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मप्र में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक शिकारी बिछा रहे जाल

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले ही राजनेताओं में जुबानी दंगल तेज होता जा रहा

मप्र में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक शिकारी बिछा रहे जाल
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मप्र में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक शिकारी बिछा रहे जाल

राजनीतिक शिकारी बिछा रहे जाल



भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले ही राजनेताओं में जुबानी दंगल तेज होता जा रहा है, कोई किसी को डमरू बजाने वाला बता रहा है तो कोई मदारी तक पहुंच रहा है। मतदाता तो राजनीतिक शिकारी (राजनेता) के लिए शिकार से कम नहीं है। यही कारण है कि सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी हो या विपक्षी दल कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने तरह से जाल फैलाने में लगे हैं, और चाहते हैं कि शिकार उसके जाल में ही फंसे।

राजनेताओं के बयानों को सुनकर एक कहानी याद आ जाती है, जो बचपन में हर किसी ने पढ़ी नहीं तो, सुनी जरूर होगी, जिसमें तोते कहते हैं कि शिकारी आएगा, जाल फैलाएगा और हमें उसमें फंसना नहीं चाहिए, फिर भी फंस जाते हैं। जाल में फंसने के बाद भी तोते यही दोहराते रहते हैं, क्योंकि उन्हें एक महात्मा ने ऐसा बताया था। तोते तो रटने वाले थे, वे अर्थ नहीं जानते थे। देश के मतदाताओं का भी उन तोतों से हाल कम नहीं है।

मध्य प्रदेश में चुनाव करीब है, राजनेता तरह-तरह से जाल फैला रहे हैं, वादे कर रहे हैं, अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं तो कोई राज्य और केंद्र सरकार की नाकामियां गिनाने में लगा है। इसके चलते मतदाता यही कह रहा है कि, उन्हें फंसना नहीं है, मगर वे राजनेताओं के जाल में फंसने से बच पाएंगे, इसमें संदेह की गुंजाइश कम ही है, क्योंकि सरकार तो किसी एक दल की बनेगी ही।

राजनीतिक विश्लेषक देव श्रीमाली का कहना है कि वर्तमान दौर में राजनीतिक दलों का आचरण चुनावी आचार संहिता के विपरीत है, यह दल जो कर रहे है, जिससे उनकी स्थिति उन सेल जैसी हो गई है, जो डिस्काउंट देती है। कोई कुछ कह रहा है तो किसी और का अपने ही तरह का वादा है। इससे लोकतंत्र की मूलभावना पर तो असर पड़ ही रहा है, साथ में भरोसा भी कम हो रहा है। लिहाजा, अब तो राजनीतिक दलों को घोषणापत्र जारी करना ही बंद कर देना चाहिए।

राज्य में विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, मगर राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के हर नुस्खे अपनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं तो कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा जारी है।

चौहान अपने तीन कार्यकालों की उपलब्धियां गिना रहे हैं, साथ ही आगामी 2022 तक हर गरीब को जमीन और मकान का मालिक बनाने का वादा कर रहे हैं। इतना ही नहीं राज्य को समृद्ध प्रदेश बनाने का उनका वादा है। खेती केा फायदे का धंधा बनाने के साथ आय को दो गुना करने में कोई कसर नहीं छोड़ने की बात पर कायम हैं।

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस की प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का कहना है कि वर्तमान सरकार से प्रदेश की जनता परेशान हो चुकी है और अब वह इससे छुटकारा चाहती है, कांग्रेस की सभाओं में भीड़ लाई नहीं जाती, बल्कि आती है। कांग्रेस के सत्ता में आते ही राहुल गांधी की घोषणा के अनुसार, मात्र 10 दिन में किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा।

दोनों दलों के चुनावी जुमले जारी हैं। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोपों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है, दोनों ही दलों की कोशिश है कि मतदाता उसके जाल में ही फंसे, किसी भी कीमत पर बचने न पाए।

चार महीने बाद होने वाला विधानसभा चुनाव मतदाताओं के लिए कठिन परीक्षा की घड़ी है। वे सोच रहे हैं कि इन जुमलों में से किस पर भरोसा करें और किसे नकारें।


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