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पीएम को मणिपुर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना चाहिए था, पर वह अप्रभावित हैं : गौरव गोगोई

विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मणिपुर का दौरा किया और तीन महीने बाद भी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में विफल रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिर से आलोचना की

पीएम को मणिपुर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना चाहिए था, पर वह अप्रभावित हैं : गौरव गोगोई
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इम्फाल। विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को मणिपुर का दौरा किया और तीन महीने बाद भी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने में विफल रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिर से आलोचना की।

21 संसद सदस्‍यों के प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए कांग्रेस के असम सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री को सभी समुदायों को शामिल करके शांति बहाल करने के लिए मणिपुर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करना चाहिए था।

उन्होंने कहा, ''वह (प्रधानमंत्री) न केवल मणिपुर का दौरा करने से बच रहे हैं बल्कि मणिपुर मुद्दे पर संसद में बयान देने की सभी विपक्षी दलों की लगातार मांग को भी खारिज कर रहे हैं।''

गोगोई ने कहा कि 21 सदस्यीय संसदीय दल ने शनिवार को दो समूहों में विभाजित होकर चुराचांदपुर, इंफाल पूर्व और अन्य जिलों का दौरा किया और दोनों समुदायों के प्रभावित लोगों से बात की।

मणिपुर में 3 मई को भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 600 से अधिक लोग घायल हो गए हैं, जबकि हजारों घर और अन्य संपत्तियां नष्ट हो गई हैं।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव ने कहा कि वह संभवतः राज्यपाल अनुसुइया उइके से भी मुलाकात करेंगी।

दस दिन में दूसरी बार मणिपुर का दौरा कर रही देव ने आईएएनएस से कहा, "हम चुराचांदपुर और मणिपुर के अन्य प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगे। हम मुख्यमंत्री (एन. बीरेन सिंह) से नहीं मिलेंगे क्योंकि वह मणिपुर में चल रहे जातीय संघर्ष के खलनायक हैं।"

उन्‍होंने कहा, "भाजपा और उसकी सरकारें मणिपुर संकट और कई लोगों की जान जाने और तबाही के लिए जिम्मेदार हैं। यहां भाजपा और प्रधानमंत्री का चेहरा खो चुका है। हमारे लिए यहां आना और पीड़ितों से मिलना महत्वपूर्ण था। दु:खद बात यह है कि भारत सरकार को एक प्रतिनिधिमंडल भेजना चाहिए था लेकिन वह मूकदर्शक बनी रही।”

विपक्षी प्रतिनिधिमंडल की एक टीम ने शनिवार को दंगा प्रभावित चुराचांदपुर शहर का दौरा किया, जहां उन्होंने कुकी नेताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के अलावा राहत शिविरों में जातीय संघर्ष पीड़ितों से मुलाकात की, जहां वे ठहरे हुए थे।

चुराचांदपुर में कुकी नेताओं से मुलाकात के बाद लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने मीडिया से कहा कि राहत शिविरों में रहने वाले लोग महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं।

उन्‍होंने सवाल किया, "सरकार ने प्रभावित मणिपुरी लोगों की आवाज़ नहीं सुनी... वे (केंद्र सरकार) अब तक सो रहे हैं?"

आईयूएमएल सांसद ई.टी. मुहम्मद बशीर ने कहा, "हमारा मुख्य उद्देश्य तथ्यों की खोज करना है। हमें यौन उत्पीड़न, नग्न परेड जैसे अपराधों की भयावह जानकारी मिल रही है। इसलिए हम संबंधित अधिकारियों के साथ भी चर्चा करेंगे। हमने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है और पीड़ितों से मुलाकात की है। हम मणिपुर से मिले सभी अनुभवों के साथ एक बार फिर इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।”

शिव सेना-यूबीटी सांसद अरविंद सावंत ने कहा, "मणिपुर आने की हमारी योजना का उद्देश्‍य समुदायों के बीच शांति और सद्भाव लाना है।"

भाकपा सांसद पी. संतोष कुमार ने कहा कि यह यात्रा यह संदेश देने के लिए है कि टीम 'इंडिया' सिर्फ चुनावी गठबंधन नहीं है, बल्कि यह लोगों की आवाज उठाने के लिए है।

राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि वे पीएम को बताना चाहते हैं कि 'हम वह करने का प्रयास कर रहे हैं जो उन्हें और उनकी टीम को करना चाहिए था'।

झा ने कहा, "हम हिंसा प्रभावित राज्य के लोगों के सामूहिक दर्द को समझने के लिए मणिपुर का दौरा कर रहे हैं।"

प्रतिनिधिमंडल में शामिल द्रमुक सांसद कनिमोझी ने कहा, "हमने मणिपुर के लोगों से मुलाकात की और उन्हें बताया कि हम उनके साथ खड़े हैं और हम उनके लिए लड़ रहे हैं। हमने मणिपुर के राज्यपाल से भी मिलने की अनुमति मांगी। हमें उम्मीद है कि मणिपुर पर चर्चा के बाद पीएम संसद में जवाब देंगे।"

मणिपुर में यथाशीघ्र शांति लाने के लिए मौजूदा स्थिति और संभावित उपायों पर चर्चा करने के लिए संसदीय प्रतिनिधिमंडल रविवार को यहां राजभवन में राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात कर सकता है।

मणिपुर में आदिवासियों की शीर्ष संस्था इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (आईटीएलएफ) ने दौरे पर आए संसदीय प्रतिनिधिमंडल को एक ज्ञापन सौंपकर एक अलग प्रशासन (अलग राज्य के बराबर) और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने की अपनी मांग का समर्थन मांगा।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने और संसद में चर्चा की मांग कर रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य राजीव रंजन सिंह, ए.ए. रहीम, जावेद अली खान, महुआ माजी, पी.पी. मोहम्मद फैजल, अनिल प्रसाद हेगड़े, एन.के. प्रेमचंद्रन, सुशील गुप्ता, डी. रविकुमार, थिरु थोल थिरुमावलवन, जयंत सिंह, फूलो देवी नेताम, और के. सुरेश हैं।


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