राजा वड़िंग बने रहेंगे पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष, चन्नी को सौंपी कैंपेन कमेटी की कमान
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों में अहम भूमिका देते हुए कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चन्नी की प्रभावशाली वक्तृत्व क्षमता और दलित समाज में उनकी मजबूत पकड़ चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।

चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में पिछले कई सप्ताह से चल रही नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। कांग्रेस हाईकमान ने संगठन में व्यापक बदलाव की चर्चाओं के बीच मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें उनके पदों पर बनाए रखने का फैसला किया है। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने नेतृत्व में स्थिरता बनाए रखने के साथ-साथ वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां देकर संगठन को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।
चन्नी को मिली चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों में अहम भूमिका देते हुए कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चन्नी की प्रभावशाली वक्तृत्व क्षमता और दलित समाज में उनकी मजबूत पकड़ चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के लिए लाभदायक साबित हो सकती है। उनके नेतृत्व में चुनाव अभियान को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने की योजना तैयार की गई है।
तीन वरिष्ठ नेताओं को बनाया गया सह-अध्यक्ष
कांग्रेस ने चुनाव अभियान समिति को और मजबूत बनाने के लिए तीन वरिष्ठ नेताओं को इसका को-चेयरमैन नियुक्त किया है। इनमें सुखपाल सिंह खैहरा, राणा गुरजीत सिंह और डॉ. धर्मवीर गांधी शामिल हैं। इन नेताओं का अनुभव और क्षेत्रीय प्रभाव चुनावी रणनीति को धार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
तीन कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भी नियुक्त
संगठन में बेहतर समन्वय और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से कांग्रेस ने सुखविंदर सिंह डैनी, राज कुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियां को प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।
केसी वेणुगोपाल ने जारी की नियुक्तियों की सूची
इन सभी नियुक्तियों की आधिकारिक घोषणा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने की। जारी सूची से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में किसी बड़े नेतृत्व परिवर्तन के बजाय सामूहिक नेतृत्व की नीति पर आगे बढ़ना चाहता है। पार्टी ने लगभग सभी प्रमुख नेताओं को किसी न किसी जिम्मेदारी के साथ जोड़कर गुटबाजी की संभावनाओं को कम करने का प्रयास किया है।
कई दिनों से चल रही थीं नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं
पिछले महीने से पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही थीं। दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों के बाद यह माना जा रहा था कि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के पद पर नया चेहरा ला सकती है। चर्चाओं में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजय इंदर सिंगला के नाम प्रमुखता से सामने आए थे। हालांकि अंतिम फैसला मौजूदा नेतृत्व के पक्ष में गया और पार्टी ने चुनाव से पहले स्थिरता को प्राथमिकता दी।
भाजपा के फैसले के बाद बदली राजनीतिक रणनीति
राजनीतिक जानकारों के अनुसार पंजाब भाजपा द्वारा केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार किया। माना जा रहा है कि भाजपा के इस कदम के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का आकलन करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बदलने का जोखिम नहीं उठाया। इसी कारण राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया गया।
बाजवा के प्रदर्शन को भी मिला इनाम
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा को भी उनके सक्रिय प्रदर्शन का लाभ मिला। बाजवा ने विभिन्न जनहित के मुद्दों को सदन में प्रभावी ढंग से उठाया और राज्य सरकार को लगातार घेरने का प्रयास किया। पार्टी नेतृत्व ने उनके इस प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष के पद पर बनाए रखने का निर्णय लिया।
चुनाव से पहले एकजुटता पर कांग्रेस का जोर
अगले वर्ष प्रस्तावित पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस फिलहाल किसी भी प्रकार के आंतरिक विवाद या नेतृत्व संघर्ष से बचना चाहती है। यही कारण है कि संगठन में संतुलन बनाते हुए लगभग सभी प्रमुख नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पार्टी का उद्देश्य स्पष्ट है कि चुनावी मुकाबले से पहले संगठन पूरी तरह एकजुट रहे और सभी वरिष्ठ नेता साझा रणनीति के तहत चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाएं।


