पीसीएसडीएस ने जारी की रिपोर्ट
देश में शिक्षण संस्थानों पर जिस तरह हमला किया जा रहा है, वह सुनियोजित है। न सिर्फ कोर्स में बदलाव किया जा रहा है, बजट में भारी कटौती कर फीस में बढ़ोत्तरी की जा रही है

नई दिल्ली। देश में शिक्षण संस्थानों पर जिस तरह हमला किया जा रहा है, वह सुनियोजित है। न सिर्फ कोर्स में बदलाव किया जा रहा है, बजट में भारी कटौती कर फीस में बढ़ोत्तरी की जा रही है। हमला कैंपस में भी बढ़ गया है, जहां विरोधी आवाजों को दबाया जा रहा है।
राजधानी दिल्ली में आज सिकुड़ते डेमोक्रेटिक स्पेस के लिए बनाए गए पीपुल्स कमीशन पीसीएसडीएस ने शिक्षा की बदहाली को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट 11 अप्रैल से 13 अप्रैल तक आयोजित जनसुनवाई के दौरान जो जानकारियां सामने आई हैं, उनके आधार पर तैयार की गई है।
जनसुनवाई में 17 राज्यों के 50 संस्थानों और विश्वविद्यालयों के करीब 130 छात्रों व अध्यापकों ने शपथ पत्र प्रस्तुत किए थे और 49 लोगों ने मौखिक गवाही दी थी। जनसुनवाई में ज्यूरी पैनल में पूर्व न्यायमूर्ति होसबेट सुरेश. पूर्व न्यायमूर्ति बीजी कोलसे पाटिल, प्रो. अमित भादुड़ी, डा. उमा चक्रवर्ती, प्रो.टीके ओमेन, प्रो. वासंती देवी, प्रो. धनश्याम शाह, प्रो. मेहर इंजीनियर जैसी विख्यात हस्तियों ने हिस्सा लिया था। इस रिपोर्ट का विमोचन आज देश के अलग-अलग हिस्सों में किया गया। विमोचन के समय वक्ताओं ने चिंता जाहिर की, कि शिक्षा की जो स्थिति है, आने वाले समय में वह आम लोगों की पहुंच से दूर हो सकती है।
यूजीसी जैसी संस्था के कोई मायने नहीं रह गए हैं, सरकार का हस्तक्षेप काफी बढ़ गया है। शिक्षा पर यह हमला पिछले चार सालों में लगातार बढ़ा है।
प्रोफेसर अपूर्वानंद का कहना था, कि स्वायत्ता की बात दिल्ली जैसे शहरों में भले ही अच्छी लगे, पर राज्यों के विश्वविद्यालयों के पास तो संसाधन ही नहीं हैं, कालेज अस्थाई शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं, शोध के लिए जो विषय चुने जा रहे हैं, वह केवल स्कोलरशिप लेने के लिए हो रहा है, न कि ज्ञान के विस्तार और नई जानकारियां बाहर लाने के लिए। प्रो. पामेला का कहना था, कि स्कूली पाठ्यक्रम में जिस तरह का बदलाव किया जा रहा है, वह खतरनाक है, उन्होंने कैम्पस में छात्रों के अधिकारों पर हो रहे हमलों का जिक्र भी किया। कार्यक्रम को उमा चक्रवर्ती, लारा व अनिल चौधरी ने भी संबोधित किया।


