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विरोध के बीच नई आबकारी नीति पारित

रायपुर ! छत्तीसगढ़ आबकारी संशोधन विधेयक आज विभागीय मंत्री अमर अग्रवाल ने सदन मेें प्रस्तुत किया, विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद अंतत: विधेयक मत विभाजन के माध्यम से पक्ष में 49

विरोध के बीच नई आबकारी नीति पारित
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आबकारी संशोधन विधेयक 33 के मुकाबले 49 मतों से पारित
रायपुर ! छत्तीसगढ़ आबकारी संशोधन विधेयक आज विभागीय मंत्री अमर अग्रवाल ने सदन मेें प्रस्तुत किया, विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद अंतत: विधेयक मत विभाजन के माध्यम से पक्ष में 49 मत व विपक्ष में 33 मतों के आधार पर अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने पारित कर दिया। मत विभाजन में निर्दलीय विमल चोपड़ा व केशव चंद्रा ने हिस्सा नहीं लिया। अपने जवाब के दौरान अमर ने घोषणा की कि 3000 आबादी तक वाले गांव में शराब दुकाने नहीं खोली जायेगी। अमित जोगी ने विधेयक के खंड 2 में संशोधन के लिए प्रस्ताव रखा कविताओं के माधयम से सदन में अपने तर्क रखे, जिसे अध्यक्ष ने निरस्त कर दिया।
अमर अग्रवाल ने सदन में बताया कि राजस्व, कोचिया व आतंक को ध्यान में रख कर यह विचार किया गया है कि शराब अब प्रदेश में सरकारी निगम द्वारा बेची जा सकेगी। हम शराब की कम उपलब्धता, शराब का पैसा बाहर किसी के पास ना जाए, सरकार के पास आए और अब ठेकेदारों की दादागिरी नहीं होने देंगे। अमित जोगी ने अपने संशोधन प्रस्ताव की चर्चा में हेडगेवार की बात करते हुए कहा कि आपके गुरूजी ने नागपुर में शराब बंदी करने का जनता से आह्वान किया था आप छत्तीसगढ़ में उसके उलट शराब की दुकाने खोलने जा रहे हैं। विजय माल्या की खाली जगह आप सरकार के कुछ लोग भरने जा रहे हैं। अमित ने यह भी कहा कि आप 11 सदस्यों की टीम बना रहे हैं पर आबकारी कर का कहीं जिक्र नहीं है। वाणिज्यिक कर नया नाम दे दिया।
कुछ सदस्यों ने यह बात उठाई कि नवरात्री के दिनों में शराब की दुकाने खोलने जा रहे हैं आपको जनता इसका जवाब देगी, कम से कम आपको जनता की राय लेनी थी। सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि तीन दिन पहले आपने अध्यादेश क्यों लाया जब सत्र आ रहा था तो सदन में विधेयक लाना था। अध्यादेश लेकर सदन का अपमान किया है। जल्दबाजी किस बात की थी। अमर अग्रवाल ने कहा कि अब तक सरकार ठेकेदारों से बिकवा रही थी तो सब ठीक था अब हमने दुकाने चलने का अध्यादेश जारी कर कोचियों और ठेकेदारों को बाहर करने का निर्णय लिया तो सब दुनियाभर का ज्ञान बाँट रहे हैं। 2002 में ब्रेवरेज ये बनाएं तो ठीक, हम निगम बनाएं तो गलत। धनेन्द्र साहू, भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव समेत अनेक सदस्यों ने इसका विरोध व समर्थन में अपनी बातें सदन में रखीं।
इस संशोधन की प्रमुख बात यह है कि इसमें प्रावधान किया गया है कि राज्य शासन एसाधारण या विशेष आदेश द्वारा किसी मादक द्रव्य विकृत स्प्रिट युक्त निर्मित या भांग का विनिर्माण, आ निर्यातए परिवहन, भण्डारण, क्रय, थोक विक्रय, फुटकर विक्रय या संग्रहण का अन्यधिकार राज्य शासन के पूर्ण स्वामित्व व नियंत्रण के किसी भी निगम को प्रदान कर सकेगा। आबकारी आयुक्त नियमों के तहत निगम को आवश्यक लाइसेन्स प्रदान कर सकेगा। उसके बाद निगम प्रयोजनो ंके लिए अपनी ईकाई, शाखाएं, गोदाम, दुकान स्थापित कर सकेगा।
सट्टा, देह व्यापार बढ़ेंगे तो क्या देह व्यापार कानून हो जाएगा : देवजी़
भाजपा विधायक देवजीभाई पटेल ने कहा कि आबकारी की नई नीति लागू करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। शराब की वजह से प्रदेश का माहौल अशांत हो गया है। उन्होंने कहा कि लालच के लिए कोई महिला शराब के विरोध में सामने नहीं आ रही है। उन्हें इस बात का लालच नहीं है कि महिला कमांडो बनने से उन्हें साड़ी, टॉर्च व लाठी मिलेगी। इसी छत्तीसगढ़ में जुआ, सट्टा, देह व्यापार के मामले बढ़ रहे है, तो इस पर रोकथाम लगाने सरकार आने वाले दिनों में जुआ-सट्टा खिलाएगी। देह व्यापार के लिए कानून बनाएगी। जन भावना शराबबंदी के पक्ष में है, उसे लागू कीजिये।

सिर्फ 5 विधायक ज्यादा हैतो सरकार को इतना घमंड क्यों
अमर की टिप्पणी पर नेता प्रतिपक्ष टी एस सिंहदेव ने आपत्ति जतायी। सिंहदेव ने कहा कि ये कैसा सत्तापक्ष है। सिर्फ 5 विधायक ज्यादा हैं और उस पर सत्तापक्ष को इतना घमंड। क्या सत्तापक्ष तय करेगा कि विपक्ष का क्या अधिकार है और क्या नहीं? तीसरी बार आने पर इतना घमंड है सत्ता पक्ष को! नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमारी सरकार जब आएगी तब पूर्ण शराबबंदी करेंगे। जवाब में मंत्री अमर अग्रवाल ने चुटकी लेते हुए कहा कि घोषणा करने में क्या न सरकार आएगी न पूरा करेंगे। कांग्रेस मुक्त भारत की ओर बढ़ रहे। हमारा अध्यादेश आया तो विपक्ष के लोगों को उसके रेट तक मालूम हो गए। उन्होंने कहा कि धरसींवा के परसतराई में कुर्मी समाज के शराबबंदी का संकल्प लेना अच्छी बात है। इसके पूर्व अमित जोगी ने नई आबकारी नीति का विरोध करते हुए कहा कि इसके लिए जनता से राय लिया जाना चाहिए। ढाई करोड़ जनता के लिए इसे विनाशकारी बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी नोटबंदी पर समाचार पत्रों व टीवी पर जनता से राय मांगी थी। उन्होंने सत्ता पक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी बने रहिए भट्टी पार्टी न बनें।

मां से पूछ लीजिए मैंने शराब पीना छोड़ दिया: अमित
अमित जोगी ने आबकारी संशोधन विधेयक पर चर्चा करते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मैंने शराब पीना छोड़ दिया है। यकीन ना आये तो मेरी मां यहां बैठी है वो बता देंगी! इस पर रेणु जोगी ने कहा जून 2013 से उन्होंने शराब पीना छोड़ दिया है। उसके पहले का पता नहीं। इधर संशोधन लाने वाले अमित जोगी ने चर्चा के दौरान कहा कि 1 अप्रैल को शराब की नई नीति लागू हो जायेगी उस दिन संघ के संस्थापकों में से एक हेडगेवार की जयंती है । उन्होंने कहा कि सरकार विजय माल्या की जगह लेना चाहती है। इस विधेयक पर जनता से राय ली जानी चाहिए। पहली बार बजट में आबकारी कर का जिक्र नहीं है। मुझे लगा अब सरकार शराब नहीं बेचेगी पर कर का नाम बदल दिया और लक्ष्य भी बढ़ा दिया। इसके पूर्व भूपेश बघेल ने कहा कि शराब बेचने का काम पहली बार सरकार कर रही है। बजट में इसका जिक्र नहीं है। इसका बावजूद दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश में बेवरेज कार्पोरेशन है फिर भी दूसरा बेवरेज कार्पोरेशन क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पवित्र नहीं है। सरकार पर हमला करते हुए कहा कि 85 विधायकों ने शराबबंदी के लिए फार्म भर कर दिया है। उन्होंने सरकार से विधेयक को वापस लेने का आग्रह किया।

मां से पूछ लीजिए मैंने शराब पीना छोड़ दिया: अमित
अमित जोगी ने आबकारी संशोधन विधेयक पर चर्चा करते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि मैंने शराब पीना छोड़ दिया है। यकीन ना आये तो मेरी मां यहां बैठी है वो बता देंगी! इस पर रेणु जोगी ने कहा जून 2013 से उन्होंने शराब पीना छोड़ दिया है। उसके पहले का पता नहीं। इधर संशोधन लाने वाले अमित जोगी ने चर्चा के दौरान कहा कि 1 अप्रैल को शराब की नई नीति लागू हो जायेगी उस दिन संघ के संस्थापकों में से एक हेडगेवार की जयंती है । उन्होंने कहा कि सरकार विजय माल्या की जगह लेना चाहती है। इस विधेयक पर जनता से राय ली जानी चाहिए। पहली बार बजट में आबकारी कर का जिक्र नहीं है। मुझे लगा अब सरकार शराब नहीं बेचेगी पर कर का नाम बदल दिया और लक्ष्य भी बढ़ा दिया। इसके पूर्व भूपेश बघेल ने कहा कि शराब बेचने का काम पहली बार सरकार कर रही है। बजट में इसका जिक्र नहीं है। इसका बावजूद दुकानों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश में बेवरेज कार्पोरेशन है फिर भी दूसरा बेवरेज कार्पोरेशन क्यों बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य पवित्र नहीं है। सरकार पर हमला करते हुए कहा कि 85 विधायकों ने शराबबंदी के लिए फार्म भर कर दिया है। उन्होंने सरकार से विधेयक को वापस लेने का आग्रह किया।


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