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अब भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने किया एसआइआर का विरोध,चुनाव आयोग को लिखा पत्र

अनंत महाराज ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि एसआइआर अभियान की आड़ में राजवंशी समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है।

अब भाजपा के  राज्यसभा सदस्य ने किया एसआइआर का विरोध,चुनाव आयोग को लिखा पत्र
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में गहन मतदाता सूची संशोधन (एसआइआर) अभियान को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विपक्ष के लगातार हमलों के बीच अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर से ही इस अभियान पर सवाल उठने लगे हैं। कूचबिहार से भाजपा के राज्यसभा सदस्य अनंत महाराज ने एसआइआर के बहाने राजवंशी समुदाय के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। उनके इस कदम ने न सिर्फ भाजपा को असहज स्थिति में डाल दिया है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।

भाजपा सांसद का चुनाव आयोग को पत्र
अनंत महाराज ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि एसआइआर अभियान की आड़ में राजवंशी समुदाय के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है, जिससे खास समुदायों को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंच सकता है। एक ही पार्टी के सांसद द्वारा इस तरह का आरोप लगाए जाने से भाजपा के लिए स्थिति असहज हो गई है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राज्य में एसआइआर को पूरी तरह सही और जरूरी बता रही है।

बयान में यू-टर्न से बढ़ा विवाद
एसआइआर को लेकर अनंत महाराज के रुख में अचानक आए बदलाव ने भी विवाद को हवा दी है। कुछ दिन पहले ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में नहीं मिलेगा, उन्हें डिटेंशन कैंप भेजा जा सकता है। इस बयान के बाद खासतौर पर उत्तर बंगाल में भारी नाराजगी देखी गई थी। हालांकि अब उन्होंने बिल्कुल उलटा रुख अपनाते हुए एसआइआर को समुदाय विशेष के उत्पीड़न से जोड़ दिया है।

चुनाव से पहले राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
इस साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में एसआइआर अभियान को लेकर सियासत और तेज हो गई है। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पहले से ही आरोप लगाती रही है कि एसआइआर का इस्तेमाल महज राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है। टीएमसी का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए खास वर्ग के मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करने की कोशिश हो रही है।


भाजपा के लिए असहज

भाजपा ने लगातार इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि एसआइआर का मकसद केवल फर्जी और अवैध मतदाताओं को सूची से हटाना है। पार्टी के बड़े-बड़े नेता एसआइआर के पक्ष में बयान देते रहे हैं। अब पार्टी की विचारधारा से हटकर अनंत महाराज का ऐसा आरोप भाजपा के लिए असहज है।


कूचबिहार और बंगाल के कई जिलों में राजवंशी समुदाय की बड़ी आबादी है। कई विधानसभा सीटों पर राजवंशी मतदाता जीत और हार तय करते हैं। अनंत महाराज का यह कदम पार्टी लाइन से अलग माना जा रहा है। तृणमूल इसे राजनीतिक फायदे के रूप में देख रही है। तृणमूल सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने अनंत महाराज के इस बयान को लपक लिया। उन्होंने आज एक जनसभा में उनके बयान का जिक्र कर भाजपा पर तंज भी कसा।


एसआइआर की कड़ी आलोचना

अनंत महाराज पिछले कुछ समय से बागी तेवर अपनाए हुए हैं। पहले समर्थन के बाद अब एसआइआर की वह कड़ी आलोचना कर रहे हैं। यहां तक कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बांग्लादेशी बता दिया था।


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