अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग, ट्रस्ट पर उठाए सवाल
राजीव शुक्ला ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच होने से पूरे प्रकरण के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच संभव होगी।

नई दिल्ली: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने आरोप लगाया कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए, ताकि किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश न रहे।
प्रधान न्यायाधीश से स्वत: संज्ञान लेने की अपील
नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राजीव शुक्ला ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जांच होने से पूरे प्रकरण के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच संभव होगी और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है, इसलिए जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग
राजीव शुक्ला ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन और संचालन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर उसका पुनर्गठन किया जाए। उनके अनुसार, मंदिर ट्रस्ट का संचालन किसी राजनीतिक दल या उससे जुड़े लोगों के बजाय शंकराचार्यों, संत-महात्माओं और अन्य प्रतिष्ठित धार्मिक व्यक्तियों के हाथों में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं का संचालन राजनीति से दूर रहकर होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और मंदिर प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर सके।
भाजपा और आरएसएस पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर आरोप लगाया कि वे मंदिर ट्रस्टों में अपने समर्थकों की नियुक्ति कर धार्मिक संस्थाओं के संचालन को राजनीतिक प्रभाव में लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों में आने वाले चढ़ावे और दान का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
एफआईआर और जांच की दिशा पर उठाए सवाल
राजीव शुक्ला ने मामले में दर्ज एफआईआर और अब तक हुई कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि कथित तौर पर बड़ी रकम से जुड़ी कोई अनियमितता हुई है तो क्या यह वरिष्ठ स्तर की जानकारी या सहमति के बिना संभव थी? उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों को सभी स्तरों पर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और यदि किसी बड़े अधिकारी या जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।
'मंदिर प्रकोष्ठ' पर भी कांग्रेस ने जताई आपत्ति
राजीव शुक्ला ने भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में बनाए गए कथित "मंदिर प्रकोष्ठ" पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की भूमिका लोकतांत्रिक और जनहित के मुद्दों तक सीमित रहनी चाहिए, जबकि धार्मिक संस्थाओं का संचालन स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की राजनीतिक परंपरा में पहले इस तरह के प्रकोष्ठ देखने को नहीं मिले और धार्मिक संस्थानों को राजनीतिक गतिविधियों से अलग रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में है।


