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ईवीएम के सवाल पर कारावास की सजा के मामले में निर्वाचन आयोग को नोटिस

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाने पर छह महीने की जेल के कानूनी प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया

ईवीएम के सवाल पर कारावास की सजा के मामले में निर्वाचन आयोग को नोटिस
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नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाने पर छह महीने की जेल के कानूनी प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने सुनील अहया की याचिका पर दलील सुनने के बाद चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया।

चुनाव नियम संहिता की धारा 49 एमए के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति ईवीएम में विसंगति के संबंध में शिकायत (किसी विशेष पार्टी लिए वोट किया लेकिन किसी अन्य को चला गया) करता है और जांच के बाद यह गलत पाया जाता है तो शिकायतकर्ता पर 'गलत जानकारी देने के लिए' आईपीसी की धारा 177 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इस धारा के तहत छह महीने की जेल या 1,000 रुपये जुमार्ना या दोनों सजा हो सकती है।

याचिकाकर्ता सुनील अहया ने अदालत से कहा कि यह धारा मतदाता को वोट डालने के दौरान कोई विसंगति नजर आने पर शिकायत करने से रोकती है।

उन्होंने कहा कि यह प्रावधान उचित नहीं है और इससे मतदाता सही शिकायत करने से भी हतोत्साहित होंगे।

याचिकाकर्ता ने कहा, "इससे नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन होता है, जोकि भारत के संविधान के अनुच्छेद (19) (1) के तहत एक मौलिक अधिकार है।"


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