राहुल गांधी की सदस्यता पर फिर उठा सवाल, जानें लोकसभा सांसद को किन परिस्थितियों में ठहराया जा सकता है अयोग्य ?

नई दिल्ली: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कथित “अनैतिक आचरण” की जांच कराने और उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। इस मांग के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर किन परिस्थितियों में किसी सांसद की सदस्यता समाप्त की जा सकती है और इसकी संवैधानिक व कानूनी प्रक्रिया क्या है। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि राहुल गांधी की सदस्यता वर्ष 2023 में एक आपराधिक मामले में सजा के बाद समाप्त हो चुकी है और बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से बहाल भी हुई थी। ऐसे में मौजूदा विवाद ने संसदीय अयोग्यता के नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
लोकसभा सदस्यता समाप्त करने का कानूनी आधार
भारत में सांसदों और विधायकों की अयोग्यता से संबंधित प्रावधान संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) में दिए गए हैं।
1. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 सांसदों और विधायकों की अयोग्यता से संबंधित प्रमुख प्रावधान है। धारा 8(1) और 8(2): इन धाराओं के तहत कुछ विशेष अपराधों में दोषी ठहराए जाने पर तत्काल अयोग्यता का प्रावधान है। इनमें चुनाव संबंधी अपराध, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाना, भ्रष्ट आचरण, आतंकवाद, या समाज में शत्रुता उत्पन्न करने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
धारा 8(3): यदि किसी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है। इसके साथ ही सजा पूरी होने के बाद भी छह वर्षों तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध रहता है। सुप्रीम कोर्ट ने 2013 के लिली थॉमस बनाम भारत सरकार मामले में फैसला दिया था कि दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर सांसद या विधायक की सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाएगी, चाहे अपील लंबित ही क्यों न हो।
संविधान के तहत अयोग्यता के अन्य आधार
2. संविधान का अनुच्छेद 102 : अनुच्छेद 102 के तहत संसद सदस्य की अयोग्यता के अन्य आधार भी निर्धारित हैं, जैसे:
लाभ का पद धारण करना, दिवालिया घोषित होना, मानसिक रूप से अक्षम घोषित होना, भारतीय नागरिकता समाप्त होना या विदेशी नागरिकता स्वीकार करना। इन मामलों में निर्णय राष्ट्रपति द्वारा लिया जाता है, जो चुनाव आयोग की सलाह पर आधारित होता है।
विशेषाधिकार हनन और अनुशासनात्मक कार्रवाई
यदि किसी सांसद पर संसद के विशेषाधिकारों के उल्लंघन या अनैतिक आचरण का आरोप हो, तो मामला विशेषाधिकार समिति या आचार समिति (Ethics Committee) को भेजा जा सकता है। समिति जांच कर अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपती है। अंतिम निर्णय सदन के पटल पर रखा जाता है और बहुमत से कार्रवाई तय होती है। सजा में चेतावनी, निलंबन या अत्यंत गंभीर मामलों में निष्कासन (Expulsion) तक शामिल हो सकता है। हालांकि, निष्कासन एक दुर्लभ और गंभीर कदम माना जाता है।
राहुल गांधी का 2023 का मामला
वर्ष 2023 में राहुल गांधी को 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कर्नाटक के कोलार में दिए गए भाषण से जुड़े मानहानि मामले में सूरत की एक अदालत ने दो वर्ष की सजा सुनाई थी। धारा 8(3) के तहत दो वर्ष की सजा मिलते ही उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। यह कार्रवाई अदालत के फैसले के तुरंत बाद की गई थी। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी, जिसके परिणामस्वरूप उनकी लोकसभा सदस्यता बहाल कर दी गई। इस घटना ने देशभर में सांसदों की अयोग्यता से जुड़े नियमों को लेकर व्यापक राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दिया था।
मौजूदा विवाद: क्या है स्थिति?
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा लिखे गए पत्र में राहुल गांधी के कथित “अनैतिक व्यवहार” की जांच की मांग की गई है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि आरोप किस विशिष्ट कानूनी प्रावधान के तहत लगाए गए हैं। यदि मामला आपराधिक दोषसिद्धि से जुड़ा है, तो अदालत का फैसला निर्णायक होगा। यदि मामला विशेषाधिकार या सदन की गरिमा से जुड़ा है, तो जांच संसदीय समिति के माध्यम से हो सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी सांसद की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही संभव है।
सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया
अदालत द्वारा दोषसिद्धि, दो वर्ष या अधिक की सजा - तत्काल अयोग्यता
चुनाव याचिका
निर्वाचन को चुनौती मिलने पर हाई कोर्ट द्वारा सदस्यता रद्द की जा सकती है
संसदीय अनुशासनात्मक कार्रवाई, विशेषाधिकार हनन या गंभीर आचरण के मामलों में
संवैधानिक आधार
लाभ का पद, नागरिकता, दिवालियापन आदि, राजनीतिक और कानूनी संतुलन
सांसद की सदस्यता समाप्त करना एक गंभीर कदम है, क्योंकि यह सीधे तौर पर मतदाताओं के जनादेश को प्रभावित करता है। इसलिए कानून ने इस प्रक्रिया को स्पष्ट और कठोर बनाया है, ताकि राजनीतिक मतभेदों के आधार पर मनमानी कार्रवाई न हो सके। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि गंभीर अपराधों में दोषी जनप्रतिनिधि संसद में बने न रहें।
कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही संभव
निशिकांत दुबे की मांग के बाद राहुल गांधी की सदस्यता को लेकर फिर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, किसी भी सांसद की अयोग्यता केवल निर्धारित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही संभव है। वर्ष 2023 का उदाहरण दिखाता है कि अदालत का फैसला और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप इस प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मौजूदा मामले में भी अंतिम निर्णय कानूनी प्रक्रिया और संसदीय जांच पर निर्भर करेगा। जब तक कोई ठोस कानूनी आधार सामने नहीं आता, तब तक यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रहेगा, लेकिन सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया कानून द्वारा तय ढांचे के भीतर ही आगे बढ़ेगी।


