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अगले कुछ महीनों में रेलवे खुले में शौच मुक्त हो जाएगा : रेलवे बोर्ड चेयरमैन

भारतीय रेलवे अगले कुछ महीनों में ही खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो जाएगा

अगले कुछ महीनों में रेलवे खुले में शौच मुक्त हो जाएगा : रेलवे बोर्ड चेयरमैन
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नई दिल्ली। भारतीय रेलवे अगले कुछ महीनों में ही खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो जाएगा। आमतौर पर गंदगी व बदबू से भरे रहने वाले रेलवे ट्रैक, खासकर रेलवे स्टेशन के क्षेत्र में पड़ने वाले ट्रैक की सफाई से अब यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। भारतीय रेलवे के सभी रेल कोच में जल्द ही बायो-टॉयलेटलग जाएंगे।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वी. के. यादव ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारतीय रेलवे अगले साल तक ओडीएफ का लक्ष्य हासिल कर लेगा क्योंकि अभी केवल पांच फीसदी रेल कोच ही ऐसे बचे हैं, जिनमें पारंपरिक शौचालय हैं।

यादव ने कहा, "70 हजार रेल कोच में से केवल 2,362 कोच में ही बायो-टॉयलेट स्थापित किए जाने बाकी है। अगले कुछ महीनों में हम खुले में शौच से मुक्त हो जाएंगे।"

उन्होंने कहा कि लगभग 95 फीसदी कोच में बायो-टॉयलेट लगा दिए गए हैं और हम चोकिंग व अन्य समस्याओं से निपट चुके हैं, जिनका हमने शुरुआत में सामना किया था। यादव ने कहा कि अब हम बायो-टॉयलेट को अच्छे स्तर पर बनाए रखने में सक्षम हैं।

विशेष रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों में बदबू वाले शौचालयों के लिए रेलवे को लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ता है। बायो-टॉयलेट की शुरुआत से पहले स्वच्छता की कमी और बदबू संबंधी काफी परेशानियां रहती थीं। उस समय तक ट्रेनों में शौच के प्रबंधन की कोई व्यवस्था नहीं थी और यह रेल की पटरियों के बीच खुले में ही गिरता था।

इसके विपरीत बायो-टॉयलेट में मानव अपशिष्ट (शौच) पटरियों पर नहीं जाता, बल्कि इसे एनारोबिक बैक्टीरिया द्वारा पानी और जैव गैसों में बदल दिया जाता है।

बायो-टॉयलेट को पहले नए कोचों में फिट किया गया था, जिसके बाद इसे पुराने कोच में पारंपरिक शौचालय की जगह लगाया गया। यह काम मुंबई के परेल, भोपाल और झांसी स्थित रेलवे वर्कशॉप में किया जाता है।

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा कि वह बायो-टॉयलेट को अगले उन्नत स्तर पर ले जाने वाले हैं।

उन्होंने कहा, "हम बॉयो वैक्यूम टॉयलेट पर काम कर रहे हैं। हमने आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्डस ऑर्गनाइजेशन) के साथ मिलकर एक नई तकनीक विकसित की है, जो बायो टॉयलेट कम वैक्यूम टॉयलेट होगी।"

वैक्यूम सिस्टम शौचालय के फ्लशिंग में पानी के उपयोग को काफी कम कर देता है।

रेल मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रेलवे के लिए शौचालयों का सुचारु संचालन बहुत आवश्यक है, क्योंकि कुछ ट्रेन की यात्रा 30 से 40 घंटे तक चलती है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ये जैव-वैक्यूम शौचालय गंध रहित हैं और इससे पानी के उपयोग में काफी कटौती होती है।

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर रेलवे की योजनाओं के बारे में एक सवाल पर यादव ने कहा, "पिछले पांच वर्षों में रेलवे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वच्छ भारत अभियान' के तहत सेवाओं में सुधार किया है। रेलवे ने अभियान को बढ़ावा देने के लिए 'स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत' को भी अपनाया है।"


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