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अधिकारियों के भरोसे चुनाव लडऩा चाहते है मुख्यमंत्री: भूपेश

रायपुर ! प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आरोप लगाया है मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अगला चुनाव अधिकारियों के भरोसे लडऩा चाहते हैं।

अधिकारियों के भरोसे चुनाव लडऩा चाहते है मुख्यमंत्री: भूपेश
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रायपुर ! प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आरोप लगाया है मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अगला चुनाव अधिकारियों के भरोसे लडऩा चाहते हैं। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा सरकार के दबाव में आकर अधिकारी कार्य नहीं करें। अन्यथा 2018 में कांग्रेस की सरकार आने पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कुछ अधिकारी जो कान्टे्रक्ट बेस पर हैं, वे सरकार के एजेन्ट की तरह काम कर रहे हैं। ऐसे भ्रष्ट व गलत कार्य करने वाले अधिकारियों को मुख्यमंत्री का संरक्षण प्राप्त है। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह अधिकारियों के भरोसे चुनाव लडऩा चाहती हैं। इसलिए वे अपने चुनाव तैयारियों की शुरुआत कलेक्टरों, कमिश्नरों, एसपी और आईजी को धमकाकर कर रही हैं। कांग्रेस का मानना है कि उनका राजनीतिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, यह लोकतंत्र के लिए घातक है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस भवन में एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा है कि डॉ. रमन सिंह की सरकार अपने फायदे के लिए भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रही है। यही कारण है कि प्रशासनिक अधिकारियों पर मुकदमे चलाए जाने की अनुमति के सबसे अधिक मामले छत्तीसगढ़ में लंबित है। भूपेश बघेल ने कहा कि रमन सिंह सरकार ने विगत 13 वर्षो में प्रशासन का राजनीतिकरण कर दिया है जो लोकतंत्र के लिये खतरनाक हैं। कलेक्टरों के कामकाज की नियमिति समीक्षा करने के बजाय विशेष समीक्षा करने से स्पष्ट है कि सरकार नियमित कामकाज से विमुख रही है। चुनाव हारने की नौबत आ रही है तब प्रशासनिक मुस्तैदी सूझ रही है। अधिकारी निरंकुश और अनुशासनहीन हो गये है। आम जनप्रतिनिधी तो दूर वे मंत्रियों तक की परवाह नहीं करते। श्री बघेल ने कहा कि यह पहली बार नहीं हो रहा है कि डॉ. रमन सिंह अधिकारियों के भरोसे चुनाव लडऩा चाहते हो, इससे पहले भी वे अधिकारियों के जरिए चुनाव जीतने का इंतेजाम करते रहे है। श्री बघेल ने याद दिलाया कि चुनाव जीतने के लिये वर्ष 2008 में भ्रष्ट अधिकारियों की बदौलत 56 लाख परिवारों वाले प्रदेश में 72 लाख परिवारों का राशन कार्ड बनवा दिया था। नान घोटाले का जिक्र करते हुये कहा अब तक दोषी अधिकारियोंं के खिलाफ अभियोजन प्रस्तुत नहीं किया गया।
स्वच्छ भारत अभियान को पूरी तरह विफल बताते हुये कहा को शौचालय निर्माण के लक्ष्य दिये है जिसे नकारा प्रशासनिक ढांचा लक्ष्य पूरा करने के लिये राशन कार्ड रद्द करने की धमकी से जनता को डरा रहा है । यही नहीं लक्ष्य पूरा करने के लिये घटिया निर्माण कार्य हो रहा है।
श्री बघेल ने अधिकारियों से दो टूक कहा कि अधिकारी रमन सिंह की दलाली करना बंद करे। अब रमन सिंह हिट विकेट होने वाले है। कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि डॉ. रमन सिंह को जनता की चिंता नहीं है, सिर्फ भाजपा की चिंता है। कलेक्टर कांफे्रंस में जनता से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से क्यों कुछ नहीं कहा? राज्य में किसानो की आत्महत्या के मामले बढ़ रहे है, मुख्यमंत्री उस पर अपनी चिंता व्यक्त नहीं करते। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक धनेन्द्र साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री को घोषणा पत्र में किये गये वायदो पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिये। मुख्यमंत्री ने कलेक्टर कांफ्रेंस के जरिये अधिकारियों के राजनीतिक उपयोग करने का जो संदेश दिया है वह आपत्तिजनक है। पूर्व मंत्री एवं विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रशासन को अपवित्र करने की कोशिश हुई है। उन्होंने कहा प्रशासन को पारदर्शिता होना चाहिए।
ऐसे अधिकारियों को टीम से बाहर कर देंगे : अकबर
पूर्व मंत्री मो. अकबर ने कहा मुख्यमंत्री 15 ओवर में मनमाने ढंग से खेलने की नसीहत अधिकारियों को दे रहे हैं। पहले वे स्वयं ठीक से खेल लें। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा नियम विरूद्ध अधिकारी कोई भी कार्य नहीं करें। अन्यथा कांग्रेस सत्ता मेें आएगी तो किसी भी अधिकारी को छोडऩे वाली नहीं है। ऐसे लोगों को टीम से बाहर कर दिया जाएगा। मो. अकबर ने मानवाधिकार की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुये कहा कि मुख्यमंत्री के संरक्षण की वजह से अधिकारी इतने निरंकुश हो गये हैं कि आदिवासी महिलाओं के साथ पुलिस बल सामूहिक बलात्कार करता है और सरकार कार्यवाही तक नहीं करती है। महिला उत्पीडऩ में राज्य शीर्ष पर है, हजारों लड़कियां-बच्चियां हर वर्ष राज्य से गायब हो रही है। प्रदेश के अधिकारियों के माथे पर शिकन तक नहीं है क्योंकि प्रदेश के मुखिया को ही इसकी चिंता नहीं है। अधिकारियों की वरिष्ठता इस बात से तय हो रही है कि कौन मुख्यमंत्री को कितना प्रिय है?


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