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वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता, नाविक बोले- रोजी-रोटी पर पड़ता है सीधा असर

वाराणसी। वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पिछले दो दिनों में गंगा का पानी करीब डेढ़ मीटर तक ऊपर आ गया है, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है। जलस्तर बढ़ने से घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं, नाविकों और गंगा से जुड़े रोजगार करने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

वाराणसी में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता, नाविक बोले- रोजी-रोटी पर पड़ता है सीधा असर
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वाराणसी। वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पिछले दो दिनों में गंगा का पानी करीब डेढ़ मीटर तक ऊपर आ गया है, जिसके बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर है। जलस्तर बढ़ने से घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं, नाविकों और गंगा से जुड़े रोजगार करने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि अभी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।

नाविक नारायण साहनी ने बताया कि पिछले दो दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। उनके अनुसार कल से आज तक करीब एक मीटर तक पानी बढ़ चुका है। सुबह से भी जलस्तर में काफी वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि पानी बढ़ने के कारण श्रद्धालुओं को गंगा स्नान और अन्य धार्मिक गतिविधियों में थोड़ी परेशानी हो रही है, लेकिन नाविक और प्रशासन सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं।

नारायण साहनी ने बताया कि फिलहाल नाव संचालन में बड़ी समस्या नहीं आई है, लेकिन अगर अगले चार-पांच दिनों तक इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति बनने पर प्रशासन कई बार नाव संचालन पर रोक लगा देता है, जिससे नाविकों की रोजी-रोटी प्रभावित होती है। इसके अलावा घाटों पर आने वाले यात्रियों की संख्या और गतिविधियों पर भी असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर केवल नाविकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घाटों पर दुकान लगाने वाले रेहड़ी-पटरी वालों, फूल-माला बेचने वालों और अन्य छोटे कारोबारियों की आजीविका भी प्रभावित होती है। गंगा से जुड़े हजारों लोगों का जीवन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी नदी पर निर्भर है।

वहीं, घाट पर पूजा-पाठ कराने वाले पंडित शशिकांत पाठक ने भी बढ़ते जलस्तर को चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से गंगा का पानी बढ़ रहा है, अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले कुछ दिनों में जलस्तर और ऊपर पहुंच सकता है। इससे घाटों पर होने वाली आरती और धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

पंडित शशिकांत पाठक ने कहा कि गंगा आरती के दौरान श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था में भी परेशानी आ सकती है। उन्होंने बताया कि गंगा से जुड़े कई लोगों की आजीविका प्रभावित होगी, जिसमें पुरोहित, माला-फूल बेचने वाले और अन्य छोटे व्यापारी शामिल हैं।



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