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समर्थन मूल्य पर करीब नब्बे हजार टन जिन्सों की खरीद

राजस्थान में समर्थन मूल्य पर किसानों की लगभग नब्बे हजार टन उपज की खरीद की जा चुकी हैं वहीं तीन लाख से अधिक किसानों को 1068 करोड़ का फसली ऋण वितरित किया जा चुका हैं।

समर्थन मूल्य पर करीब नब्बे हजार टन जिन्सों की खरीद
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जयपुर। राजस्थान में समर्थन मूल्य पर किसानों की लगभग नब्बे हजार टन उपज की खरीद की जा चुकी हैं वहीं तीन लाख से अधिक किसानों को 1068 करोड़ का फसली ऋण वितरित किया जा चुका हैं।

सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव नरेश पाल गंगवार ने किसानों से उपज खरीद के संबंध में आयोजित वीडियों कान्फ्रेंसिग के माध्यम से व्यवस्थापकों, उप रजिस्ट्रार, अतिरिक्त रजिस्ट्रार खण्डीय एवं राजफैड के क्षेत्रीय अधिकारियों को संबोधित करते हुए आज यह जानकारी दी। श्री गंगवार ने बताया कि 28 हजार 292 किसानों से समर्थन मूल्य पर 89 हजार 464 टन जिन्स की खरीद हो चुकी है और 118 करोड़ रूपये का भुगतान किसानों को कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि खरीद में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाशत नही की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जीएसएस एवं केवीएसएस गौण मंडी में उपभोक्ता भण्डारों को भी लाईसेंस देकर किसानों से सीधी खरीद के लिए अधिकृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करने वाली जीएसएस एवं केवीएसएस गौण मंडियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने समर्थन मूल्य पर सभी केन्द्रों को सक्रिय करने के निर्देश भी दिये। उन्होंने कहा कि बारिश से पूर्व खरीद हो जाए यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि गौण मंडी बनी जीएसएस एवं केवीएसएस तथा समर्थन मूल्य पर स्थापित खरीद केन्द्रों में जो अक्रियाशील है, उन्हें एक सप्ताह के भीतर सक्रिय कर किसानों से खरीद सुनिश्चित करें।

उन्होंने कहा कि कुछ सप्ताह बाद खरीद केन्द्रों पर तुलाई क्षमता को तिगुना किया जएगा। जिसमें प्रतिदिन अधिकतम 180 किसानों से खरीद संभव हो सकेगी। उन्होंने कहा कि प्रारंभ में यह क्षमता 60 थी जिसे सात मई को बढ़ाकर 120 तक कर दिया है। उन्होंने कहा कि केद्रीय सहकारी बैंकों द्वारा अल्पकालीन फसली ऋण वितरण की प्रक्रिया संतोषजनक है और अब तक 3 लाख 21 हजार से अधिक किसानों को एक हजार 68 करोड़ रूपये का फसली ऋण वितरित हो चुका है।

श्री गंगवार ने कहा कि अक्रियाशील जीएसएस, केवीएसएस गौण मंडियों, समर्थन मूल्य पर खरीद केन्द्रों एवं फसली ऋण वितरण में कम परिणाम देने वाले आठ जिलों के संबंधित अधिकारियों को कारण बताओं नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही सात दिन में प्रगति नही होने पर 17 सीसी जैसी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यालय पर नही रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ निलबंन की कार्यवाही की जाएगी।


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