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'तुम डर गए हो राघव, मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो...', राघव चड्ढा पर भड़की आम आदमी पार्टी

राघव चड्ढा के बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए अनुराग ढांडा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता “केजरीवाल के सिपाही” हैं और उनकी पहचान निडरता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर कोई मोदी से डर जाए तो वह देश के लिए क्या लड़ेगा?”

तुम डर गए हो राघव, मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो..., राघव चड्ढा पर भड़की आम आदमी पार्टी
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नई दिल्‍ली: आम आदमी पार्टी (AAP) में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस फैसले के बाद AAP के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग ढांडा ने राघव चड्ढा पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी कार्यशैली और रुख पर सवाल उठाए हैं, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे पार्टी की सामान्य प्रक्रिया बताया है। पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा पर सीधा हमला करते हुए उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।

अनुराग ढांडा का हमला

राघव चड्ढा के बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए अनुराग ढांडा ने कहा कि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता “केजरीवाल के सिपाही” हैं और उनकी पहचान निडरता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अगर कोई मोदी से डर जाए तो वह देश के लिए क्या लड़ेगा?” ढांडा ने आरोप लगाया कि संसद में पार्टी को सीमित समय मिलता है, और उसमें जनहित के मुद्दे उठाने की जगह “छोटे मुद्दों” पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी को देश के बड़े सवालों पर मुखर होना चाहिए।

संसद में भूमिका पर भी उठाए सवाल

ढांडा ने राघव चड्ढा की संसदीय सक्रियता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गुजरात में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी जैसे मुद्दों पर चड्ढा ने सदन में आवाज नहीं उठाई। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में मतदान अधिकार से जुड़े मुद्दों और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ प्रस्ताव पर भी उन्होंने चड्ढा के रुख की आलोचना की। चड्ढा ने CEC के खिलाफ प्रस्ताव पर साइन करने से इनकार कर दिया। ढांडा ने आरोप लगाया कि जब पार्टी ने सदन से वॉकआउट किया, तब भी चड्ढा सदन में बैठे रहे, जो पार्टी लाइन के खिलाफ था।

“देश के असली मुद्दों पर चुप्पी”

अनुराग ढांडा ने कहा कि राघव चड्ढा पिछले कुछ वर्षों से बड़े राजनीतिक मुद्दों पर बोलने से बचते नजर आए हैं। उन्होंने कहा, “तुम डर गए हो राघव। मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो और देश के असली मुद्दों पर भी चुप रहते हो।” यह बयान साफ तौर पर AAP के भीतर बढ़ते मतभेदों और असहमति को उजागर करता है।

सौरभ भारद्वाज ने चड्ढा पर निशाना साधा

AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने भी चड्ढा पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या उन्होंने गुजरात में गिरफ्तार किए गए पार्टी कार्यकर्ताओं के समर्थन में संसद में आवाज उठाई? उन्होंने यह भी सवाल किया कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पर कथित हमलों के मुद्दे पर चड्ढा ने कोई ठोस पहल क्यों नहीं की। सौरभ भारद्वाज ने कहा, कि संसद में सीमित समय का उपयोग गंभीर मुद्दों को उठाने के लिए होना चाहिए, लेकिन राघव चड्ढा उस भूमिका में सक्रिय नहीं दिख रहे।

“पार्टी के फैसले बदलते रहते हैं”

वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे विवाद पर संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पार्टी में इस तरह के बदलाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। मान ने उदाहरण देते हुए कहा, “जब हम पहली बार चार सांसद बने थे, तब धर्मवीर गांधी को नेता बनाया गया था। बाद में मुझे यह जिम्मेदारी दी गई। पार्टी के फैसले समय-समय पर बदलते रहते हैं।” उनका यह बयान इस बात का संकेत देता है कि नेतृत्व परिवर्तन को पार्टी एक नियमित और रणनीतिक निर्णय के रूप में देख रही है।

लंबे समय से पार्टी से बना ली दूरी

राघव 2022 से पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल 2028 तक है। हालांकि, राघव ने लंबे समय से पार्टी से दूरी बना ली थी और AAP को लेकर कोई बयान नहीं दिया। यहां तक कि पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के वक्त वह UK में थे। शराब घोटाला मामले में केजरीवाल के बरी होने पर भी उन्होंने एक शब्द नहीं कहा था।

क्या है पूरा मामला

आम आदमी पार्टी ने हाल ही में राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया और उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी संकेत दिया कि चड्ढा को सदन में बोलने के लिए प्राथमिकता न दी जाए। इस फैसले के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था—“खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।” उनके इस बयान ने राजनीतिक और मीडिया हलकों में नई बहस को जन्म दिया।


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