Top
Begin typing your search above and press return to search.

बंगाल में तृणमूल व भाजपा के लिए अब एनआरसी मुद्दा अहम

बंगाल के गर्म राजनीतिक माहौल में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच बहस का केंद्रबिंदु बन गया है

बंगाल में तृणमूल व भाजपा के लिए अब एनआरसी मुद्दा अहम
X

कोलकाता। बंगाल के गर्म राजनीतिक माहौल में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच बहस का केंद्रबिंदु बन गया है।

भाजपा की बंगाल इकाई पिछले कुछ समय से असम में जारी एनआरसी की तरह ही राज्य में भी इसके प्रकाशन की मांग कर रही है।

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रमुख दिलीप घोष ने कई मौकों पर कहा है कि केवल एक एनआरसी ही अवैध बांग्लादेशियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है।

असम एनआरसी की अंतिम सूची 31 अगस्त को जारी होने के तुरंत बाद घोष ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा था, "हम मांग करते हैं कि असम की तरह ही बंगाल में भी एनआरसी को लागू किया जाए।"

घोष ने कहा है कि 2021 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद एनआरसी के जरिए बांग्लादेशी मुसलमानों को राज्य से बाहर निकाल देंगे।

घोष आज भी जब सुरक्षा से संबंधित खतरे के बारे में बात करते हैं तो वह अवैध बांग्लादेशी मुसलमानों को राज्य और देश के निवासियों के लिए खतरा बताते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि घोष अवैध बांग्लादेशी के बजाय अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम वाक्य पर जोर देते दिखाई देते हैं।

वहीं तृणमूल इसे पश्चिम बंगाल में 28 फीसदी मुस्लिम आबादी (अनाधिकारिक तौर पर संख्या बढ़ गई है) पर हमले के रूप में मानती है, जिन्होंने पारंपरिक तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को वोट दिया है।

इसलिए ही इस बात पर कोई आश्चर्य नहीं है कि तृणमूल कांग्रेस ने असम में एनआरसी की आलोचना करने के लिए पिछले शुक्रवार को बंगाल विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया था।

इस पर जब भाजपा ने आपत्ति जताई तो ममता ने कहा, "हम पश्चिम बंगाल में भाजपा को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर लागू नहीं करने देंगे।"

भाजपा का कहना है कि साल 2021 के चुनाव में वोट हासिल करने के लिए ही तृणमूल इसका विरोध कर रही है। यही कारण है कि रविवार को तृणमूल कार्यकर्ता इस मुद्दे को सड़कों तक ले गए। राज्य में एनआरसी को लागू करने का विरोध व्यक्त करने के लिए सत्ताधारी दल द्वारा मध्यम स्तर की रैलियां और मोहल्ला बैठकों का आयोजन भी किया गया।

यह महज कोलकाता तक ही सीमित नहीं रहा। बर्दवान, बीरभूम और मेदिनीपुर जैसे जिलों में भी तृणमूल कार्यकर्ताओं द्वारा बंगाल में एनआरसी के खिलाफ विरोध जताया गया।

गृहमंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि "अगर भाजपा सत्ता में आती है तो हम सभी घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने के लिए यहां एनआरसी जारी करेंगे।"

पश्चिम बंगाल में 2018 से ही भगवा पार्टी अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। भाजपा ने पिछले साल हुए हिंसाग्रस्त पंचायत चुनावों में और इस साल के लोकसभा चुनावों में काफी बढ़त हासिल की है। यहां पार्टी ने अपनी पिछली दो सीटों की अपेक्षा अप्रत्याशित रूप से सफलता हासिल करते हुए 18 सीटों पर जीत दर्ज की है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it