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Punjab Politics : डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस छोड़ी, करीब दो महीने पहले पार्टी ने किया था सस्पेंड
डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री बनने के लिए भारी-भरकम रकम देनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस उनके पति और पूर्व प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करती है, तभी वे सक्रिय राजनीति में वापसी करेंगी।

चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब पूर्व मंत्री डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने कांग्रेस से निलंबन के बाद पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी। इससे पहले पंजाब प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पार्टी के खिलाफ विवादित बयानबाजी को लेकर डॉक्टर सिद्धू को 8 दिसंबर 2025 को सस्पेंड किया था। उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा कर पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए और अलग राह चुनने का संकेत दे दिया। डॉ. सिद्धू पर यह कार्रवाई उनके उस विवादित बयान के बाद की गई, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री का पद पाने के लिए “500 करोड़ रुपये का सूटकेस” देना पड़ता है। उनके इस बयान से पंजाब कांग्रेस में हलचल मच गई थी और विपक्षी दलों को भी पार्टी पर हमला करने का अवसर मिल गया था।
‘500 करोड़ का सूटकेस’ बयान बना विवाद की जड़
डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री बनने के लिए भारी-भरकम रकम देनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस उनके पति और पूर्व प्रदेश प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करती है, तभी वे सक्रिय राजनीति में वापसी करेंगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था, “हमारे पास 500 करोड़ रुपये देने के लिए नहीं हैं।” इस बयान को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सीधा हमला माना गया। कांग्रेस ने इस टिप्पणी को अनुशासनहीनता और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला करार दिया। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने तत्काल प्रभाव से उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित करने का फैसला किया।
भाजपा में जाने के कयास दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी के पंजाब दौरे से ठीक पहले डॉ. सिद्धू के पार्टी छोड़ने को लेकर उनके भाजपा में जाने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। जिला कांग्रेस शहरी के प्रधान सौरव मदन बिट्टू के मुताबिक उन्होंने 3 महीने पहले ही कहा था कि सिद्धू दंपती भाजपा के एजेंट हैं और जल्द ही उनको भाजपा में जाना है।
निलंबन के बाद पार्टी पर तीखा हमला
निलंबन के तुरंत बाद डॉ. सिद्धू ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कांग्रेस प्रदेश प्रधान राजा वड़िंग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने वड़िंग को “भ्रष्ट प्रधान” बताते हुए आरोप लगाया कि वे जेल जाने से बचने के लिए मुख्यमंत्री के साथ हाथ मिला चुके हैं और कांग्रेस को कमजोर करने में लगे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि उन 12 वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जिन्होंने कथित तौर पर उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू को नुकसान पहुंचाने के लिए विरोधी खेमे का साथ दिया। न्होंने भारत भूषण आशु, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, राजिंदर कौर भट्ठल और डॉ. गांधी जैसे नेताओं का नाम लेते हुए पूछा कि जब उन्होंने खुलकर चुनौती दी थी, तो उनके खिलाफ कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया। डॉ. सिद्धू ने आरोप लगाया कि प्रदेश नेतृत्व का मकसद पार्टी को मजबूत करना नहीं, बल्कि उसे बर्बाद करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेतृत्व को शर्म आनी चाहिए।
विपक्ष को मिला हमला करने का मौका
डॉ. सिद्धू के बयान और उसके बाद हुई कार्रवाई ने पंजाब की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बयान पार्टी के अंदरूनी हालात और कथित भ्रष्टाचार को उजागर करता है। भाजपा और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या सचमुच पार्टी में पदों के लिए धनबल का इस्तेमाल होता है। हालांकि कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे व्यक्तिगत बयान करार दिया है।
नवजोत सिंह सिद्धू की भूमिका पर भी नजर
डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के बयान और पार्टी छोड़ने के फैसले के बाद यह भी चर्चा तेज हो गई है कि उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू की आगे की रणनीति क्या होगी। नवजोत सिंह सिद्धू पहले ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए जा चुके हैं और पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। डॉ. सिद्धू ने साफ किया था कि यदि उनके पति को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया जाता है, तभी वे राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगी। इस बयान ने यह संकेत दिया कि परिवार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अब भी कायम हैं।
नया राजनीतिक विकल्प
डॉ. नवजोत कौर सिद्धू के पार्टी छोड़ने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे किस राजनीतिक मंच का रुख करती हैं या कोई नया राजनीतिक विकल्प तलाशती हैं। फिलहाल उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा हमला कर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। पंजाब की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और नए समीकरण पैदा कर सकता है। कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का समय है, जबकि विपक्ष इस मौके को भुनाने की कोशिश में जुटा हुआ है।
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