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मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अचानक पहुंचे महानदी के उद्गम स्थल

रायपुर ! मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह प्रदेश व्यापी लोक सुराज अभियान के अन्तर्गत आज अचानक महानदी के उदगम स्थल सिहावा पहुंच गए।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अचानक पहुंचे महानदी के उद्गम स्थल
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उदगम क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का होगा विकास,महानदी के संरक्षण पर दिया जोर

रायपुर ! मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह प्रदेश व्यापी लोक सुराज अभियान के अन्तर्गत आज अचानक महानदी के उदगम स्थल सिहावा पहुंच गए। उन्होंने सिहावा पर्वत के पास श्रृंगी ऋषि आश्रम के मुख्य पुजारी श्री ईश्वर दास से भी मुलाकात की। डॉ. सिंह ने छत्तीसगढ़ और ओडि़शा राज्यों की जीवन रेखा, लगभग आठ सौ किलोमीटर की इस नदी के उदगम स्थल का निरीक्षण किया।
उन्होंने सिहावा में नदी के उदगम स्थल और श्रृंगी ऋ षि आश्रम के आस-पास के क्षेत्रों में पर्यटन की दृष्टि से हर प्रकार की जरूरी व्यवस्था करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा- श्रंृगी ़ऋ षि आश्रम परिसर में सौर ऊर्जा से प्रकाश और पेयजल व्यवस्था भी की जाएगी। उदगम स्थल के संरक्षण और नदी के किनारों पर वृक्षारोपण आदि के कार्य भी करवाए जाएंगे। डॉ. सिंह ने कहा- यह एक पवित्र स्थल है। महानदी न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि देश की प्रमुख नदी है। इस नदी का संरक्षण हम सब की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा- मैं सौभाग्यशाली हूं कि आज मुझे महानदी के उदगम स्थल पर आने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सिहावा के लगभग 119 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पुलिस थाने का भी निरीक्षण किया। महर्षि श्रंृगी ऋ षि आश्रम के नीचे का यह इलाका काफी पहले बस्तर अंचल का हिस्सा था। अभिलेखों के अनुसार ब्रिटिश युग में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सन 1857 में वहां पुलिस चौकी खोली गयी थी और सन 1898 में पुलिस थाने का निर्माण किया गया था। यह भी उल्लेखनीय है कि बहुमूल्य वनसम्पदा से परिपूर्ण इस इलाके में अंग्रेजों के समय साल वृक्ष की इमारती लकड़ी परिवहन के लिए रायपुर से सिहावा क्षेत्र होते हुए ओडि़शा के ग्राम कुन्दई तक नेरोगेज रेल मार्ग का निर्माण किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के समय इंग्लैण्ड में लोहे की कमी होने के कारण अंग्रेज सरकार ने इस रेल लाईन के लोहे को निकलवाकर ब्रिटेन भेजा था। इस रेल मार्ग के अवशेष सिहावा क्षेत्र में आज भी कहीं-कहीं पर देखे जा सकते हैं
मुख्यमंत्री ने आज सिहावा के ऐतिहासिक पुलिस थाने के परिसर में सबसे पहले खंभेश्वरी देवी पूजा-अर्चना की। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि गांव के लोग अपने किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और होली, दीवाली जैसे पर्व की शुरूआत यहां आकर खंभेश्वरी देवी की पूजा के साथ करते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे काफी महत्वपूर्ण बताया। स्थानीय लोगों के अनुसार यह पुलिस थाना बस्तर अंचल मेें गुण्डाधूर के नेतृत्व में सन 1910 में अंग्रेजों के विरूद्ध हुए आंदोलन का भी सांक्षी है। मुख्यमंत्री ने सिहावा पुलिस थाने के पुराने रोजनामचों, वहां के माल थानों और ग्रामवार रखे पुराने अभिलेखों को भी देखा। डॉ. सिंह ने इन पुराने अभिलेखों को ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हुए इन्हें हमेशा सुव्यवस्थित और सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने सिहावा के समाधान शिविर में जनता को सम्बोधित किया। डॉ. सिंह ने वहां बैंक स्थापना, वन विभाग के स्थायी निस्तारी डिपो, डोंगरीपारा में 500 मीटर सीमेंट कांक्रीट रोड और मुकुंदपुर से लखनपुर तक आठ किलोमीटर सडक़ निर्माण करवाने की भी घोषणा की। डॉ. रमन सिंह ने यह भी कहा कि श्रंृगी ऋ षि आश्रम में सौर ऊर्जा से प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कडक़ेश्वर नाथ मेले सुविधाओं के विस्तार का भी आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने सिहावा क्षेत्र में मनरेगा के तहत 91 लाख रूपए की लागत से मिट्टी और मूरम और दो सडक़ों के निर्माणा का भी आश्वासन दिया। उन्होंने ग्रामीणों के आग्रह पर पुरानी चिरान लकड़ी के दोबार उपयोग के लिए वन विभाग के एस.डी.ओ. को वनमंण्डलाधिकारी की शक्तियां देने की भी घोषणा की।
उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों से कहा कि वन अधिकार मान्यता पत्र धारक सभी ग्रामीणों की जमीन को खेती योग्य बनाने के लिए समतलीकरण का काम जल्द करवाया जाए। डॉ. सिंह ने समाधान शिविर में राजस्व विभाग और आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विभाग के अधिकारियों को स्कूली बच्चों के निवास, जाति और आमदनी प्रमाण-पत्र उनके स्कूलों में ही बनवाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड और सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।


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