पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम गायब, चिदंबरम ने ली चुटकी
मामले ने उस समय और राजनीतिक रंग ले लिया, जब पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राघव चड्ढा को लेकर तंज कसा। उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का भी उल्लेख किया।

नई दिल्ली/ चंडीगढ़: Punjab SIR: पंजाब में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों में शामिल है। सूची में उनके नाम के सामने ‘Permanently Shifted’ यानी ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ दर्ज किया गया है। इसके बाद चड्ढा ने इस कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पंजाब सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। मामले ने उस समय और राजनीतिक रंग ले लिया, जब पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राघव चड्ढा को लेकर तंज कसा। उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का भी उल्लेख किया।
Yesterday, I congratulated my friend Mr Raghav Chaddha on becoming a non-voting citizen of India!
— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) September 4, 2026
He is not alone
Fully 10 per cent of the adult population of India have been declared non-voting citizens by the Election Commission of India!@Raghav Chaddha MP
चिदंबरम ने X पर क्या लिखा?
पी. चिदंबरम ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने अपने दोस्त राघव चड्ढा को ‘भारत का गैर-मतदान नागरिक’ बनने पर बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चड्ढा अकेले नहीं हैं और देश की वयस्क आबादी के करीब 10 प्रतिशत लोगों को चुनाव आयोग ने गैर-मतदान नागरिक घोषित कर दिया है। चिदंबरम की यह टिप्पणी पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में चड्ढा का नाम नहीं होने और SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के संदर्भ में आई है। इससे इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
वोटर लिस्ट में चड्ढा के नाम के आगे क्या लिखा है?
चुनाव आयोग की ओर से 13 अगस्त 2026 को जारी पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा के नाम के सामने ‘Permanently Shifted’ दर्ज किया गया है। इसके साथ उनका नाम ASDD यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट मतदाताओं की सूची में शामिल किया गया है। SIR प्रक्रिया के तहत पंजाब में अब तक 20.66 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। यह संख्या पुनरीक्षण से पहले राज्य के कुल मतदाताओं की करीब 9.7 प्रतिशत बताई जा रही है।
चड्ढा ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल
राघव चड्ढा ने मोहाली में दर्ज अपने मतदाता पहचान पत्र का हवाला देते हुए पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि उन्हें ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ के तौर पर चिह्नित करने में राज्य के प्रशासनिक तंत्र और पुलिस का इस्तेमाल किया गया। चड्ढा ने कहा कि इसे महज लिपिकीय गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें स्थानांतरित के रूप में किसने दर्ज किया, उस श्रेणी का सत्यापन किसने किया और पूरी प्रक्रिया को आगे किसने बढ़ाया।
‘सरकारी अधिकारियों के जरिए कार्रवाई’
चड्ढा के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी यानी CEO के स्तर तक कई अधिकारी इस प्रक्रिया से जुड़े होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी ड्यूटी में लगे अधिकारियों के तबादले, पोस्टिंग और करियर से जुड़े फैसले राज्य सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में रहते हैं। सांसद ने इसी व्यवस्था का हवाला देते हुए दावा किया कि उनके खिलाफ राजनीतिक दबाव का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से कोई स्वतंत्र प्रतिक्रिया इस जानकारी में सामने नहीं आई है।
SIR पर पहले से जारी है राजनीतिक बहस
पंजाब में SIR के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज है। एक तरफ प्रक्रिया को मतदाता सूची को अपडेट करने और वास्तविक मतदाताओं की पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेता प्रक्रिया और सत्यापन के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। राघव चड्ढा का मामला इसी व्यापक विवाद के बीच सामने आया है। अब नजर इस बात पर है कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने से पहले उनके नाम को लेकर क्या स्थिति बनती है और चुनाव आयोग की ओर से इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।


