दिल्ली की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी विरोध करने वालों पर कार्रवाई हो रही है और राजस्थान में भी ऐसी स्थिति दिखाई दे रही है। बच्चों के ऊपर लाठी और पेलेट गन चलाने की बात सामने आई है। उन्होंने रामपुरा-कंवरपुरा की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि स्कूल में जाने वाले लोगों पर कथित तौर पर पत्थर फेंके गए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी घटनाओं के बीच देश में कानून का राज कहां है।

नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि राजस्थान की परंपरा हमेशा 'अतिथि देवो भव' की रही है। चाहे घर हो, गांव हो या शहर, बाहर से आने वाले व्यक्ति का सम्मान करना राजस्थान की संस्कृति रही है। स्कूल में जिस तरह की स्थिति सामने आई, उसमें यदि बच्चे या छात्र अपनी आवाज उठाना और अपने मुद्दे सामने रखना चाहते थे, तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। सरकार मुद्दों को सुनने के बजाय उन्हें दबाने का प्रयास कर रही है और इसे उन्होंने तानाशाही करार दिया।

वहीं, मंत्री जोगाराम पटेल ने सीजेपी कार्यकर्ताओं के स्कूल दौरे को लेकर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार किसी सरकारी कार्यालय, विद्यालय या महाविद्यालय में वही व्यक्ति प्रवेश कर सकता है, जिसे निरीक्षण या प्रवेश का अधिकार प्राप्त हो। यदि कोई अन्य व्यक्ति स्कूल में जाना चाहता है तो उसे विधिवत अनुमति लेनी चाहिए। यदि किसी ने बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश किया और बच्चों को भड़काने या उकसाने का प्रयास किया, तो ऐसा करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग या प्रधानाचार्य से अनुमति नहीं ली गई थी और संबंधित लोगों के बच्चे भी उस विद्यालय में नहीं पढ़ते हैं, तो उनका इस तरह स्कूल में जाना नियमों के विपरीत और निंदनीय है।

घटना के प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा करने वाले ग्रामीण जगदीश शर्मा ने कहा कि सुबह करीब 5-7 लोग स्कूल पहुंचे थे। ग्रामीणों ने उन्हें समझाया कि स्कूल में जिस काम की जरूरत थी, वह पूरा हो चुका है और अब उनकी आवश्यकता नहीं है। इसके बाद वे लोग वहां से चले गए। लेकिन, करीब आधे से एक घंटे बाद 50-70 लोग दोबारा वहां पहुंचे और कथित तौर पर जबरदस्ती स्कूल में जाने का प्रयास किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान गाली-गलौज हुई और ग्रामीणों के साथ धक्का-मुक्की भी की गई। ग्रामीण का दावा है कि दोबारा आए लोगों की गाड़ियों में लाठी, सरिया और डंडे जैसे सामान भी मौजूद थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

एक अन्य ग्रामीण राकेश मुंजाल ने दावा किया कि सुबह करीब 9 बजे सीजेपी से जुड़े 5-10 लोग गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि स्कूल के लिए फंड पहले ही स्वीकृत हो चुका है और उनकी जरूरत नहीं है। आरोप है कि इसके बाद वे लोग ग्रामीणों से कथित बदसलूकी करके चले गए और बाद में बड़ी संख्या में वापस लौटे।

मुंजाल ने आरोप लगाया कि दोबारा आए लोगों ने लाठी-डंडे साथ रखे थे। उन्होंने महिलाओं और बुजुर्गों के साथ बदसलूकी की। उन्होंने कहा कि गांव के लोग अपनी समस्याओं को लेकर विरोध कर रहे हैं और किसी भी राजनीतिक गतिविधि को गांव में स्वीकार नहीं करेंगे।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it