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प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य से दुर्व्यवहार पर कांग्रेस का हमला, नोटिस को बताया हिंदू धर्म पर प्रहार
पवन खेड़ा ने कहा कि मौनी अमावस्या के अवसर पर शाही स्नान के लिए जा रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने रोक दिया। आरोप है कि इस दौरान अभद्रता और मारपीट हुई, जिसमें उनके कई शिष्य घायल हो गए।

नई दिल्ली/प्रयागराज। प्रयागराज माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित दुर्व्यवहार और उसके बाद उन्हें नोटिस जारी किए जाने को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं पर सीधा हमला करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने आधी रात को नोटिस भेजकर न केवल एक प्रतिष्ठित धर्मगुरु का अपमान किया, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों का भी उल्लंघन किया है।
कांग्रेस का आरोप: सत्ता का घमंड
कांग्रेस ने कहा कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य को नोटिस भेजकर यह कहना कि सरकार उन्हें शंकराचार्य नहीं मानती, सत्ता के घमंड की पराकाष्ठा है। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हिंदू समाज ही नहीं, बल्कि पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस मुद्दे पर मौन को देख रहा है और उन्हें इसके लिए माफ नहीं करेगा।
शाही स्नान के दौरान पालकी रोके जाने का आरोप
पवन खेड़ा ने कहा कि मौनी अमावस्या के अवसर पर शाही स्नान के लिए जा रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने रोक दिया। आरोप है कि इस दौरान अभद्रता और मारपीट हुई, जिसमें उनके कई शिष्य घायल हो गए। इस घटना के विरोध में शंकराचार्य पिछले 48 घंटे से कड़ाके की ठंड में बिना अन्न-जल के धरने पर बैठे हैं। कांग्रेस का कहना है कि एक ओर सरकार सनातन परंपराओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं परंपराओं के सर्वोच्च प्रतिनिधियों में से एक के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।
माफी की जगह नोटिस, कांग्रेस की आपत्ति
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रशासन को इस पूरे मामले में माफी मांगनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय शंकराचार्य को नोटिस भेजकर उनसे पूछा गया कि वे अपने नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं। खेड़ा ने इसे ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ बताते हुए कहा कि न तो कोई जिलाधिकारी और न ही कोई मुख्यमंत्री यह तय कर सकता है कि कौन शंकराचार्य है। यह पूरी तरह से हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं का विषय है।
भाजपा एजेंडे से असहमति का आरोप
पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ वीडियो क्लिप भी दिखाए और दावा किया कि जब तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भाजपा के एजेंडे से टकराव नहीं रखते थे, तब तक सरकार उन्हें शंकराचार्य मानती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही शंकराचार्य ने गोमांस, राम मंदिर की आधी-अधूरी प्राण प्रतिष्ठा और महाकुंभ की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए, वैसे ही वे भाजपा सरकार की नजरों में शंकराचार्य नहीं रहे। कांग्रेस का कहना है कि सरकार की आलोचना करने की कीमत एक धर्मगुरु को इस तरह चुकानी पड़ रही है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
कांग्रेस प्रवक्ता ने 1954 के प्रसिद्ध शिरूर मठ मामले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि किसी भी मठ की परंपराओं और उसके संचालन में सरकार या प्रशासन को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। खेड़ा ने कहा कि रात 12 बजे नोटिस भेजा जाना संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का सीधा उल्लंघन है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन के अधिकार की गारंटी देता है।
प्रशासन के रवैये पर सवाल
कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश प्रशासन के व्यवहार को शर्मनाक बताया। पार्टी का कहना है कि शंकराचार्य केवल सनातन परंपरा के अनुसार विधिवत गंगा स्नान करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसके लिए अनुमति लेने को कहा गया। वहीं, सत्ता समर्थक और स्वयंभू संतों को विशेष सुरक्षा और सुविधाएं दी जा रही हैं।
‘अब संतों से भी कागज मांगे जा रहे’
सरकार पर तंज कसते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा सरकार पहले मुसलमानों से कागज मांगती थी और अब हिंदू धर्म के संत शिरोमणि से कागज मांगे जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘बटेंगे तो कटेंगे’ का नारा देने वाली सरकार अब हिंदू धर्म को भी बांटने का काम कर रही है। फिलहाल प्रयागराज माघ मेले में हुए इस विवाद ने राष्ट्रीय राजनीति में नया मोड़ ले लिया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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