विस्फोटक की पकड़ी गई खेप के मामले में पुलिस कार्रवाई तेज
क्रशर खदानों में विस्फोट करने के लिए अवैध रूप से लाई गई बारूद से भरी गाड़ी के मामले में तीन आरोपी देर रात जांजगीर चांपा जिले के नावागांव से गिरफ्तार किया गया है

तीन आरोपी और किए गए गिरफ्तार
जब्त सामान की कीमत लगभग 12 लाख
रायगढ़। क्रशर खदानों में विस्फोट करने के लिए अवैध रूप से लाई गई बारूद से भरी गाड़ी के मामले में तीन आरोपी देर रात जांजगीर चांपा जिले के नावागांव से गिरफ्तार किया गया है और इनमें किरण इंटरप्राईजेस के प्रापाईटर के अलावा दो अन्य सहयोगी सरिया के रहने वाले प्रकाश अग्रवाल को अवैध रूप से बडी मात्रा में विस्फोटक की खेप बेच रहे थे और मुखबिर की सूचना के आधार पर इनमें से प्रकाश अग्रवाल तथा अन्य तीन को गिरफ्तार किया गया उसके बाद तीनों लोगों को पकड़े जाने से गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 7 हो गई है।
अब तक पकड़े गए आरोपी में प्रकाश अग्रवाल, खीरसागर नेताम, वेदराम साहू, दिनेश्वर यादव, किरण इंटरप्राईजेस के संचालक वेंकट सत्यनारायण, अजय कुमार नगारची और दिनेश्वर यादव हैं इसके अलावा सभी से पूछताछ के बाद अन्य साथियों की भी लिस्ट पुलिस तैयार कर रही है। अब तक जो सामान जब्त हुआ है उसकी कीमत पुलिस ने लगभग 12 लाख रूपए आंकी है।
छत्तीसगढ़ में पहली बार जिलेटीन, इलेक्ट्रीक तार, बारूद बनाने वाले सामान के अलावा 2 सौ से अधिक डेकोनेटर पकड़ाने के बाद से पुलिस अधीक्षक दीपक झा ने अलग-अलग टीमें बनाई थी और इसी टीम ने कल की जांच को आगे बढ़ाते हुए जांजगीर चांपा जाकर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है और अभी भी कई आरोपियों की तलाश जारी है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने आज बताया कि मुखबिर की सूचना के आधार पर यह कार्रवाई 20 मई की रात की गई थी और अलग-अलग इलाकों से आरोपियों की गिरफ्तारी करने के बाद अन्य सहयोगियों की तलाश भी जारी है।
उनका कहना है कि चूंकि इतनी बडी खेप विस्फोटक की मिलने से यह बात साफ हो गई कि इस इलाके में लगातार अवैध रूप से विस्फोटक की सप्लाई की जाती रही है और क्रशर खदानों के मालिकों की संलिप्तता होने की पूरी आशंका है। उनका कहना है कि इस मामले में और जांच जारी है और जल्द ही इनके अन्य सहयोगियों को भी पकड़ा जाएगा।
विस्फोटक से भरी गाडी जांजगीर से टिमरलगा मंगाने वाले व्यापारी का कहना है कि लंबे समय से वह यह काम कर रहा था और इस मामले में खरीदी बिक्री के कागज नही लगते थे। मजेदार बात यह है कि मुख्य सरगना बड़े आराम से इस बात को स्वीकार करता है कि सारंगढ़ व पुसौर ब्लाक में स्थित खदानों के संचालक उनसे विस्फोटक खरीदते थे।


