Punjab: LPU बवाल में वायरल वीडियो से लेकर नकाबपोशों की तलाश तक, पुलिस जांच में सामने आए कई सवाल
एलपीयू हिंसा को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर मामले में भूमिका होने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की कथित साजिश से जोड़ते हुए कई आरोप लगाए।

फगवाड़ा/चंडीगढ़: पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में शनिवार रात शुरू हुआ बवाल अब पुलिस जांच के केंद्र में है। शुरुआती जांच में पुलिस को एक ऐसे वीडियो के बारे में जानकारी मिली है, जो कथित तौर पर घटना से चार-पांच दिन पहले सोशल मीडिया के जरिए यूनिवर्सिटी के एक छात्रावास तक पहुंचा था। इसके बाद यह वीडियो रेडिट के माध्यम से कैंपस में प्रसारित हुआ। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो सबसे पहले किसने प्रसारित किया और शनिवार रात अचानक छात्रों के बड़े पैमाने पर सड़क पर उतरने की वजह क्या बनी।
वीडियो में दुष्कर्म और आत्महत्या का दावा
जांच के मुताबिक, वायरल वीडियो में एक छात्रा के साथ हॉस्टल में दुष्कर्म और इसके दो दिन बाद उसके आत्महत्या करने का दावा किया गया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस साइबर सेल वीडियो को प्रसारित करने वाले अकाउंट और उसके आईपी एड्रेस की जांच कर रहा है। यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने भी पुलिस को बताया है कि वीडियो छात्राओं के हॉस्टल से ही प्रसारित हुआ था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वीडियो किसने बनाया या आगे भेजा और इसके पीछे कोई सुनियोजित उद्देश्य था या नहीं।
आठ नकाबपोशों की तलाश
पुलिस को यह भी संदेह है कि प्रदर्शनकारी छात्रों की भीड़ में कुछ बाहरी या असामाजिक तत्व शामिल हुए थे। जांच में सामने आया है कि कुछ लोग चेहरे पर काला कपड़ा बांधे और हाथों में लोहे की रॉड लिए भीड़ में शामिल हुए। आरोप है कि उन्होंने छात्रों को उकसाया, जिसके बाद स्थिति और बिगड़ गई। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ऐसे आठ नकाबपोश लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट से छात्रों के बाहर निकलने के बाद हालात अचानक क्यों बिगड़े।
गेट खुलने के बाद बढ़ा तनाव
बताया गया है कि शुरुआती प्रदर्शन के दौरान छात्र कैंपस के अंदर ही थे और स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रण में थी। बाद में कुछ छात्रों ने मुख्य गेट खोल दिया और बड़ी संख्या में विद्यार्थी बाहर निकलने लगे। पुलिस को आशंका है कि इसी दौरान कुछ बाहरी लोग भी भीड़ के साथ परिसर में दाखिल हुए। इसके बाद तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। सोमवार को एलपीयू के आसपास इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं।
DGP ने कहा- दोषियों को नहीं बख्शेंगे
मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने यूनिवर्सिटी का दौरा किया। उन्होंने कहा कि मामले में जो भी आरोपी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने भी कहा कि यदि जांच में किसी साजिश की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। हिंसा के बाद यूनिवर्सिटी ने 10 दिन की छुट्टी की घोषणा की है। हॉस्टल में रह रहे कुछ विद्यार्थी अब अपने घरों की ओर लौट रहे हैं।
महिला आयोग ने मांगी रिपोर्ट
पंजाब राज्य महिला आयोग ने पटियाला की चितकारा यूनिवर्सिटी और एलपीयू में हुई घटनाओं का स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने पटियाला और कपूरथला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों से दोनों मामलों में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों को 30 सितंबर तक रिपोर्ट देने को कहा गया है।
राजनीतिक आरोपों से गरमाया मामला
एलपीयू हिंसा को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर मामले में भूमिका होने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की कथित साजिश से जोड़ते हुए कई आरोप लगाए। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी एलपीयू में हुए उपद्रव को आप की कथित साजिश बताया। उन्होंने यूनिवर्सिटी के चांसलर और राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल के आप छोड़कर भाजपा में जाने का संदर्भ देते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से यह घटनाक्रम कराया गया। आप के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने में सूझबूझ दिखाई। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की मांग की है।


