Top
Begin typing your search above and press return to search.

राहुल-प्रियंका की हिरासत पर अशोक गहलोत का तीखा हमला: बोले- 'विपक्ष की आवाज दबाना लोकतंत्र के लिए घातक, संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला'

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की आलोचना करते हुए देश में लोकतंत्र की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

राहुल-प्रियंका की हिरासत पर अशोक गहलोत का तीखा हमला: बोले- विपक्ष की आवाज दबाना लोकतंत्र के लिए घातक, संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला
X

जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने बुधवार को कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की आलोचना करते हुए देश में लोकतंत्र की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

दिल्ली में हाल के घटनाक्रम और दोनों कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।

जयपुर में मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और सवाल उठाया कि क्या भारत में लोकतंत्र इन बढ़ते तानाशाही कार्यों के बीच टिक पाएगा।

उन्होंने सवाल किया कि क्या भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी उसी तरह कमजोर किया जा रहा है, जैसा उनके विचार में चीन, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं को किया जा रहा है।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और प्रशासन की ऐसी कार्रवाइयां अप्रत्याशित नहीं थीं, और टिप्पणी की कि 'वे कुछ भी कर सकते हैं।'

उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना, साथ ही कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के प्रति पुलिस का आपत्तिजनक आचरण, देश की दिशा को दर्शाता है।

गहलोत ने कहा कि इस मुद्दे को केवल एक राजनीतिक दल या कुछ नेताओं का मामला नहीं समझना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, यह पूरे देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

गहलोत ने आकाशवाणी भवन के पास राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से जुड़े विरोध प्रदर्शन से संबंधित घटनाओं पर भी बात की।

गहलोत के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार और जनता को एक संदेश देने के उद्देश्य से किया गया था, क्योंकि लगभग 300 सांसदों ने चुनाव आयोग से मिलने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर उन्हें आयोग के अधिकारियों से मिलने की अनुमति नहीं मिली।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि चुनाव आयोग के अधिकारी विपक्षी इंडिया ब्लॉक के सांसदों से मिलने के लिए तैयार क्यों नहीं थे।

संसद में अपने अनुभव का हवाला देते हुए गहलोत ने कहा कि संसद परिसर एक अत्यंत सुरक्षित स्थान है और उन्होंने बताया कि उन्होंने वहां लगभग दो दशकों तक काम किया है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि तीनों चुनाव आयुक्तों ने वहां इंडिया ब्लॉक के सांसदों से मुलाकात की होती, तो 'वोट चोरी' के आरोपों और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे से संबंधित सवालों का पारदर्शी ढंग से समाधान करने का अवसर मिल सकता था।

इसके बजाय, उन्होंने आरोप लगाया कि यह अवसर चूक गया, नेताओं को हिरासत में लिया गया और बाद में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

गहलोत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं धीरे-धीरे कमजोर हो रही हैं और चेतावनी दी कि स्थिति 'खतरनाक दिशा' में बढ़ रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से घटनाक्रम पर सार्वजनिक बयान न दिए जाने पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि देश भर में कई स्थानों पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर, देश के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया और जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।

गहलोत के अनुसार, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया न मिलने से वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के कामकाज पर गंभीर सवाल उठते हैं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it