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पंजाब वेयरहाउस मैनेजर की मौत के बाद सियासी भूचाल, मंत्री लालजीत भुल्लर का इस्तीफा

इस घटना ने तब बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब रंधावा द्वारा मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में उन्होंने राज्य के परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर का नाम लिया है। वीडियो के सार्वजनिक होते ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भुल्लर से इस्तीफा ले लिया।

पंजाब वेयरहाउस मैनेजर की मौत के बाद सियासी भूचाल, मंत्री लालजीत भुल्लर का इस्तीफा
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चंडीगढ़। Minister Laljit Bhullar Resigns: पंजाब में एक सरकारी अधिकारी की मौत के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। अमृतसर स्थित पंजाब वेयरहाउस के मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार देर रात जहरीला पदार्थ (सल्फास) निगल लिया। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां शनिवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

इस घटना ने तब बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया, जब रंधावा द्वारा मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में उन्होंने राज्य के परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर का नाम लिया है। गगनदीप सिंह रंधावा ने 12 सेकेंड का वीडियो जारी किया। इसमें रंधावा ने कहा- खा ली सल्फास, मिनिस्टर लालजीत भुल्लर के डर से, अब मैं नहीं बचता। वीडियो के सार्वजनिक होते ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भुल्लर से इस्तीफा ले लिया।

सीएम का एक्शन: ‘जांच प्रभावित नहीं होने देंगे’

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि सरकार निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “कैबिनेट मंत्री का इस्तीफा ले लिया गया है। हम जांच को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होने देंगे। हम अधिकारियों को परेशान करने के लिए सत्ता में नहीं आए हैं।” सीएम ने यह भी बताया कि परिवहन विभाग जल्द ही किसी अन्य मंत्री को सौंपा जाएगा, ताकि प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो।

वहीं, मंत्री लालजीत भुल्लर ने कहा कि आरोप झूठे हैं। जांच प्रभावित न हो, इसलिए मैंने पद छोड़ा है। इस्तीफा CM को भेज दिया है। मेरी पार्टी हमेशा सच का साथ देती है।

वीडियो से बढ़ा विवाद

मृतक गगनदीप रंधावा द्वारा बनाए गए वीडियो ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, वीडियो की सत्यता और उसमें लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन इसके सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है।

विपक्ष का हमला तेज

घटना के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला अस्पताल पहुंचे और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप बेहद गंभीर हैं और सच्चाई सामने आनी चाहिए। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने इस मामले में और सख्त रुख अपनाते हुए मंत्री भुल्लर के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने और उनकी गिरफ्तारी की मांग की। खैरा ने आरोप लगाया कि मंत्री और उनके सहयोगियों द्वारा रंधावा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं होती, तो यह संकेत होगा कि पुलिस का इस्तेमाल केवल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ किया जा रहा है।

अकाली दल ने भी घेरा सरकार को

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मामले की पारदर्शी जांच की मांग की।

बिक्रम मजीठिया ने कहा- फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने वेयरहाउस बनाया था। वेयरहाउस कॉर्पोरेशन इसकी नोडल एजेंसी थी। मंत्री लालजीत भुल्लर ने अपने पिता के नाम पर टेंडर अप्लाई किया था। जब पॉलिसी के हिसाब से मंत्री के पिता को टेंडर नहीं मिला तो घर बुलाकर अफसर से मारपीट की। उसकी वीडियो बनाई। पत्नी-बच्चों को लेकर धमकी दी। वहीं, मृतक रंधावा के परिवार ने भुल्लर पर मरने को मजबूर करने का केस दर्ज करने की मांग की, तब तक अस्पताल से शव न ले जाने देने का ऐलान कर दिया है।



जांच में जुटी पुलिस और प्रशासन

फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग इस पूरे मामले की जांच में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी, जिसमें वीडियो की सत्यता, कथित आरोप और घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला शामिल होगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि रंधावा ने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया और क्या वास्तव में उन पर किसी प्रकार का दबाव या प्रताड़ना थी।

प्रशासनिक और राजनीतिक असर

इस घटना ने न केवल प्रशासनिक तंत्र बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। एक ओर जहां सरकार पर पारदर्शिता और जवाबदेही का दबाव बढ़ गया है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सरकार की साख के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।


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