तल्लाह पुल पर पाबंदी से यात्रियों काे हो रही परेशानी
तल्ला पुल चिड़िया मोड़, सिंटे और डनलप बीटी रोड समेत शहर के उत्तरी इलाकों के बड़े हिस्से को श्यामबाजार से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण जरिया है।

कोलकाता । भारतीय रेल तकनीकी एवं आर्थिक सेवा (राईट्स) की सिफारिशों के बाद उत्तरी 24 परगना जिले से कोलकाता में प्रवेश करने के लिए मुख्य मार्गों में से एक तल्लाह पुल पर बसों और भारी वाहनों के परिचालन पर प्रतिबंध के कारण शहर के उत्तरी हिस्से से आने वाले दैनिक यात्रियों को अपने गंतव्यों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
तल्ला पुल चिड़िया मोड़, सिंटे और डनलप बीटी रोड समेत शहर के उत्तरी इलाकों के बड़े हिस्से को श्यामबाजार से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण जरिया है। कार, लॉरी, मैटाडोर और बसों के अलावा हजारों अन्य वाहन बैरकपुर और सोदपुर के दूर-दूर के हिस्सों से कोलकाता पहुँचने के लिए इस पुल का इस्तेमाल करते हैं।
तल्लाह पुल पर छोटी कारों को जाने की अनुमति देने के बावजूद, दमदम, नागरबाजार और आस-पास के इलाकों की कारें वीआईपी रोड का इस्तेमाल कर रही हैं क्योंकि नागोरबाजार से श्यामबाजार तक जेसोर रोड पर यातायात की स्थिति काफी अस्त-व्यस्त है। विधाननगर थाना के एक अधिकारी ने बताया कि इसके कारण अब वीआईपी रोड पर भी जाम लगने लगा है।
इससे पहले, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी फर्म राईट्स द्वारा किए गए एक जांच से पता चला कि यह पुल जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। वर्ष 1962 में इस पुल काे चालू किय गया यह पुल इस्पात की चादरों के सहारे टिका हुआ है।
अभियंताओं ने कहा है कि कई इस्पात की चादरें छतिग्रस्त हो गयी हैं जिसका मतलब है कि उनके पास अब भार सहन करने की क्षमता नहीं है। उन्होंने कहा कि 57 साल पुराना पुल इतनी ‘खराब स्थिति’ में है कि इसपर कारों को भी चलने से रोका जाना चाहिए।
मुंबई की एक विशेषज्ञ टीम ने 57 साल पुराने पुल को ध्वस्त करने और पुनर्निर्माण करने की सलाह दी है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा,“राइट्स का मानना है कि पुल की स्थिति ऐसी है कि तीन टन से अधिक कोई भी वाहन इस पर न चलाया जाए। इस वजह से राज्य सरकार इस पुल पर बसों को चलाने का जोखिम में नहीं उठा सकती है। लोगों के जीवन और उनकी सुरक्षा हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।”
इस बीच, राज्य परिवहन विभाग ने उन यात्रियों के लिए अतिरिक्त बसें और अन्य सेवा शुरू करने का फैसला किया है जो पुल के बंद होने के बाद असुविधा का सामना कर रहे हैं। विभाग ने 34-सीटों वाले मिनी बसों की संख्या में वृद्धि करने का भी निर्णय लिया है।


