मोदी के तंज से गरमाई सियासत, कांग्रेस का पलटवार; वाराणसी और नागपुर में BJP की हार पर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए उन्हें 'प्रवचनमंत्री' कहकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को दूसरों को उपदेश देने के बजाय आत्मविश्लेषण करना चाहिए।

नई दिल्ली: चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस की सीटों पर तंज कसने के बाद कांग्रेस नेताओं ने पलटवार किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और पार्टी नेता सुप्रिया श्रीनेत ने वाराणसी और नागपुर जैसे भाजपा के मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रों में मिली हार का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री और भाजपा नेतृत्व पर सवाल उठाए। जयराम रमेश ने मोदी को आत्मविश्लेषण करने की सलाह दी, जबकि सुप्रिया श्रीनेत ने चुनौती दी कि अगर भाजपा को बैलेट पेपर पर इतना भरोसा है, तो लोकसभा और विधानसभा के चुनाव भी इसी तरीके से कराए जाने चाहिए।
मोदी ने बैलेट पेपर से चुनाव का किया जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने लिखा कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों पर चुनाव हुए और ये चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए। इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं। मोदी की इस टिप्पणी को कांग्रेस की उस मांग पर तंज के तौर पर देखा गया, जिसमें पार्टी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग करती रही है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी शामिल रही है। विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का मौका दिया है। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने भी उन सीटों का जिक्र किया, जहां भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।
प्रवचनमंत्री जी को आत्मविश्लेषण की ज़रूरत है, लेकिन वे दूसरों को प्रवचन दे रहे हैं!
कांग्रेस की सीटें गिनने से पहले काश यह भी विचार कर लेते कि उनके अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दोनों सीटों पर भाजपा क्यों हारी और RSS के गढ़ नागपुर में कांग्रेस ने भाजपा को कैसे हराया?
मोदी जी,
ट्रोलिंग बंद कीजिए। करोड़ों परिवार कमरतोड़ महंगाई से त्रस्त हैं, युवा बेरोज़गार हैं और निजी निवेश ठप पड़ा है।
अहंकार छोड़कर इन मुद्दों पर विचार करिए!
वाराणसी और नागपुर से लेकर लखनऊ, प्रयागराज, पटना की जनता ने स्पष्ट रूप से आपकी नीतियों के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया है।
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 29, 2026
जयराम रमेश बोले- प्रधानमंत्री पहले आत्मविश्लेषण करें
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए उन्हें 'प्रवचनमंत्री' कहकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को दूसरों को उपदेश देने के बजाय आत्मविश्लेषण करना चाहिए। जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विधान परिषद की दोनों सीटों पर भाजपा की हार पर विचार क्यों नहीं करते। उन्होंने नागपुर में कांग्रेस की जीत का भी उल्लेख किया और कहा कि यह भाजपा तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। कांग्रेस नेता ने महंगाई, बेरोजगारी और निजी निवेश में सुस्ती जैसे मुद्दों को उठाते हुए प्रधानमंत्री से इन समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि आम परिवार बढ़ती महंगाई से परेशान हैं और युवाओं के सामने रोजगार की चुनौती बनी हुई है। जयराम रमेश ने लखनऊ, प्रयागराज और पटना का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि इन शहरों के चुनावी नतीजे भाजपा की नीतियों के प्रति जनता की नाराजगी का संकेत हैं। हालांकि, इन नतीजों को व्यापक जनमत का प्रमाण मानने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
• बनारस - PM नरेंद्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र
• पटना - BJP अध्यक्ष नितिन नबीन का क्षेत्र
• नागपुर- देवेंद्र फड़नवीस और RSS का गढ़
BJP सब हारी - जब बैलट से चुनाव हुआ
सारे गढ़ ध्वस्त हो गए
सारी हीरोबाज़ी निकल गई
टाँय टाँय फिस्स
और मोदी जी की टीम तो उनकी फ़ज़ीहत करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही
बड़ा ट्वीट ट्वीट खेल रहे थे
चलिए चुनौती है - कराइये सारे चुनाव बैलट पर
निपट जायेंगे - जैसे अभी गढ़ों में निपटे हैं
— Supriya Shrinate (@SupriyaShrinate) October 29, 2026
सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा को दी बैलेट पेपर की चुनौती
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी प्रधानमंत्री की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा को घेरा। उन्होंने वाराणसी को नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र, पटना को भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन से जुड़ा राजनीतिक क्षेत्र और नागपुर को केंद्रीय मंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा आरएसएस का मजबूत गढ़ बताते हुए भाजपा की हार पर सवाल उठाए। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि जिन क्षेत्रों को भाजपा का मजबूत आधार माना जाता है, वहां बैलेट पेपर से हुए चुनाव में पार्टी को झटका लगा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के मजबूत गढ़ों में मिली हार ने उसके राजनीतिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि अगर पार्टी को बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर इतना भरोसा है, तो लोकसभा और विधानसभा के सभी चुनाव इसी व्यवस्था के तहत कराए जाने चाहिए। इस बयान के जरिए कांग्रेस ने ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।
अमित शाह ने भी कांग्रेस पर साधा निशाना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिलने के शुरुआती रुझानों को लेकर तंज कसा था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पोस्ट के जरिए कांग्रेस पर निशाना साधा। शाह की पोस्ट में बैलेट बॉक्स को संबोधित करते हुए कटाक्ष किया गया था। इसके साथ हंसते हुए आंखों में आंसू आने वाला इमोजी और परेशान बैलेट बॉक्स का चित्र भी साझा किया गया। इसे कांग्रेस की ओर से बैलेट पेपर की मांग को लेकर जारी बहस के जवाब के तौर पर देखा गया। हालांकि, शुरुआती रुझानों में कांग्रेस को सीटें नहीं मिलने की खबरों के बाद महाराष्ट्र की नागपुर सीट पर पार्टी ने जीत दर्ज की। ऐसे में चुनाव के सभी परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक दल अपने-अपने दावों के समर्थन में आंकड़े पेश कर रहे हैं।
वाराणसी में सपा की जीत, नागपुर में कांग्रेस ने मारी बाजी
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों के चुनाव में भाजपा ने छह, जबकि समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। वाराणसी में सपा ने शिक्षक और स्नातक, दोनों सीटों पर भाजपा को हराया। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में मिली इन हारों ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया। महाराष्ट्र के नागपुर में भी कांग्रेस ने भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन से एक सीट छीन ली। नागपुर आरएसएस का मुख्यालय होने के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। इसलिए यहां कांग्रेस की जीत को भाजपा के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर पेश किया जा रहा है। हालांकि, चारों राज्यों की सभी 28 सीटों के परिणाम एक जैसे नहीं रहे। कर्नाटक में भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने चारों सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम रखा।


