पंजाब कांग्रेस में घमासान, चन्नी गुट ने राजा वड़िंग को हटाने की मांग की; हाईकमान के फैसले पर टकराव
पिछले पांच दिनों से पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की बैठकों से दूरी बनाए हुए चन्नी गुट ने छठे दिन अपनी बात सामने रखी। कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने की संभावनाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गुट ने इसका कड़ा विरोध किया है। शनिवार को पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल के साथ हुई बैठक में चन्नी समर्थक नेताओं ने साफ कहा कि पार्टी को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो कार्यकर्ताओं और पंजाब की राजनीतिक भावना का प्रतिनिधित्व कर सके। चन्नी गुट ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि उन्हें "समझौतावादी नेतृत्व" स्वीकार नहीं है। हालांकि, भूपेश बघेल ने स्पष्ट कर दिया कि संगठन को लेकर हाईकमान का फैसला अंतिम होगा और उसमें बदलाव की संभावना नहीं है।
चन्नी गुट ने बैठक में रखीं अपनी आपत्तियां
पिछले पांच दिनों से पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की बैठकों से दूरी बनाए हुए चन्नी गुट ने छठे दिन अपनी बात सामने रखी। कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। बैठक में चन्नी ने चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की इच्छा भी जताई। उन्होंने कहा कि वह पूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार करेंगे। चन्नी समर्थक नेताओं का कहना था कि आगामी चुनाव को देखते हुए संगठन में ऐसा बदलाव जरूरी है, जिससे कार्यकर्ताओं का भरोसा मजबूत हो और पार्टी जमीनी स्तर पर सक्रिय हो सके।
तीन सांसदों और नौ विधायकों ने उठाई नेतृत्व बदलाव की मांग
राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई बैठक में तीन सांसद, नौ विधायक और कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सभी ने कथित तौर पर राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का विरोध किया। गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि कांग्रेस को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो पार्टी कार्यकर्ताओं और पंजाब की जनता की भावनाओं को समझे। उन्होंने कहा कि पार्टी में समय-समय पर फैसलों की समीक्षा करनी पड़ती है और जरूरत पड़ने पर बदलाव भी किए जाते हैं। बैठक में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, विधायक परगट सिंह, राणा गुरजीत सिंह, पूर्व मंत्री गुरकीरत सिंह कोटली, ओपी सोनी, पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक, विधायक अरुणा चौधरी और वरिंदरमीत सिंह पाहड़ा सहित कई नेता मौजूद रहे।
बघेल का मिशन था दोनों गुटों में सुलह कराना
भूपेश बघेल के पंजाब दौरे का मुख्य उद्देश्य विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के अंदर चल रहे मतभेदों को खत्म करना और राजा वड़िंग तथा चन्नी गुट को एक मंच पर लाना था। हालांकि, चन्नी गुट की शर्त के कारण राजा वड़िंग बैठक में शामिल नहीं हुए। बैठक के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं ने अपनी भावनाएं और सुझाव रखे हैं, जिन्हें कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री पद के लिए कई चेहरे हैं और चुनाव से जुड़े फैसले पार्टी नेतृत्व उचित समय पर करेगा।
हाईकमान को विचार करना चाहिए: बाजवा
नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को पंजाब के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संगठन से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। चन्नी गुट का मानना है कि आगामी चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में लाने के लिए संगठन में बदलाव जरूरी है। वहीं, वड़िंग समर्थक नेताओं का कहना है कि बार-बार नेतृत्व परिवर्तन से पार्टी की चुनावी तैयारियों पर असर पड़ सकता है।
राजा वड़िंग ने भी दिया जवाब
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग ने भी पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सभी नेताओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। वड़िंग ने कहा कि पार्टी में न तो कोई "स्लीपर सेल" होना चाहिए और न ही समझौतावादी नेता। उन्होंने कहा कि सभी नेता जल्द ही एक मंच पर दिखाई देंगे। उन्होंने कहा कि सुखजिंदर सिंह रंधावा और वह साढ़े चार साल तक साथ काम कर चुके हैं। यदि वह समझौतावादी होते तो रंधावा उनके साथ नहीं रहते। वड़िंग ने यह भी कहा कि जो लोग भाजपा नेताओं से संपर्क रखते हैं, उनके लिए कांग्रेस में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
आगामी चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए चुनौती
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में बढ़ता यह विवाद पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ चन्नी गुट संगठन में बदलाव की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर हाईकमान अपने फैसले पर कायम रहने का संकेत दे चुका है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व दोनों गुटों के बीच संतुलन कैसे बनाता है और चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता किस तरह कायम रखता है।


