रायगढ़ जिले के विकास कार्यों की भी समीक्षा करेंगे मुख्यमंत्री?
रायगढ़ ! छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला विकास की गति में लगातार पिछड रहा है जिसका कारण है अधिकारियों की लगातार लापरवाही तथा बंद पड़े कार्यो को शुरू नहीं करवा पाना सबसे बड़ा कारण है।

सालों से पिछड़ा हुआ है रायगढ़ जिला
महिला अधिकारियों से क्या मिलेगी मुक्ति
रायगढ़ ! छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला विकास की गति में लगातार पिछड रहा है जिसका कारण है अधिकारियों की लगातार लापरवाही तथा बंद पड़े कार्यो को शुरू नहीं करवा पाना सबसे बड़ा कारण है। जिले में छत्तीसगढ़ के मुखिया ने सोंच समझ कर कलेक्टर से लेकर जिला पंचायत सीईओ के अलावा डीएफओ, जनपद पंचायत सीईओ, अतिरिक्त कलेक्टर, पीआरओ के साथ-साथ कई महिला अधिकारी की नियुक्ति की थी, लेकिन बीते दो सालों के भीतर प्रशासनिक कसावट नही होनें के चलते सालों पहले शुरू किये गये विकास कार्य पूरी तरह ठप्प पड गये हैं जबकि ये सभी कार्य स्वयं छत्तीसगढ़ के मुखिया डॉ रमन सिंह ने शुरू करवाये थे जिसमें बहुप्रशिक्षित सांस्कृतिक भवन, मेरीन ड्राईव, सिटी बस योजना के साथ-साथ तालाबों का सौंदर्यीकरण के साथ-साथ गौरवपथ जैसे बडे कार्य शामिल है और इनके आधे अधूरे रहने से शहर के सौंदर्यीकरण पर ग्रहण सा लग गया है।
आज मुख्यमंत्री रायगढ़ आ रहें है और विभागों की समीक्षा बैठक के दौरान विकास कार्यो की समीक्षा भी करेंगेेउनको चाहिए कि वे जिले के कलेक्टर से लेकर अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से इस बात की जानकारी लें कि आखिर जिले के विकास कार्यो को गति क्यों नही मिली और इनके पूरा नही करने के लिये कौन दोषी है? कई सालों बाद प्रदेश के मुखिया समीक्षा बैठक में बारिकियों को भी देखें कि किस प्रकार जिले में बैठे अधिकारी विकास कार्यो को छोडक़र अपने स्वयं की अपने फायदे के लिये अपने कार्यो की खानापूर्ति करते आ रहे थे। शहर की सबसे बडी महत्वकांक्षी योजना सिटी बस के शुरू नही होनें से सभी 20 बसें उर्दना पुलिस लाईन में धुल खा रही है और लगातार जर्जर होनें के चलते शासन को करोड़ो का नुकसान भी हो रहा है। जबकि इनके शुरू होनें से शहर से लेकर ग्रामीण स्तर के लोगों को सर्वाधिक फायदा होता लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मामले में दो सालों से कोई रूचि तक नही ली है। यही हाल जिले के सांस्कृतिक भवन का है जो आज भी आधा अधूरा बना है जबकि सांस्कृतिक नगरी में चक्रधर समारोह जैसे बडे आयोजन के साथ-साथ अन्य कई आयोजन होते हैं और इन्हीं मांग को देखते हुए सांस्कृतिक भवन बनाने की घोषणा पांच साल पहले की गई थी पर यह भवन अपनी पूर्णता की बाट जोह रहा है। शनिमंदिर से लेकर सर्किट हाउस तक बनने वाली नई मरीन ड्राईव आधी अधूरी है और इसमें भी सीएसआर मद से दो करोड़ से भी अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है और दो सालों से इसका काम बंद होनें के चलते शहरवासियों को मरीन ड्राईव नही होनें से कई परेशानियों से जूझना पड़ता है जबकि यह मरीन ड्राईव शहर की यातायात व्यवस्था के लिये एक बडी पहल थी। यही हाल पुरानी मरीन ड्राईव का भी है जहां से देर रात कोयला एवं आयरन ओर से लदे डंपर व हाईवा रौंदते हुए निकलते है और भारी वाहनों के प्रयोग होनें से पूरी मरीन ड्राईव अपना अस्तित्व खोते जा रही है। यहां बने हाट बाजार की दुकानों का भी उद्घाटन करीब 3 साल पहले आप के द्वारा किया गया था और आज तक यहां बनी दुकानों का आबंटन होना तो दूर बल्कि यहां किसी प्रशासनिक अधिकारी ने झांका तक नही है। जिसके चलते यहां की दुकानें असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुकी है और अप्राकृतिक कृत्य भी यहां लगातार हो रहें है। विकास कार्य से लगातार पिछड रहे इस रायगढ़ जिले में सडक़ों की हालत बद से बदतर है और इनको सुधारने के प्रयास भी नही होनें से छोटी-बडी दुर्घटनाओं में भी लगातार इजाफा हुआ है। प्रशासनिक अक्षमता का उदाहरण यह भी है कि गौरवपथ के नाम से बनने वाली सडक़ों में आज भी कई सडक़ें ऐसी है जो आधी अधूरी है और इनको पूरा करने के लिये कोई पहल नही हो रही है। मुख्यमंत्री ऐसे मामलों में अधिकारियों की खबर लेंगे ऐसी सोंच रायगढ़ की जनता की है चूंकि लंबे समय से विकास की बाट जोहते रायगढ़ जिले में अधिकारी राज होनें से सभी विकास कार्यो को एक ग्रहण सा लग गया है।


