चुनाव आयोग के हलफनामे पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने लगाए भ्रामक दावे करने के आरोप
कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश का आरोप, आयोग ने फार्म-6 को लेकर झूठ बोला। उन्होंने कहा- यह हलफनामा खुद चुनाव आयोग के लिए बेहद नुकसानदेह है।

नई दिल्ली: मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे पर सवाल उठाते हुए उसे भ्रामक, छलपूर्ण और शब्दों की बाजीगरी से भरा बताया है। पार्टी का आरोप है कि आयोग एसआईआर प्रक्रिया में उठाए गए कानूनी सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय तथ्यों को अलग तरीके से पेश कर रहा है। कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने विशेष रूप से फार्म-6 में किए गए कथित बदलावों को लेकर आयोग की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि आयोग के अलग-अलग बयानों में विरोधाभास है और इससे उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
फार्म-6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना
जयराम रमेश ने मंगलवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने फार्म-6 के साथ नई घोषणा जोड़ने के मामले में नियमों का उल्लंघन किया है। उनके मुताबिक, आयोग पहले दावा कर चुका है कि फार्म-6 के साथ जोड़ी गई नई घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था, लेकिन बाद में अदालत ने इस दावे को खारिज कर दिया। कांग्रेस नेता ने आयोग के दूसरे दावे पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि अब आयोग यह कह रहा है कि नई घोषणा अलग फार्म है और फार्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया। हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि इस घोषणा को भरे बिना ऑनलाइन फार्म-6 जमा करना संभव नहीं है। ऐसे में इसे फार्म-6 से अलग बताना वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश है। जयराम रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग 26 सितंबर, 2026 को इस घोषणा को फार्म-6 के साथ जोड़े जाने की बात कह रहा था, जबकि अब इसे फार्म-6 का हिस्सा मानने से इनकार कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अपने बदलते रुख के जरिए रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के कथित उल्लंघन पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहा है।
हलफनामे को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने चुनाव आयोग के हलफनामे को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। जयराम रमेश के अनुसार, आयोग का जवाब एसआईआर प्रक्रिया से संबंधित विवादों को स्पष्ट करने के बजाय उन्हें दूसरी दिशा में ले जाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि हलफनामे में तथ्यों को इस तरह प्रस्तुत किया गया है, जिससे आयोग के फैसलों पर उठ रहे सवालों से ध्यान हट सके। जयराम रमेश ने अपने बयान में कहा कि जब कोई संस्था धोखा देने की कोशिश करती है, तो वह खुद ही उलझनों का जाल बुन लेती है और समय के साथ उसकी सच्चाई सामने आ जाती है। कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मामले में कानूनी स्तर पर भी अपना पक्ष रखेगी। हालांकि, फार्म-6 और एसआईआर से जुड़े आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों और आयोग के जवाब के बीच कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित नियमों तथा न्यायालय के आदेशों के आधार पर होगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर भी विवाद
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश का आरोप है कि चुनाव आयोग अपने हलफनामे के माध्यम से यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहा है कि एसआईआर से जुड़े महत्वपूर्ण आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से जारी किए गए थे। कांग्रेस नेता के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने सीईसी के कुछ फैसलों और उनसे जुड़े कथित कानूनी उल्लंघनों पर आधिकारिक रिकॉर्ड में आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उन्होंने दावा किया कि इन आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। जयराम रमेश ने मतदाता सूचियों के केंद्रीकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस संबंध में भी अपनी चिंताएं दर्ज कराई थीं। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के कामकाज को लेकर भी पारदर्शिता और अधिकार क्षेत्र से जुड़े सवाल उठे, लेकिन उन पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।
कई राज्यों में मतदाता सूची में बदलाव पर सवाल
कांग्रेस ने गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) के फैसलों को कथित तौर पर पलटे जाने का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी का कहना है कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, कांग्रेस ने फार्म-7 के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। फार्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने में किया जाता है। जयराम रमेश के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान विभिन्न राज्यों में इसका इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई।
एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बढ़ी बहस
एसआईआर को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों ने मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है। विपक्षी पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया स्पष्ट नियमों के अनुसार होनी चाहिए तथा सभी फैसलों का उचित रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए। अब इस विवाद में चुनाव आयोग के हलफनामे, फार्म-6 से जुड़ी घोषणा और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। मामले में अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और न्यायालय के निर्णयों से स्पष्ट होगी।


