Punjab: ED का दावा, सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया गमाडा अधिकारियों के साथ करते थे अनाधिकृत बैठकें
ED की टीम के लौटने से पहले गुरुवार सुबह से ही AAP कार्यकर्ता गमाडा मुख्यालय के बाहर जुटने लगे थे। प्रदर्शनकारियों ने एजेंसी की कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मुख्य गेट के बाहर बैरिकेडिंग की थी।

मोहाली: मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) के मुख्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की करीब 50 घंटे चली कार्रवाई गुरुवार को समाप्त हो गई। कार्रवाई खत्म होने के बाद ED ने प्रेस नोट जारी कर जांच से जुड़े कई दावे किए। एजेंसी ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया गमाडा अधिकारियों के साथ मास्टर प्लान और नीलामी से संबंधित अनधिकृत बैठकों में नियमित रूप से शामिल होते थे। दूसरी ओर, AAP ने ED के आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
ED ने अधिकारियों की बैठकों को लेकर क्या कहा?
ED के मुताबिक, जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ गमाडा अधिकारी मास्टर योजनाओं और नीलामी से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों को लेकर कुछ नेताओं के साथ बैठकें करते थे। एजेंसी का दावा है कि संबंधित अधिकारी जरूरी फाइलों को अपने कार्यालय से बाहर ले जाते थे। ED की कार्रवाई का संबंध तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स और उससे जुड़ी कंपनियों से भी बताया गया है। जांच एजेंसी को कथित तौर पर गमाडा की दो प्रमुख नीलामी साइटों से जुड़े मामलों में इन कंपनियों को 100 करोड़ रुपये से अधिक का कथित लाभ पहुंचाए जाने की आशंका है। इन दावों की जांच प्रक्रिया के तहत पड़ताल की जा रही है।
AAP ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
ED के दावों पर AAP ने पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि केंद्रीय जांच एजेंसी के आरोपों में कोई आधार नहीं है और कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से की जा रही है। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि 50 घंटे से अधिक चली कार्रवाई के बावजूद ED को कुछ नहीं मिला। AAP विधायक अमनशेर सिंह शेरी कलसी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ED की सक्रियता बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। ये आरोप AAP की ओर से लगाए गए हैं; इन पर ED का पक्ष संबंधित दावों के संदर्भ में अलग है।
ED की कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे AAP कार्यकर्ता
ED की टीम के लौटने से पहले गुरुवार सुबह से ही AAP कार्यकर्ता गमाडा मुख्यालय के बाहर जुटने लगे थे। प्रदर्शनकारियों ने एजेंसी की कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मुख्य गेट के बाहर बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड हटाकर मुख्य गेट तक पहुंचने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। बाद में भीड़ के परिसर के भीतर पहुंचने की भी जानकारी सामने आई।
वाहनों में तोड़फोड़ और पत्थरबाजी का आरोप
प्रदर्शन के दौरान कुछ ED वाहनों को नुकसान पहुंचाए जाने का आरोप है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ वाहनों के शीशे तोड़े गए और उनके टायरों की हवा निकाल दी गई। गमाडा भवन की ओर भी पत्थर फेंके जाने की बात सामने आई, जिससे कार्यालय के कुछ शीशे टूट गए। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी DSP हरसिमरन सिंह बल्ल के पास थी। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात संभालने की कोशिश की। बाद में SSP वरुण शर्मा भी गमाडा कार्यालय पहुंचे। करीब दो बजे ED के अधिकारी कार्रवाई पूरी कर कार्यालय से बाहर निकले। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की मौजूदगी बनी रही।
हाई कोर्ट में भी हुई सुनवाई
इस बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में भी गमाडा मुख्यालय में ED की कार्रवाई का मामला पहुंचा। पंजाब सरकार की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को अदालत ने वापस लेने की अनुमति दे दी। जस्टिस संजय वशिष्ठ की पीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं। सरकार के अनुसार, तलाशी की कार्रवाई पूरी हो चुकी है और जिन अधिकारियों को कथित तौर पर हिरासत में रखे जाने की बात कही गई थी, उन्हें भी मुक्त कर दिया गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
जांच और राजनीतिक आरोपों के बीच मामला
गमाडा से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब ED की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगी। एक ओर एजेंसी ने अपनी जांच के आधार पर अधिकारियों और कुछ राजनीतिक नेताओं की भूमिका को लेकर दावे किए हैं, वहीं AAP इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। फिलहाल मामले में जांच एजेंसी के दावों और राजनीतिक दल के आरोपों के बीच स्पष्ट अंतर बना हुआ है।


