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साइबर ठगों को बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाली गैंग पुलिस के हत्थे चढ़ी
ग्वालियर की थाना हजीरा पुलिस ने लोन दिलवाने के नाम पर बैंक अकाउंट खुलवा उनसे लाखों की ठगी करने वाले चार आरोपियों को किया गिरफ्तार। साइबर ठगी में होता था इन बैंक अकाउंट का उपयोग

गजेन्द्र इंगले
ग्वालियर: साइबर ठगी के लिये जिन बैंक अकाउंट का उपयोग किया जाता है वह गरीब लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर खुलवाए जाते हैं। फिर पासबुक एटीएम सहित सभी कागजात ठगों को सप्लाई कर दिए जाते हैं। यही कारण है कि जब इन ठगी के मामलों में पुलिस कार्यवाई करती है तो भी असली ठग पुलिस गिरफ्त से दूर होते हैं और जिन गरीबों के नाम पता बैंक मेदर्ज होता है, वह पकड़े जाते हैं। इन ठगों को ऐसे ही बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह को ग्वालियर पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
पुलिस अधीक्षक ग्वालियर राजेश सिंह चंदेल को गरीब व अनपढ़ लोगों को लोन का झांसा देकर बैंकों में खाता खुलवाकर ठगी करने संबंधी शिकायते लगातार प्राप्त हो रहीं थी। जिस पर से पुलिस अधीक्षक ग्वालियर द्वारा जिले से समस्त थाना प्रभारियों को इस प्रकार की ठगी की वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया था। विगत दिनों सूचना प्राप्त हुई थी कि हजीरा एवं महाराजपुरा क्षेत्र में रहने वाले कुछ व्यक्ति लोन दिलाने के नाम पर बैंकों में खाता खुलवा रहे हैं।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ग्वालियर द्वारा अति. पुलिस अधीक्षक शहर मध्य ऋषिकेश मीणा को थाना हजीरा पुलिस की टीम बनाकर सीएसपी महाराजपुरा के मार्गदर्शन में कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया। सूचना की गोपनीय रूप से तस्दीक की गई एवं फरियादिया रानी गोस्वामी निवासी रसूलाबाद थाना हजीरा जिला ग्वालियर की शिकायत पर थाना हजीरा पुलिस द्वारा पांच आरोपियों के खिलाफ अप0क्र0 187/23 धारा 420 भादवि का प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
ऐसे चढ़े पुलिस के हत्थे
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार सीएसपी महाराजपुरा श्री रवि भदौरिया के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी हजीरा संतोष भदौरिया के नेतृत्व में थाना बल की टीम बनाकर उक्त प्रकरण का खुलासा कर आरोपियों की धरपकड़ हेतु लगाया गया।
पुलिस टीम द्वारा विवेचना के दौरान आये तकनीकी साक्ष्य व मुखबिर सूचना के आधार पर उक्त प्रकरण के फरार चार आरोपियों में से दो आरोपियों को थाना हजीरा क्षेत्रान्तर्गत इन्द्रानगर से पकड़ लिया गया और उनके अन्य साथियों के संबंध में जानकारी लेने पर ज्ञात हुआ कि दो अन्य शताब्दीपुरम क्षेत्र में मौजूद है।
जिस पर पुलिस टीम द्वारा दो अन्य आरोपियों को दाने बाबा का मंदिर शताब्दीपुरम से पुलिस अभिरक्षा में ले लिया। पकड़े गये चारों आरोपियों का एक साथी अभी फरार है जिसकी तलाश की जा रही है। पकड़े गये दो आरोपी हजीरा थाना क्षेत्र व दो अन्य आरोपी थाना महाराजपुरा क्षेत्र के रहने वाले हैं।
पकड़े गये आरोपियों की तलाशी लेने पर उनके पास से चार मोबइल जप्त किए गये। पकड़े गये आरोपियों द्वारा गरीब व अनपढ़ लोगों से संपर्क कर लोन दिलाने के नाम पर बैंक में खाता खुलवाकर लाखों की ठगी कराना स्वीकार किया। प्रारम्भिक पूछताछ में पुलिस को अभी तक 14 लोगों के बैंक खाते खुलवाने की जानकारी प्राप्त हुई है जिसमें लगभग 50 लाख रूपये का लेनदेन हुआ है। उपरोक्त सभी खातों को पुलिस द्वारा बैंक के माध्यम से फ्रीज करवा दिया गया है। पकड़े गये आरोपियों का रिमाण्ड लिया जा रहा है और उनसे ऑनलाईन फ्रॉड करने वाले गिरोहों के संबंध में पूछताछ की जावेगी।
यह है इनका ठगी का तरीका
ये आरोपी गरीब व अनपढ़ लोगों से संपर्क कर लोन दिलाने के नाम से आधार कार्ड व पैन कार्ड लेते थे और उसके बाद अन्य कई बैंक जैसे कैनरा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एचडीएफसी बैंक, आईडीएफसी बैंक, ईसेफ बैंक सेंटरल बैंक, एसबीआईबैंक, कोटक महिन्द्रा बैंक, एक्सिस बैंक, एयरटेल मनी बैंक पेटीएम बैंक आदि सभी बैंको में जाकर या ऑनलाईन आवेदन कर लोगों का बैंक में खाता खुलवाते थे। आरोपीगणों द्वारा खुलवाए गये खातों में अपना या अपने पास रखी हुई सिमों के मोबाइल नम्बरों को खाते में रजिस्टर करवाते थे तथा पता संबंधी परिर्वतन करने के लिये शपथ पत्र बनवाकर पेश करते थे और जब खाता खुल जाता था तब उनके पासबुक, चेकबुक एवं एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते थे।
आरोपीगण उसके बाद इन खातों को बिहार में गया, पटना आदि शहरों में ऑनलाईन फ्रॉड का काम कर रहे ठगों को पांच से दस हजार रूपये प्रति खाता लेकर बैच देते थे। इन ठगों का गिरोह लोगों को नौकरी डोट कॉम, बीमा दिलाने, मोबाइल टॉवर लगवाने तथा लोन दिलाने के नाम पर ऑनलाईन फ्रॉड करता है तथा इन खातों में फ्रॉड का शिकार लोगों से पैसा डलवाकर ठगी करते हैं। इसी प्रकार उक्त आरोपीगण सिम/मोबाइल नम्बर लेने के लिये गरीब व अनपढ़ लोगों को लोन का झांसा देकर उन्हे कुछ रूपये का लालच देकर अंगूठा लगवाकर अलग-अलग कम्पनियों की सिम या मोबाइल नम्बर चालू करवा लेते थे।
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