PM मोदी-सुखबीर बादल की मुलाकात से पंजाब की राजनीति में हलचल, 2027 चुनाव से पहले फिर साथ आएंगे भाजपा-अकाली दल?
पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने की संभावना है। राज्य में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल प्रमुख राजनीतिक ताकतों के रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। यदि भाजपा और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन होता है, तो इसका असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है।

नई दिल्ली/चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को नया राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब शिरोमणि अकाली दल (बादल) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। हालांकि बैठक के बाद किसी भी पक्ष की ओर से बातचीत के एजेंडे का खुलासा नहीं किया गया, लेकिन इस मुलाकात ने संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पंजाब की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भाजपा और अकाली दल के रिश्तों को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं।
क्या फिर साथ आ सकते हैं पुराने सहयोगी?
शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी वर्षों तक पंजाब में गठबंधन सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों ने कई चुनाव साथ मिलकर लड़े और लंबे समय तक राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के विरोध और किसान आंदोलन के दौरान दोनों दलों के संबंधों में दरार आ गई थी। इसके बाद अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होने का फैसला लिया। वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दल अलग-अलग मैदान में उतरे थे। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की ताजा मुलाकात ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या दोनों दल आगामी विधानसभा चुनाव से पहले फिर से राजनीतिक साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
2027 चुनाव में बदल सकते हैं सियासी समीकरण
पंजाब में 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने की संभावना है। राज्य में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल प्रमुख राजनीतिक ताकतों के रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। यदि भाजपा और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन होता है, तो इसका असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है। अकाली दल का प्रभाव जहां ग्रामीण और सिख बहुल क्षेत्रों में माना जाता है, वहीं भाजपा शहरी क्षेत्रों और कुछ नए सामाजिक वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है। ऐसे में दोनों दलों का संभावित तालमेल चुनावी मुकाबले को नई दिशा दे सकता है।
बैठक पर विपक्ष की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री और सुखबीर बादल की मुलाकात पर आम आदमी पार्टी ने भी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर टिप्पणी करते हुए दोनों दलों पर निशाना साधा। केजरीवाल ने अपने पोस्ट में लिखा, "ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे। तो क्या चन्दा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?" आप की इस प्रतिक्रिया के बाद पंजाब की राजनीति में बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि भाजपा और अकाली दल की ओर से इस टिप्पणी पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


