हादसे के बाद टूटी नींद,20 होटल-लॉज को नोटिस,कलेक्टर ने गठित की जांच समिति
रायपुर ! राजधानी के रहमानिया चौक स्थित होटल तुलसी में विगत दिनों लगी आग में पांच लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई वहीं एक व्यक्ति गंभीर रुप से घायल हो गया।

रायपुर ! राजधानी के रहमानिया चौक स्थित होटल तुलसी में विगत दिनों लगी आग में पांच लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई वहीं एक व्यक्ति गंभीर रुप से घायल हो गया। जनहानि के साथ ही करोड़ों रुपया का माल भी ग्राउंड फ्लोर में निर्मित दुकानों में जलकर खाक हो गया। इस भयानक अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन और नगर निवेश विभाग की नींद खुली और खानापूरी के लिए नगर निवेश विभाग ने एक समिति गठित करते हुए 20 होटल एवं लाज संचालकों को नोटिस थमा दिया, लेकिन इस पर कितनी कड़ाई से अमल किया जाएगा यह देखने वाली बात है। फिलहाल नगर निवेश विभाग खानापूरी कर अपना पल्ला झाड़ कर अपने आपको पाक साफ साबित कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि राजधानी के होटल तुलसी में सोमवार को आगजनी की घटना को देखते हुए नगर निवेश विभाग द्वारा आज शहर के 20 होटल-लॉजों को नोटिस जारी किया है जिसमें मुख्यत: अग्नि सुरक्षा के प्रावधानों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। संयुक्त संचालक नगर निवेश ने बताया कि होटल-लॉजों को जारी की गई नोटिस में यह पूछा गया है कि भवन अनुज्ञा किसके लिए ली गई थी। उनके आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट का परीक्षण किया जाएगा। इन होटल-लॉजों में कितना खुला क्षेत्र है, कितनी मंजिल का निर्माण किया गया है। वहां लोगों के एन्ट्री व एक्जिट तथा वाहनों के पार्किंग की क्या व्यवस्था है। इन भवनों में फायर सेफ्टी, फायर अलार्म, अग्नि की रोकथाम के उपकरण तथा वाटर स्टोरेज की क्या-क्या व्यवस्था है। इनके पास इमरजेंसी प्लान है कि नही।
नगर निवेश विभाग द्वारा जिन होटल-लॉजों को नोटिस जारी की गई है। उनमें जीई रोड स्थित होटल हयॉत, होटल कोर्टयार्ड, होटल सायाजी, होटल जोन, होटल ब्लू बेरी, होटल ताज गेटवे, होटल लैडमार्क पंडरी, होटल आक्टोपस तेलीबांधा, होटल सिमरन पंडरी, होटल सूर्या कटोरातालाब, होटल कामिक पचपेढ़ी नाका, होटल वायवी वाय वल्लभ नगर, होटल नेस्ट शुक्ला पेट्रोल पंप के पास, होटल कारबिज दावड़ा कालोनी, होटल सुकून संतोषी नगर, होटल ए ब्लूसी रिंग रोड नंबर.1 भाठागांव, होटल एमराल्ड चंगोरभाठा, होटल सिटी प्लस रामकुण्ड तथा शालीमार लॉज हीरापुर शामिल है।
जिम्मेदारी तय नहीं
राजधानी में चार-पांच मंजिला भवनें एवं काम्पलेक्स का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। नगर निगम एवं भवन अनुज्ञा विभाग की अनुमति के बगैर निर्माण कैसे होता है यह समझ से परे है। जब ऐसे भवनों का निर्माण होता है तब नगर निगम भवन अनुज्ञा विभाग निगरानी क्यों नहीं करता। इन भवनों के निर्माण के लिए निगम अमला स्पष्ट रूप से दोषी नजर आता है जो निर्माण के दौरान ध्यान नहीं देता अथवा भ्रष्टाचार के चलते आसानी से निर्माण कार्य हो जाते हैं। नगर निगम अगर भवन निर्माण के दौरान सख्ती से निगरानी करे तो ऐसे वारदातों से बचा जा सकता है।
अधिकांश भवनों में सेफ्टी उपकरण नहीं
राजधानी के अधिकांश बड़े भवन एवं संस्थानों में आग से बचाव के उपकरण नहीं है। जिन भवनों में उपकरण हैं भी वे कालातीत हो चुके हैं। इन सेफ्टी उपकरणों की ओर जिला प्रशासन और ध्यान नहीं देता। इसके चलते मामूली रकम बचाने की फेर में संस्थान के संचालक एवं होटल व लाजों के मालिक लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। नियमत: जांच एवं रूटिन कार्रवाई से ऐसे हादसों से आसानी से बचा जा सकता है। लेकिन सरकारी विभाग सांप निकलने के बाद लाठी निकल आती है।
होटल-लॉजों की जांच करने समिति गठित
कलेक्टर ओपी चौधरी ने शहर की होटल-लॉजों की जांच के लिए एक समिति गठित की है। जिसमें राजस्व, पुलिस, नगर निगम तथा नगर निवेश विभाग के अधिकारी है। यह समिति होटल-लॉजों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की समुचित जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।


