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संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान ने एक बार फिर उठाया कश्मीर मुद्दा

 पाकिस्तान ने मानवाधिकार परिषद में दोहरा हथकंडा अपनाते हुए इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की ओर से और फिर अपनी ओर से कश्मीर मुद्दा उठाया

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान ने एक बार फिर उठाया कश्मीर मुद्दा
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संयुक्त राष्ट्र। पाकिस्तान ने मानवाधिकार परिषद में दोहरा हथकंडा अपनाते हुए इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की ओर से और फिर अपनी ओर से कश्मीर मुद्दा उठाया।

भारत ने बुधवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में चर्चा के दौरान यह कहते हुए ओआईसी का बयान खारिज कर दिया कि भारत के आंतरिक मामलों में संगठन का कोई आधार नहीं है और पाकिस्तान पर मानवाधिकारों की चिंता की आड़ में आतंकवाद को अपनी नीति के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

पाकिस्तान ने भारत की काउंटर स्टेटमेंट का जवाब देते हुए कुलभूषण जाधव का मुद्दा भी उठाया। जिनेवा में भारतीय मिशन के सलाहकार सुमित सेठ ने कहा कि विश्व को एक नाकाम देश से लोकतंत्र और मानवाधिकारों का पाठ सीखने की जरूरत नहीं है। एक ऐसा देश जो खुद इस मोर्चे पर असफल रहा है और ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादियों का संरक्षण करता है।

उन्होंने कहा, "आज आईओसी के बयान में भारत के उल्लेखों के संदर्भ में हम इन सभी उल्लेखों को खारिज करते हैं। भारत के आंतरिक मामलों में ओआईसी की कोई अधिस्थिति नहीं है।"

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के मिशन के सेकेंड सेक्रेटरी काजी सलीम अहमद खान ने ओआईसी की ओर से संबोधित करते हुए कश्मीर को फिलीस्तीन से जोड़ने से कोशिश की।

उन्होंने इजरायली सैनिकों से दुर्व्यवहार करने के मामले में इजरायली सैन्य प्राधिकरण के समक्ष सुनवाई का सामना कर रही 17 वर्षीया फिलीस्तीनी किशोरी अहद तमिमी के बारे में बात करते हुए कश्मीर में सुरक्षाबलों द्वारा पैलेट गन से की गई गोलीबारी में अपनी एक आंख गंवा चुकी 16 वर्षीया कश्मीरी लड़की इन्शा मुश्ताक का भी जिक्र किया।

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थाई प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने सितंबर में एक घायल फिलीस्तीनी लड़की की तस्वीर दिखाकर दावा किया था कि वह कश्मीरी है।

इस तस्वीर को न्ययूॉर्क टाइम्स ने प्रकाशित भी किया था। इसके बाद बुधवार को जिनेवा में पाकिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि फारुक अमिल ने कहा कि वह चिंतित हैं कि भारत चरमपंथ और सांप्रदायिकता से प्रेरित होकर राजनीतिक आदेश दे रहा है।

उन्होंने भारत में बीफ विवाद का उल्लेख करते हुए कहा था कि बीफ ले जा रहे मुस्लिमों की बेरहमी से हत्या कर दी जाती है।

इस पर सेठ ने जवाब देते हुए कहा, "विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने बार-बार कहा है कि पाकिस्तान में किस तरह अपहरण जैसे अपराधों को लेकर कोई सजा नहीं दी जाती, विशेष रूप से बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में, जहां लोगों को अगवा कर लिया जाता है या उनका कत्ल कर दिया जाता है।"

उन्होंने कहा, "पश्चिमोत्तर पाकिस्तान में मौजूदा और पूर्व में सशस्त्र संघर्षो की वजह से 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।"

उन्होंने कहा, "महिलाएं और बच्चियां विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और बच्चियों को अगवा कर उनका जबरन विवाह कराया जाता है।"

उन्होंने कहा, "आतंकवाद मानवाधिकारों का सर्वाधिक मूलभूत उल्लंघन है। पाकिस्तान लंबे समय से भारत शासित कश्मीर को हथियाने का प्रयास करता रहा है, जो कि भारत का अभिन्न अंग है।"

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान, भारत में सीमापार आतंकवाद का समर्थन कर रहा है। हम 2008 मुंबई हमले, 2016 के पठानकोट और उड़ी हमले में शामिल लोगों के खिलाफ पाकिस्तान सरकार द्वारा कड़ा कदम उठाए जाने का इंतजार कर रहे हैं।"

वह कहते हैं, "जो देश ओसामा बिन लादेन और मुल्ला उमर जैसों को संरक्षण देता है, वह खुद आतंकवाद से पीड़ित होने का ढोंग कर रहा है।"

उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद की प्रस्तावना का उल्लंघन कर हाफिज सईद जैसे आतंकवादी पाकिस्तानी सरकार की मदद से पाकिस्तान में खुलेआम अपने काम को अंजाम दे रहे हैं और आतंकवादी संगठन पाकिस्तान की मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय है।

इसका जवाब देते हुए एक पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भारत पर आरोप लगाते हुए कहा कि जाधव की गिरफ्तारी इसका सबूत है।


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