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वैध अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं : अजय

रायपुर ! प्रदेश भर में पैरामेडिकल डिग्रीधारी चिकित्सकों, आयुर्वेद व होम्योपैथिक चिकित्सकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का मामला आज विधानसभा में गूंजा।

वैध अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं : अजय
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पैरामेडिकल चिकित्सकों पर कार्रवाई का मामला सदन में गूंजा
रायपुर ! प्रदेश भर में पैरामेडिकल डिग्रीधारी चिकित्सकों, आयुर्वेद व होम्योपैथिक चिकित्सकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का मामला आज विधानसभा में गूंजा। कांग्रेस विधायक दल ने इस मामले में कामरोको प्रस्ताव लाकर तत्काल चर्चा कराने मांग की। नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने प्रश्नकाल के तुरंत बाद यह मामला उठाया। भूपेश बघेल, धनेन्द्र साहू, वृहस्पति सिंह, अरूण वोरा, प्रीतम राम, अमित जोगी व अन्य सदस्यों ने इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा प्रदेश भर में करीब 500 अस्पतालों को सील कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्र की जनता स्वास्थ्य सुविधा से वंचित है। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों की भारी कमी है। सभापति देवजी पटेल ने व्यवस्था देते हुए कहा किसी न किसी रूप में इस पर चर्चा कराई जाएगी।
इस मामले में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि राज्य में कानूनी रूप से संचालित अस्पतालों और चिकित्सा संस्थाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है और उनमें मरीजों को नियमित रूप से निरंतर इलाज की सुविधा मिल रही है। श्री चंद्राकर ने आज विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पैरामेडिकल सर्टिफिकेट कोर्स के तहत पैरामेडिकल कार्य करने वालों को स्वतंत्र रूप से प्रेक्टिस (निजी व्यवसाय) करने का अधिकार नहीं है। श्री चंद्राकर ने कहा-यह कहना सही नहीं है कि कार्रवाई का दबाव बनाकर पैरामेडिकल कार्यकर्ताओं से अवैध वसूली की जा रही है। नियम विरूद्ध चलने वाले अस्पतालों और क्लिनिकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई उचित है। राज्य में छत्तीसगढ़ उपचर्या गृह रोगोपचार संबंधी संस्थापनाएं अधिनियम 2010 (नर्सिंग होम एक्ट) और इसके अंतर्गत नियम 2013 लागू है। इसके प्रावधानों के विपरीत अगर कोई संस्था चल रही है तो उसके खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए राज्य शासन द्वारा सभी जिलों में जिला और विकासखण्ड स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों द्वारा अवैध क्लिनिकों, पैथालॉजी लैब और नर्सिंग होम जैसी संस्थाओं, झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इस आरोप को भी गलत बताया कि कार्रवाई के फलस्वरूप स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है या मरीजों को परेशानी हो रही है। श्री चंद्राकर ने बताया-राज्य में एलोपैथिक, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा, सिद्धा, योगा, ये सभी पंजीकृत चिकित्सा की श्रेणी में आते हैं। इसलिए इन चिकित्सा पद्धतियों की संस्थाएं छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्या गृह रोगोपचार संबंधी संस्थापनाएं अधिनियम 2010 अथवा इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट के तहत वैध रूप से संचालित हैं। अत: इनके विरूद्ध कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा मंत्री बताया कि छत्तीसगढ़ उपचर्या गृह रोगोपचार संबंधी संस्थापनाएं नियम 2013 के तहत बायोमेडिकल कचरे का प्रबंधन अनिवार्य है। इसलिए जांच करने वाली टीमों के द्वारा पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए भी बायोमेडिकल कचरे से संबंधित बिन्दुओं पर भी जांच की जा रही है।


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