पीएम मोदी के साक्षात्कार पर कांग्रेस का हमला, कहा-हताश पीआर कवायद
जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि यह कोई वास्तविक साक्षात्कार नहीं था, बल्कि एक सोचा-समझा प्रचार अभ्यास था। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री विपक्ष के सवालों का सामना करने के बजाय सुर्खियां प्रबंधित करने की कोशिश कर रहे हैं।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समाचार एजेंसी को दिए गए हालिया साक्षात्कार को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे “सावधानीपूर्वक लिखी गई और हताश पीआर कवायद” करार देते हुए आरोप लगाया कि यह वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने और सुर्खियां प्रबंधित करने का प्रयास है। कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री इस समय व्यापार समझौतों और आम बजट को लेकर विपक्ष के हमलों से घिरे हुए हैं, ऐसे में उन्होंने “हेडलाइन मैनेजमेंट” का सहारा लिया है।
“यह इंटरव्यू नहीं, प्रचार अभ्यास है”
जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि यह कोई वास्तविक साक्षात्कार नहीं था, बल्कि एक सोचा-समझा प्रचार अभ्यास था। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री विपक्ष के सवालों का सामना करने के बजाय सुर्खियां प्रबंधित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह इंटरव्यू उन कठिन सवालों से बचने का माध्यम है, जिनका जवाब देश जानना चाहता है।” रमेश का दावा है कि इस वर्ष का केंद्रीय बजट निराशाजनक रहा है। उन्होंने कहा कि बाजार और निवेशकों की प्रतिक्रिया भी उत्साहजनक नहीं रही, जिससे स्पष्ट है कि आर्थिक मोर्चे पर सरकार अपेक्षित विश्वास पैदा नहीं कर सकी है। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि किसानों और अन्य वर्गों से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यह रणनीति अपनाई गई है।
व्यापार वार्ता पर बयान को बताया ‘गलत’
प्रधानमंत्री ने अपने साक्षात्कार में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग/यूपीए) सरकार के दौरान हुए व्यापार समझौतों और वार्ताओं की आलोचना की थी। इस पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए उनके आरोपों को “अनुचित और गलत” बताया। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए शासन के दौरान भारत ने एक आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत की थी और कई महत्वपूर्ण व्यापार समझौते किए थे, जिनसे देश को लाभ हुआ।
आनंद शर्मा का बयान
पूर्व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था ने औसतन आठ प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की थी। उन्होंने याद दिलाया कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से उभरी थी। उनके अनुसार, यह उस समय की आर्थिक नीतियों और संतुलित व्यापार दृष्टिकोण का परिणाम था। आनंद शर्मा ने मौजूदा सरकार द्वारा अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते को “अपारदर्शी” करार दिया। उन्होंने मांग की कि इस समझौते के सभी विवरण सार्वजनिक किए जाएं ताकि संसद और जनता इसके प्रभाव को समझ सके।
संवेदनशील क्षेत्रों पर चिंता
कांग्रेस ने आशंका जताई है कि अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते का असर कृषि, कपास और वस्त्र जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ सकता है। आनंद शर्मा ने कहा कि यदि इन क्षेत्रों में आयात-निर्यात संतुलन प्रभावित हुआ, तो किसानों और छोटे उद्योगों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने सरकार से पारदर्शिता और विस्तृत चर्चा की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी बड़े व्यापार समझौते से पहले व्यापक परामर्श और संसद में बहस जरूरी है।
बजट और बाजार प्रतिक्रिया पर सवाल
जयराम रमेश ने अपने बयान में बजट पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निवेशकों और बाजार की प्रतिक्रिया सरकार के दावों से मेल नहीं खाती। हालांकि, सरकार का दावा है कि बजट विकास, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन पर केंद्रित है। कांग्रेस का तर्क है कि बजट में आम लोगों, किसानों और मध्यम वर्ग के लिए अपेक्षित राहत नहीं दिखती। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब आर्थिक नीतियों और व्यापार समझौतों पर राजनीतिक बहस तेज हो रही है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
प्रधानमंत्री के साक्षात्कार और उस पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि व्यापार नीति और बजट जैसे मुद्दे आगामी राजनीतिक विमर्श में प्रमुख भूमिका निभाएंगे। जहां सरकार अपने कदमों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक मजबूती के लिए आवश्यक बता रही है, वहीं विपक्ष उन्हें पारदर्शिता और जवाबदेही के कसौटी पर परखने की बात कर रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि साक्षात्कार के जरिए सरकार आलोचनाओं का जवाब देने के बजाय एक सकारात्मक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रही है।
जवाब आने की संभावना
अब देखना होगा कि व्यापार समझौते और बजट को लेकर संसद और सार्वजनिक मंचों पर किस तरह की बहस होती है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इन मुद्दों को उठाती रहेगी और सरकार से जवाब मांगती रहेगी। दूसरी ओर, सरकार की ओर से भी इन आरोपों का जवाब आने की संभावना है। फिलहाल, प्रधानमंत्री के साक्षात्कार को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है और यह विवाद आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है।


