Punjab : नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति का विरोध, CM भगवंत मान ने बुलाई इमरजेंसी बैठक
हरपाल चीमा ने कहा कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) के पैरा-6 में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति से पहले संबंधित राज्य सरकार का दृष्टिकोण और सहमति लेने की प्रक्रिया का उल्लेख है। उनके मुताबिक, इस मामले में पंजाब सरकार से इस प्रक्रिया के तहत विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था।

जालंधर: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस के तौर पर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने आपत्ति जताई है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने रविवार को जालंधर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि नियुक्ति की प्रक्रिया में राज्य सरकार की राय और सहमति लेने से जुड़े निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस नियुक्ति से सहमत नहीं है और मामले में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पैरा-6 का हवाला देकर उठाए सवाल
हरपाल चीमा ने कहा कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) के पैरा-6 में हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति से पहले संबंधित राज्य सरकार का दृष्टिकोण और सहमति लेने की प्रक्रिया का उल्लेख है। उनके मुताबिक, इस मामले में पंजाब सरकार से इस प्रक्रिया के तहत विचार-विमर्श किया जाना चाहिए था। चीमा ने दावा किया कि पंजाब के राज्यपाल की ओर से मुख्यमंत्री भगवंत मान को 12 अगस्त 2026 को एक पत्र भेजा गया था। इसमें भी नियुक्ति से संबंधित पैरा-6 का उल्लेख किया गया था। वहीं केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की ओर से भेजे गए पत्र में भी इसी प्रक्रिया का जिक्र होने की बात उन्होंने कही।
भगवंत मान ने बुलाई कैबिनेट की आपात बैठक
विवाद के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार शाम 4 बजे कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। बैठक में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति की प्रक्रिया पर चर्चा किए जाने और सरकार के अगले कदम को लेकर फैसला होने की संभावना है। हरपाल चीमा ने कहा कि मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध पंजाब और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से है। उन्होंने इसे बेहद संवेदनशील मुद्दा बताते हुए कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी।
जीएस संधावालिया के मामले का भी जिक्र
वित्त मंत्री ने अपने बयान में जस्टिस जीएस संधावालिया की नियुक्ति का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से उनकी नियुक्ति को दो महीने से अधिक समय तक लंबित रखा गया था। इसके बाद कॉलेजियम ने 17 सितंबर 2024 को उन्हें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया। चीमा ने सवाल उठाया कि उस समय नियुक्ति में देरी क्यों हुई, इसका कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर संधावालिया की नियुक्ति में लंबा समय लिया गया, जबकि दूसरी ओर जस्टिस मिश्रा के मामले में पंजाब सरकार के पास विचार-विमर्श के लिए कम समय होने के बावजूद नियुक्ति कर दी गई।
‘सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं, पंजाबियों का अपमान’
हरपाल चीमा ने केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सिर्फ मुख्यमंत्री भगवंत मान का मामला नहीं है। उनके मुताबिक, राज्य सरकार की राय की अनदेखी को पंजाब के लोगों के साथ अन्याय के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब की करीब तीन करोड़ आबादी और उसके निर्वाचित मुख्यमंत्री की संवैधानिक भूमिका का सम्मान किया जाना चाहिए। चीमा ने आरोप लगाया कि केंद्र ने मानक प्रक्रिया को नजरअंदाज किया है और इस पर चर्चा जरूरी है।
नियुक्ति को लेकर बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के विरोध के बाद पंजाब सरकार और केंद्र के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं। आम आदमी पार्टी सरकार अब कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी। वहीं, पूरे विवाद का केंद्र नियुक्ति की प्रक्रिया और राज्य सरकार से अपेक्षित परामर्श को लेकर उठाए गए सवाल हैं। पंजाब सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से लागू किया जाना चाहिए था, जबकि अब सरकार आगे के कदम पर फैसला लेने की तैयारी में है।


