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कव्वाली अल्लाह से मिलवाने का माध्यम: शाबरी

 कव्वाली रूहानियत का पैगाम देती है और अल्लाह से मिलवाने का माध्यम बनती है

कव्वाली अल्लाह से मिलवाने का माध्यम:  शाबरी
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रायगढ़। कव्वाली रूहानियत का पैगाम देती है और अल्लाह से मिलवाने का माध्यम बनती है। ख्वाजा गरीब नवाज से यह ईबादत शुरू होती है और उन्हीं पर न्यौछावर भी होती है। आज के दौर में कव्वाली फ्यूजन के साथ मिलकर रिपीट हो रही है और लोगों तक पहुंचकर पॉपुलर हो रही है। कव्वाली का मतलब मुकाबला नही है बल्कि यह एक मुकम्मल पैगाम देती है। जिसमें गु्रप का भी योगदान रहता है। देश के मशहूर कव्वाल रईस अनिस शाबरी ने आज रायगढ़ में प्रेस वार्ता के दौरान यह बातें रखी।

रायगढ़ के ऐतिहासिक चक्रधर समारोह में शिरकत करने पहुंचे श्री शाबरी ने कहा कि उनके लिए यह एक बडी बात है कि उन्हें चक्रधर समारोह जैसे मंच पर कव्वाली गाने का मौका मिला है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षो के दौरान देश के अलग-अलग विधाओं के नामचीन कलाकारों से इस दस दिवसीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित समारोह के बारे में सुना और जाना है। सुर, ताल, छंद और नृत्य को समर्पित यह देश का एक सम्मानीय मंच है। जहां अपनी कव्वाली प्रस्तुत कर वे स्वयं को गौरवान्वित महसूस करेंगे। उन्होंने बताया कि कव्वाली उन्हें पूर्वजों से विरासत में मिली है। उनके परिवार ने करीब 8 सौ साल से इस विधा को अपनी जीवनसाथी बनाया है। ऐसे परिवार से जुडे होनें के कारण क्लासिकल गानों से भी उनका संबंध रहा है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में कव्वाली भी बदल रही है और फ्यूजन के साथ मिलकर नये स्वरूप व नये क्लेवर में लोगों तक पहुंच रही है। एक तरह से कहा जाए तो अब कव्वाली का दौर रिपीट हो रहा है और पापुलर भी हो रहा है। श्री शाबरी ने कहा कि आम तौर पर कव्वाली को मुकाबले से जोड़कर देखा जाता है। जबकि मुकाबले से कव्वाली का कोई ताल्लुक नही है। यह रूहानियत से ताल्लुक रखती है और रूहानियत अल्लाह से मिलवाती है। अनीश शाबरी ने यह भी कहा कि यह बात भी सही है कि कव्वाली में फ्यूजन का मिश्रण होनें से कव्वाली की मूल आत्मा को ठेस पहुंचती है शायद यही वजह है कि कव्वाली के पुराने फनकार इस नये दौर के कव्वाली को सुनकर बेचैन है वे भी बेचैनी महसूस करतें है। मगर आज के दौर में कव्वाली को आम लोगों तक पहुंचाने और एक-एक इंसान के जेहन में पापुलर बनाकर उतारने के लिए यह एक जरूरी मिश्रण बन जाता है।

अनीश का यह भी कहना था कि छत्तीसगढ़ का सुबा बहुत ही प्यारा है उन्हें खुशी होती है कि यहां सभी संप्रदाय के लोग एक दूसरे से घूल मिलकर और भाईचारे से रहतें है। कोई भी उन्हें संप्रदाय या ईबादत के नाम पर भडका नही सकता । यही वजह है कि इस प्रांत में सुख-शांति और समृद्धि रची बसी है वे अल्लाह से ये विनती करतें है कि एकता और भाईचारे की यह मिशाल पूरे देश को रौशन करे और हमारे भारत के साथ-साथ भारत के बाहर भी लोग छत्तीसगढ़ की समृद्धिशाली संस्कृति को पहचान सकें।


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