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नए मोटर वाहन अधिनियम के विरोध में प्रदर्शन

नए मोटर वाहन एक्ट 2019 के विरोध में भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (आरडब्ल्यूपीआई) ने आज यहां लघु सचिवालय रोहतक पर रोष प्रदर्शन किया

नए मोटर वाहन अधिनियम के विरोध में प्रदर्शन
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रोहतक। नए मोटर वाहन एक्ट 2019 के विरोध में भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (आरडब्ल्यूपीआई) ने आज यहां लघु सचिवालय रोहतक पर रोष प्रदर्शन किया।

आरडब्ल्यूपीआई के जिला रोहतक संयोजक इन्द्रजीत ने यहां जारी बयान में आरोप लगाया कि ‘मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019’ जनता की जेबों पर डाका डालने के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूँजीपति घरानों पर लाखों-करोडों लुटा रही मोदी सरकार खजाने की भरपाई जनता पर नित-नये कर और टैक्स लगाकर करना चाहती है और संशोधिति अधिनियम के तहत चालान काटना और भारी जुर्माने लगाना भी यही दिखाता है।

उन्होंने कहा कि कई मोटरसाइकिलों, ऑटो, ई-रिक्शा, ट्रक आदि पर ट्रैफिक पुलिस ने तीस-चालीस हजार से लेकर एक लाख से ऊपर तक के जुर्माने लगाये हैं और काफ़ी सारे वाहनों पर लगे जुर्माने तो उनकी कुल कीमत से भी ज़्यादा हैं। यह कानून एक तरह से लोगों की रोजी-रोटी पर हमले के समान है।

उन्होंने कहा कि सरकारी प्रचार के अनुसार यातायात के दौरान जनता की सुरक्षा और उसे नियमों का पालन करना सिखाने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है लेकिन गड्ढों से भरी सड़कों, ठेकेदारों के भ्रष्टाचार, यातायात के दौरान बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सरकार एकदम चुप्पी मार जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि टूटी सड़कों, अँधेरे और आवारा पशुओं के कारण हर साल लाखों लोग मौत के मुँह में समा जाते हैं।

प्रदर्शनकारियों ने एक पर्चा लोगों में बांटा जिसमें बढ़ायी गयी चालान राशि और जुर्मानों को तुरन्त प्रभाव से रद्द करने, टूटी सड़कों और पुलों की मरम्मत करवाने, रात को सड़कों पर पर्याप्त रोशनी का प्रबन्ध करवाने, दोषी ठेकेदारों, अधिकारियों और मंत्रियों को सजा दिलवाने, सड़कों से आवारा पशुओं को दूर रखने का समुचित प्रबन्ध करने, सार्वजनिक परिवहन सेवा में सुधार करके जनसंख्या के हिसाब से यात्री बसों और ट्रेनों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने व गैरज़रूरी निजी वाहनों पर रोक लगाये जाने, रेलवे और रोडवेज विभागों का ठेकाकरण-निजीकरण बन्द करके इनमें पड़े खाली पदों को तत्काल भरे जाने, सड़कों के निर्माण व रख-रखाव के काम का ठेकाकरण-निजीकरण बन्द करके यह पूरा काम सार्वजनिक क्षेत्र के तहत लाने आदि की मांगें शामिल थीं।


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