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मृत और निलंबित जेई के तबादले पर एमसीडी घिरी, आप ने दिल्ली नगर निगम की कार्यशैली पर उठाए सवाल

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा जारी एक तबादला आदेश को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासित एमसीडी ने एक ऐसे जूनियर इंजीनियर (जेई) का तबादला कर दिया जिसकी सात महीने पहले मृत्यु हो चुकी है

मृत और निलंबित जेई के तबादले पर एमसीडी घिरी, आप ने दिल्ली नगर निगम की कार्यशैली पर उठाए सवाल
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नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा जारी एक तबादला आदेश को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने आरोप लगाया है कि भाजपा शासित एमसीडी ने एक ऐसे जूनियर इंजीनियर (जेई) का तबादला कर दिया जिसकी सात महीने पहले मृत्यु हो चुकी है, जबकि एक अन्य निलंबित जेई का नाम भी ट्रांसफर सूची में शामिल किया गया। इस मामले को लेकर एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा और निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

अंकुश नारंग ने कहा कि यह घटना भाजपा शासित एमसीडी की प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या निगम को अपने कर्मचारियों की वर्तमान स्थिति तक की जानकारी नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और मृत तथा निलंबित कर्मचारियों के नाम ट्रांसफर सूची में शामिल करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

आप नेता के अनुसार, एमसीडी के इंजीनियरिंग विभाग की ओर से 5 जून को जारी पत्र संख्या 165 में दो अधिकारियों के तबादले का उल्लेख किया गया था। इनमें जेई अपूर्व भटनागर का नाम शामिल था, जिनका करीब सात महीने पहले निधन हो चुका है।

वहीं जेई अतुल कुमार सुमन, जो पिछले नौ महीने से निलंबित चल रहे हैं, उनका नाम भी तबादला सूची में दर्ज किया गया। नारंग ने कहा कि आश्चर्यजनक रूप से इस आदेश पर अतिरिक्त उपायुक्त (इंजीनियरिंग) के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सत्यापन के आदेश जारी होना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है।

उनका कहना है कि जब मृत, निलंबित और सेवा में सक्रिय नहीं रहने वाले कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हों तो यह स्पष्ट संकेत है कि विभागीय रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था में भारी खामियां हैं। अंकुश नारंग ने यह भी दावा किया कि जैसे ही आम आदमी पार्टी ने इस मामले को सार्वजनिक किया, एमसीडी प्रशासन ने तत्काल उक्त आदेश को वापस लेते हुए ट्रांसफर सूची निरस्त कर दी।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि निगम में गलत वरिष्ठता सूची, विवादित पदोन्नतियां और कथित रूप से पैसे लेकर तबादले किए जाने जैसी शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एमसीडी में डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू की जाए, जिससे कर्मचारियों की सेवा स्थिति की वास्तविक समय में जांच हो सके। साथ ही उन्होंने महापौर और इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले पर जवाबदेही तय करने की भी मांग की।


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