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अमेरिका के नए बिल से क्या भारत पर लगेगा 100% टैरिफ?

अमेरिकी संसद ने बीते शुक्रवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने को लेकर एक नया बिल पास किया है. इस बिल के तहत अब उन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जा सकता है जो रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं

अमेरिका के नए बिल से क्या भारत पर लगेगा 100% टैरिफ?
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अमेरिकी संसद ने बीते शुक्रवार को रूस पर प्रतिबंध लगाने को लेकर एक नया बिल पास किया है. इस बिल के तहत अब उन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जा सकता है जो रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं.

अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को पारित कर दिया. इस बिल से भारत की चिंताएं बढ़ सकती हैं. सीनेट ने रूसी ऊर्जा पर चीन, भारत और दूसरे देशों की निर्भरता कम करने के लिए ‘लिंडसे ओ. ग्राहम प्रतिबंध रूस और ईरान अधिनियम 2026' को मंजूरी दे दी है. साथ ही इस बिल में रूसी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने के प्रावधान को भी शामिल किया गया है. इस बिल के समर्थन में 86 वोट पड़े.

इस बिल के पीछे सीनेट ने सबसे बड़ी वजह यह बताई कि रूस से जो देश तेल खरीद रहे हैं, उससे रूसी अर्थव्यवस्था को मदद मिल रही है और वह यूक्रेन युद्ध को जारी रख पा रहा है. ग्राहम लिंडसे अमेरिकी राज्य दक्षिण कैरोलिना के एक रिपब्लिकन नेता थे, जिनका पिछले महीने निधन हो गया था. वह अमेरिकी संसद में यूक्रेन के सबसे मुखर सहयोगियों में से एक थे. इसलिए उनके नाम पर इस बिल को पास किया गया है जिसका उद्देश्य यूक्रेन के साथ जारी युद्ध को लेकर मास्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है. अपनी मौत से कुछ दिनों पहले उन्होंने एलान किया था कि उनके इस बिल को ट्रंप का पूरा समर्थन हासिल है.

इस नए बिल में ईरान पर बढ़ाए गए प्रतिबंध भी शामिल किए गए हैं. अगर यह बिल कानून में तब्दील हो जाता है तो इससे राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने की अनुमति मिल जाएगी जो रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदार हैं. इनमें भारत, जापान और यूरोपीय संघ के कुछ देश भी शामिल हैं. इस बिल का यूक्रेन ने स्वागत किया है. वॉशिंगटन में यूक्रेनी दूतावास ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया है जो रूस पर दबाव को मजबूत करता है.

बिल पर संशय बरकरार

बिल के समर्थकों के मुताबिक यह यूक्रेन को समर्थन देने का सबसे अच्छा मौका है. हालांकि, कुछ अमेरिकी सांसदों और उद्योगों को डर है कि ट्रंप के लिए नई टैरिफ शक्तियां अमेरिकी आयातकों और उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ा सकती हैं. इसके साथ ही कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

न्यूयॉर्क के प्रतिनिधि ग्रेगरी मीक्स और वर्जीनिया के डॉन बेयर ने एक बयान में कहा कि ट्रंप के लिए टैरिफ शक्तियों के बारे में उन्हें अभी भी चिंताएं हैं. हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट मीक्स, और जॉइंट इकोनॉमिक कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट बेयर ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की नई व्यापक शक्तियां देता है, राष्ट्रपति ट्रंप बेझिझक इन नई शक्तियों को हथियार बना सकते हैं, जैसा कि उन्होंने पहले भी कई बार किया है.

ट्रेड डील पर होगा असर?

चीन के बाद भारत रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. फरवरी में शुरू हुए ईरान युद्ध के बाद से भारत की निर्भरता रूसी तेल पर बढ़ी है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भारत सरकार के सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि भारत को नहीं लगता कि इस नए बिल का असर अमेरिका से चल रही व्यापार वार्ता पर होगा. सूत्र ने जानकारी दी कि इस ट्रेड डील में रूस से तेल खरीदने पर लगाए जाने वाले संभावित टैरिफ रुकावट नहीं बन सकते.

नए बिल में उन देशों को छूट मिलने की संभावना जताई गई है जो रूस से 15 फीसदी से कम ऊर्जा आयात करते हैं या वे देश जो धीरे धीरे रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं.


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