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पंजाब पुलिस की 'युवा सांझ' पहल से 1,200 युवाओं की काउंसलिंग सफल: गुरप्रीत देव

पंजाब पुलिस की विशेष डीजीपी गुरप्रीत देव ने बताया कि राज्य में शुरू किया गया 'युवा सांझ' कार्यक्रम अब धीरे-धीरे एक प्रभावी सामाजिक सुधार मॉडल के रूप में उभर रहा है

पंजाब पुलिस की युवा सांझ पहल से 1,200 युवाओं की काउंसलिंग सफल: गुरप्रीत देव
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चंडीगढ़। पंजाब पुलिस की विशेष डीजीपी गुरप्रीत देव ने बताया कि राज्य में शुरू किया गया 'युवा सांझ' कार्यक्रम अब धीरे-धीरे एक प्रभावी सामाजिक सुधार मॉडल के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि इस पहल के तहत अब तक लगभग 1,500 ऐसे युवाओं तक पहुंच बनाई गई है, जो किसी न किसी कारण से गलत दिशा में जा रहे थे।

गुरप्रीत देव ने बताया कि यह कार्यक्रम वर्ष 2023 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को सही दिशा देना, उन्हें शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। उन्होंने कहा कि युवा किसी भी समाज का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन होते हैं, क्योंकि वही देश और राज्य के भविष्य का निर्माण करते हैं।

उन्होंने बताया कि पंजाब पुलिस का कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन इस पूरी पहल को संचालित कर रहा है, जो पहले से ही एक संस्थागत ढांचा है और राज्यभर में इसके 530 सांझ केंद्र काम कर रहे हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य आम जनता को पुलिस सेवाओं तक आसान पहुंच देना है, जैसे पुलिस वेरिफिकेशन, एफआईआर की कॉपी, डीडीआर की कॉपी या अन्य प्रशासनिक दस्तावेज प्राप्त करना।

गुरप्रीत देव के अनुसार, इन केंद्रों में नागरिकों को थाने या पुलिस अधिकारियों के पास सीधे जाने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वे सांझ केंद्रों के माध्यम से सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही एक ऑनलाइन पोर्टल भी उपलब्ध है, जिसके जरिए लोग घर बैठे भी कई सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि 'युवा सांझ' पहल को इन्हीं सांझ केंद्रों और उनकी समितियों के नेटवर्क के माध्यम से पुनर्गठित किया गया है। प्रत्येक केंद्र में एक समुदाय समिति होती है, जिसमें स्थानीय लोग शामिल होते हैं। इन समितियों को पुनः सक्रिय कर युवा सांझ समिति का रूप दिया गया है, ताकि युवाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंच बनाई जा सके।

उन्होंने कहा कि पुलिस अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही है। कई सामाजिक और आर्थिक समस्याओं में पुलिस एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेपकर्ता के रूप में काम कर सकती है। इसके लिए पुलिस जिला प्रशासन, रोजगार विभाग और कौशल विकास संस्थानों के साथ समन्वय भी कर रही है।

गुरप्रीत देव ने बताया कि 15 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के युवा सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इस उम्र में वे आसानी से सामाजिक, डिजिटल और बाहरी प्रभावों की ओर आकर्षित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार कमजोर पारिवारिक संरचना या सही मार्गदर्शन की कमी के कारण युवा गलत रास्तों पर चले जाते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि सोशल मीडिया का प्रभाव आज के युवाओं पर काफी गहरा है। कई युवा गलत कंटेंट, हिंसक सोच या कट्टरपंथी विचारधाराओं की ओर आकर्षित हो जाते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस सीधे हस्तक्षेप नहीं करती, बल्कि समुदाय और विशेषज्ञों की मदद से उन्हें समझाने और सुधारने का प्रयास करती है।

इस प्रक्रिया में मनोवैज्ञानिक और मनोरोग विशेषज्ञों की भी सहायता ली जाती है, ताकि युवाओं की मानसिक स्थिति को समझकर उन्हें सही दिशा दी जा सके। इसके बाद उन्हें काउंसलिंग के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश की जाती है।

गुरप्रीत देव ने बताया कि अब तक लगभग 1,500 मामलों पर काम किया गया है। इनमें से लगभग 1,200 युवाओं की काउंसलिंग सफलतापूर्वक की जा चुकी है। इनमें से कई युवाओं को नशे की समस्या से बाहर निकाला गया है, जबकि कुछ को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में युवाओं को नौकरी भी दिलाई गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल समझाइश पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजगार और कौशल विकास भी बेहद जरूरी है। यदि युवाओं के पास आजीविका का साधन नहीं होगा, तो वे फिर से गलत दिशा में जा सकते हैं। इसलिए पंजाब पुलिस कौशल विकास मिशन के साथ मिलकर युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का काम कर रही है।

गुरप्रीत देव ने बताया कि कुछ मामलों को स्किल डेवलपमेंट विभाग को भी भेजा गया है, ताकि युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा सके। लगभग 39 मामलों को पंजाब स्किल डेवलपमेंट मिशन को रेफर किया गया है और इस पर काम जारी है।


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