बीजेपी ने सात मोर्चों के लिए नियुक्त किए नए प्रभारी, युवा मोर्चा की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को; पूनिया और पुरंदेश्वरी को भी अहम भूमिका
हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे की जिम्मेदारी दिए जाने को पार्टी के संगठनात्मक विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बस्ती से लोकसभा सांसद द्विवेदी लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। युवा मोर्चा के जरिए पार्टी युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक पहुंच को मजबूत करने पर जोर देती रही है।

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने सात प्रमुख मोर्चों के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी ने युवा, महिला, एससी, ओबीसी, किसान, एसटी और अल्पसंख्यक मोर्चों की जिम्मेदारी अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। नई नियुक्तियों में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिनके पास संगठन और चुनावी राजनीति का लंबा अनुभव है।
सात मोर्चों की जिम्मेदारी इन नेताओं को
बीजेपी की ओर से घोषित जिम्मेदारियों के मुताबिक बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। आंध्र प्रदेश बीजेपी की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, हरियाणा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय भाटिया को अनुसूचित जाति (SC) मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। ओडिशा के प्रमुख भाजपा नेता बैजयंत पांडा को ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी मिली है। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता लाल सिंह आर्या किसान मोर्चे के प्रभारी होंगे, जबकि राजस्थान के कद्दावर नेता सतीश पूनिया को एसटी मोर्चे की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मध्य प्रदेश के खरगोन-बड़वानी से सांसद गजेंद्र पटेल को अल्पसंख्यक मोर्चे का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
युवा मोर्चे की कमान हरीश द्विवेदी के हाथ
हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे की जिम्मेदारी दिए जाने को पार्टी के संगठनात्मक विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बस्ती से लोकसभा सांसद द्विवेदी लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। युवा मोर्चा के जरिए पार्टी युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक पहुंच को मजबूत करने पर जोर देती रही है।
महिला मोर्चे की जिम्मेदारी डी. पुरंदेश्वरी को
डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। वह आंध्र प्रदेश बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं और पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय रही हैं। दक्षिण भारत में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार के अनुभव को देखते हुए महिला मोर्चे की जिम्मेदारी उनके लिए अहम मानी जा रही है।
संजय भाटिया को एससी मोर्चे का प्रभार
हरियाणा के वरिष्ठ भाजपा नेता संजय भाटिया को एससी मोर्चे की जिम्मेदारी मिली है। वह वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं और संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रहे हैं। पार्टी संगठन में उनकी जिम्मेदारी और अनुभव को देखते हुए एससी मोर्चे के कामकाज में उनसे व्यापक संगठनात्मक भूमिका की उम्मीद की जा रही है।
बैजयंत पांडा को ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी
ओडिशा के प्रमुख भाजपा नेता बैजयंत पांडा को ओबीसी मोर्चे का प्रभारी नियुक्त किया गया है। वह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और केंद्रपाड़ा लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। ओडिशा में भाजपा के संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल करने का संकेत भी मानी जा रही है।
किसान मोर्चे की कमान लाल सिंह आर्या को
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता लाल सिंह आर्या को किसान मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। वह मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और भाजपा के प्रमुख दलित नेताओं में गिने जाते हैं। वर्तमान में वह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। किसान मोर्चे की जिम्मेदारी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब पार्टी ग्रामीण क्षेत्रों और किसान वर्ग के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को लगातार बढ़ा रही है।
सतीश पूनिया और गजेंद्र पटेल को भी अहम जिम्मेदारी
राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को एसटी मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। वह वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव में प्रभारी के तौर पर उनकी भूमिका का भी पार्टी के भीतर उल्लेख होता रहा है। अब उन्हें आदिवासी समुदाय से जुड़े संगठनात्मक मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, गजेंद्र पटेल को अल्पसंख्यक मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। वह मध्य प्रदेश के खरगोन-बड़वानी क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। आदिवासी क्षेत्र से आने वाले पटेल के अनुभव को देखते हुए पार्टी की ओर से उन्हें यह नई जिम्मेदारी दी गई है।
संगठन विस्तार पर बीजेपी का फोकस
सातों मोर्चों में नए प्रभारियों की नियुक्ति को भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को और सक्रिय करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। युवा, महिला, किसान, ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यक जैसे सामाजिक समूहों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने में इन मोर्चों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी देकर भाजपा ने संगठन और सामाजिक समीकरणों के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास किया है।


