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राहुल की भारत जोड़ो यात्रा बनी कर्नाटक में कांग्रेस का विजयपथ

22 दिन कर्नाटक में भारत जोड़ो यात्रा की थी राहुल ने। 30 सितम्बर से 21 अक्टूबर तक कर्नाटक में थे राहुल। 511 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर्नाटक में की राहुल ने। भारत जोड़ो यात्रा ने बदला कर्नाटक की जनता का मूड

राहुल की भारत जोड़ो यात्रा बनी कर्नाटक में कांग्रेस का विजयपथ
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जबरदस्त जीत तो भाजपा को करारी शिकस्त मिली है। कांग्रेस की इस जीत के कई कारण हैं लेकिन इन कारणों को एक माला में पिरोने का काम राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने किया है। भारत जोड़ो यात्रा के रूट वाली एक भी सीट पर भाजपा जीत दर्ज नहीं कर सकी।
30 सितम्बर से 21 अक्टूबर तक राहुल गांधी कर्नाटक में रहे। मौका था उनकी भारत जोड़ो यात्रा का। उन्होंने अपनी यात्रा का सबसे लंबा समय कर्नाटक को दिया। उनका विजन साफ था कि कर्नाटक को जीत कर ही कांग्रेस दक्षिण भारत में अपनी पकड़ बना सकती है। उसी बीच गुजरात में भी विधानसभा चुनाव थे लेकिन राहुल गांधी गुजरात नहीं गए बल्कि उन्होंने पूरा फोकस कर्नाटक पर किया।
उन्होंने 22 दिन में कर्नाटक में 511 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा चामराज नगर, मैसूर, माईया, तुमकुर, चित्रदुर्ग, बेल्लारी क्षेत्रों से निकली। और इन्हीं जिलों ने कांग्रेस के जीत की नींव मजबूत की।
इस यात्रा के रूट पर भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया। भाजपा अपना खाता भी नहीं खोल सकी और शून्य पर सिमट गई। मैसूर को तो जेडीएस का गढ़ माना जाता रहा है।
लेकिन भारत जोड़ो यात्रा का असर ऐसा रहा कि जेडीएस के इस गढ़ में भी कांग्रेस ने जेडीएस से 17 सीटें छीन ली। यह पूरे आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस ने कर्नाटक में को ऐतिहासिक जीत दर्ज की है उसकी नींव राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ही रख आए थे। इस यात्रा में राहुल गांधी को आम आदमी से जुड़ने और उसकी समस्या समझने का मौका दिया।
राहुल गांधी समझ गए कि कर्नाटक की जनता भ्रष्टाचार बेरोजगारी महंगाई से परेशान है, कांग्रेस ने पूरे चुनाव केंपेन में इन्हीं मुद्दों पर फोकस किया। राहुल गांधी ने 511 किलोमीटर की यात्रा में जो मेहनत कि उसका उसका फल कांग्रेस का आज 136 सीटों पर जीत के रूप में मिला है।


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