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भाजपा को मिलेगा नया युवा नेतृत्व, नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लगभग तय

सोमवार को इसकी औपचारिक चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और निर्विरोध चुने जाने के बाद मंगलवार को वे निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा से पदभार ग्रहण करेंगे। महीनों से चल रही अटकलों पर अब पार्टी नेतृत्व ने अंतिम मुहर लगाने की तैयारी कर ली है।

भाजपा को मिलेगा नया युवा नेतृत्व, नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना लगभग तय
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नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने जा रहा है। बिहार के युवा नेता और पूर्व मंत्री नितिन नवीन को पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाना लगभग तय हो चुका है। सोमवार को इसकी औपचारिक चुनावी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और निर्विरोध चुने जाने के बाद मंगलवार को वे निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा से पदभार ग्रहण करेंगे। महीनों से चल रही अटकलों पर अब पार्टी नेतृत्व ने अंतिम मुहर लगाने की तैयारी कर ली है।

सोमवार को पूरी होगी चुनावी प्रक्रिया


भाजपा संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की अधिसूचना 16 जनवरी को पार्टी के राष्ट्रीय रिटर्निंग अफसर के. लक्ष्मण की ओर से जारी की गई थी। इसके तहत सोमवार को एक ही दिन में नामांकन से लेकर नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी। कार्यक्रम के अनुसार दोपहर दो से शाम चार बजे तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद चार से पांच बजे तक नामांकन पत्रों की जांच होगी और शाम पांच से छह बजे के बीच नाम वापस लेने का समय तय किया गया है। शाम 6.30 बजे चुनाव अधिकारी नामांकन की स्थिति को लेकर प्रेस वक्तव्य जारी करेंगे। चूंकि नितिन नवीन इस पद के लिए एकमात्र प्रत्याशी होंगे, इसलिए मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी और सोमवार को ही उनके निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा हो जाएगी।

मंगलवार को संभालेंगे अध्यक्ष पद


यदि किसी कारणवश मतदान की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए मंगलवार को प्रात: 11.30 से दोपहर 1.30 बजे तक का समय तय किया गया है। हालांकि पार्टी सूत्रों के अनुसार इसकी संभावना लगभग शून्य है। ऐसे में मंगलवार को औपचारिक रूप से नितिन नवीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभाल लेंगे और जेपी नड्डा का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।

अचानक उभार, लेकिन सोची-समझी रणनीति


भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने 14 दिसंबर 2025 को नितिन नवीन को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर सभी को चौंका दिया था। बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री और पांच बार के विधायक रहे नितिन नवीन की उम्र महज 45 वर्ष है। उन्हें इस अहम जिम्मेदारी पर लाना पार्टी के उस दीर्घकालिक रणनीतिक संकेत के रूप में देखा गया, जिसके तहत संगठन को युवा नेतृत्व और नई ऊर्जा से लैस करने की कोशिश की जा रही है। कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद ही यह लगभग तय माना जाने लगा था कि पार्टी उन्हें ही स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने जा रही है। अब सोमवार को चुनावी औपचारिकताओं के साथ इस पर अंतिम मुहर लगने जा रही है।

नितिन नवीन का सियासी सफर


नितिन नवीन बिहार की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे पांच बार विधायक रह चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। संगठनात्मक कामकाज में उनकी पकड़ और जमीनी राजनीति की समझ को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जो संगठन और सरकार दोनों के कामकाज को संतुलन के साथ समझते हैं। यही वजह है कि कार्यकारी अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद उन्हें आगामी चुनावी राज्यों में सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया।

बड़ी परीक्षा: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव

नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद ऐसे समय में मिलने जा रहा है, जब पार्टी के सामने कई अहम चुनावी चुनौतियां खड़ी हैं। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इनमें से बंगाल, असम और तमिलनाडु का चुनाव विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है। बंगाल में भाजपा सत्ता में वापसी की कोशिश में जुटी है, असम में अपनी सरकार को बरकरार रखने की चुनौती है और तमिलनाडु में संगठन को विस्तार देने का लक्ष्य है। कार्यकारी अध्यक्ष रहते हुए ही नितिन नवीन ने इन राज्यों का दौरा शुरू कर दिया था और संगठनात्मक बैठकों के जरिए अपनी सक्रियता दिखाई है।

रणनीतिक कौशल पर टिकी निगाहें

अब जब नितिन नवीन स्थायी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं, तो पार्टी का आगामी चुनावी प्रदर्शन उनके रणनीतिक कौशल से जोड़कर देखा जाएगा। संगठन को मजबूत करना, राज्यों में समन्वय बढ़ाना और युवा कार्यकर्ताओं को आगे लाना ये सभी उनके सामने प्रमुख जिम्मेदारियां होंगी। भाजपा के अंदरखाने यह भी माना जा रहा है कि नितिन नवीन का चयन पार्टी के नेतृत्व परिवर्तन की एक बड़ी कड़ी है, जिसमें भविष्य की राजनीति के लिए अपेक्षाकृत युवा चेहरों को आगे लाया जा रहा है।

जेपी नड्डा के बाद नई दिशा?


जेपी नड्डा के कार्यकाल में भाजपा ने कई राज्यों में चुनाव लड़े और संगठनात्मक विस्तार पर जोर दिया। अब नितिन नवीन के नेतृत्व में पार्टी किस दिशा में आगे बढ़ेगी, इस पर राजनीतिक गलियारों की नजर टिकी है। माना जा रहा है कि उनका फोकस संगठन को और अधिक आक्रामक, तकनीक-सक्षम और युवाओं से जोड़ने पर होगा।

औपचारिकता भर बाकी

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन का चुना जाना अब सिर्फ औपचारिकता रह गया है। सोमवार को निर्विरोध चुनाव की घोषणा और मंगलवार को पदभार ग्रहण के साथ ही पार्टी को एक नया, युवा नेतृत्व मिल जाएगा। आने वाले महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव नितिन नवीन के लिए पहली बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होंगे, जो यह तय करेंगे कि भाजपा का यह नेतृत्व परिवर्तन कितना प्रभावी सिद्ध होता है।


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